कैबिनेट फैसला: पक्की होगी शिक्षामित्रों की नौकरी
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शुक्रवार को तीन घंटे तक चली कैबिनेट ने ताबड़तोड़ कई लोक लुभावन फैसले किए। कैबिनेट ने आपदा प्रभावितों, लंबे समय से आंदोलन कर रहे शिक्षा आचार्य, शिक्षा मित्र, उद्योग और मध्यम वर्ग को तोहफे दिए।
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कैबिनेट ने बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के दरवाजे खोले तो आपदा प्रभावितों के जख्मों पर मरहम लगाने की भी कोशिश की।
कैबिनेट के बाद सचिवालय में मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने मीडिया को ब्रीफ किया।
शिक्षा मित्रों पर सरकार जमकर मेहरबान
शिक्षा मित्र, शिक्षा आचार्य और बीएड टीईटी पर सरकार जमकर मेहरबान हुई। मंत्रिमंडल ने इनको नियमित करने का रास्ता साफ किया। पिछले लंबे समय से ये लोग धरना प्रदर्शन कर विरोध जता रहे हैं।
कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदयेश की अध्यक्षता में बनी कैबिनेट की उपसमिति एक हजार नए पदों के सृजन का रास्ता निकालेगी।
टीईटी प्रशिक्षण की समय सीमा की समाप्त
टीईटी की एक अप्रैल 2014 तक प्रशिक्षण की बाध्यता को समाप्त करने का फैसला कैबिनेट ने लिया। नई नियुक्तियों वालों की तैनाती आपदा प्रभावित क्षेत्रों में की जाएगी।
अभी तक 1900 बीटीसी प्रशिक्षण वाले हैं। इनमें से 1278 जून तक प्रशिक्षण प्राप्त कर लेंगे। जबकि 910 शिक्षा आचार्य संविदा पर कार्यरत है। शिक्षा आचार्यों को अतिरिक्त प्रशिक्षण सरकार देगी और प्रशिक्षण के दौरान इनको मानदेय दिया जाएगा।
इनके लिये पदों को आरक्षित रखा जायेगा। आरक्षण का ध्यान रखते अतिरिक्त पद संबंधित काडर में सृजित किये जायेगें। यह नियुक्तियां सहायक अध्यापकों के रूप में की जाएगी।
शहरी मध्यवर्ग को खुश करने की कोशिश
यह शायद आने वाले चुनाव की आहट ही है कि सरकार ने शहरी मध्यम वर्ग को भी तोहफा देने में गुरेज नहीं किया।
शहरी मध्यवर्ग को खुश करने के लिए जलकर माफ किया और वह भी इस आश्वासन के साथ कि आगे भी जलकर नहीं लिया जाएगा। शुक्रवार को कैबिनेट ने ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के लिए जल कर माफ करने का फैसला लिया।
ग्रामीण क्षेत्रों में कैबिनेट के इस फैसले से सरकार पर करीब 32 करोड़ का वित्तीय भार पड़ेगा। फिलहाल यह मुख्यमंत्री राहत कोष से वहन किया जाएगा।
उत्तराखंड खाद्य सुरक्षा योजना
दूसरी तरफ इसी वर्ग को लुभाने के लिए कैबिनेट के पिटारे से उत्तराखंड खाद्य सुरक्षा योजना भी निकली। इस योजना के तहत उन लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के दायरे में नहीं आ रहे हैं। योजना को लागू करने की समय सीमा भी तय कर दी गई।
आपदा प्रभावितों पर रहा कैबिनेट का फोकस
तात्कालिक राहत के तहत इन लोगों को बाढ़ में बह गए सामान का मुआवजा नहीं मिल पा रहा था। खास बात यह भी रही कि केदारघाटी की नीति को प्रदेश सरकार चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी में भी लागू करने जा रही है।
फिलहाल केदारनाथ के पैकेज पर सरकार को करीब 35 करोड़ के व्यय भार का अनुमान है।
पर्वतीय उद्दोगों पर भी मेहरबान
कैबिनेट की निगाह खास तरीके से पर्वतीय जिलों में उद्योगों पर भी गई। क्रय वरीयता नीति को लागू करने की बात प्रदेश में लंबे समय से हो रही थी।
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नीति न होने की वजह से प्रदेश के उद्योगों को बाहर के राज्यों के उद्योगों से समान दर पर प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही थी। करीब-करीब अन्य सभी राज्यों में उनकी अपनी नीति लागू है।
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इसी तरह पहाड़ों पर 100 औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने का फैसला स्थानीय उद्यमियों को भाएगा। एमएसएमई नीति की मांग भी प्रदेश में हो रही है और इसके लिए केबिनेट ने उपसमिति का गठन किया।