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लगी मुहर, स्लम में रहने वाले लोगों को मिलेगा मालिकाना हक
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 27 Feb 2016 09:56 AM IST
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उत्तराखंड के विभिन्न शहरों में अव्यवस्थित 582 मलिन बस्तियों के नियमितीकरण और भू स्वामित्व के मुद्दे पर कैबिनेट में सैद्धांतिक सहमति बन गई है। बस्तियों के नियमितीकरण के लिए गठित समिति ने कैबिनेट में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
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रिपोर्ट के मुताबिक पहले समस्त बस्तियों का सीमांकन कर नोटिफाइड कर दिया जाए, ताकि भविष्य में बस्तियों के विस्तार को रोका जा सके। समिति ने सुझाव दिया है कि डीएम की अध्यक्षता में समिति का गठन कर निर्धारित समयावधि के भीतर सीमांकन की प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाए।
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समिति ने नवंबर 2013 में मंत्रिमंडल समिति में लिए गए निर्णय का हवाला देते हुए संस्तुति की है कि नौ नवंबर 2000 से पूर्व बसे लोगों को भू स्वामित्व दिया जाना उचित होगा। मलिन बस्तियों में रिहायशी क्षेत्र की रजिस्ट्री करवाई जाए और आधार वर्ष के सर्किल रेट के अनुसार स्टांप शुल्क वसूला जाए। इससे सरकार को राजस्व की प्राप्ति होगी और नगर निकाय भी कर आरोहण करके अपनी आय बढ़ा सकेंगे।
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समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नगरीय क्षेत्रों में सौ वर्गमीटर भूमि पर एससी, एसटी, अंत्योदय और बीपीएल को भूमिधरी अधिकार के लिए कुछ भी नहीं देना होगा। ऐसी मलिन बस्तियां जो आपदाग्रस्त क्षेत्रों या नदियों के कछार में स्थित हैं और जनहित में उन्हें हटाया जाना जरूरी है, उन बस्तियों में रहने वालों को केंद्र की ‘सबके लिए आवास योजना’ के तहत आवासों का निर्माण कराकर ही बसाया जाएगा।
सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण रोकने में प्रशासन नाकाम
कैबिनेेट में सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में मलिन बस्ती विनियमितीकरण समिति का कहना है कि जिलों में लैंड बैंक का सृजन नहीं होने और विभागों के बीच आपसी तालमेल के अभाव के चलते सरकारी जमीनों पर तेजी से अतिक्रमण हो रहा है। संबंधित विभागों द्वारा अतिक्रमण रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अतिक्रमण रोकने को डीएम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समितियों का गठन कर सरकारी जमीनों को चिह्नित कर उन्हें सूचीबद्ध किया जाए।
चेन्नई, बंगलूरू, मुंबई, अहमदाबाद जाएगी समिति
कैबिनेट को सौपी रिपोर्ट में समिति ने सुझाव दिया है कि चेन्नई, बंगलूरू, मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में मलिन बस्तियों का नियमितीकरण कैसे किया गया? इसके लिए अध्ययन के लिए समिति अध्यक्ष सचिव और सदस्यों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ताओं को इन शहरों का भ्रमण कराया जाए। ताकि समिति अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर सके।