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उत्तराखंड के 'लाल' को मोदी की कॉल

Sun, 29 Dec 2013 01:55 PM IST
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 29 Dec 2013 01:55 PM IST
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uttarakhand boy got offer from modi
मोबाइल के जरिए विस्फोटकों की तलाश करने वाले ‘मोबाइल बम डिटेक्टर सेंसर’ बनाने वाले कर्णप्रयाग के बेटे अभिलाष सेमवाल का चयन आईआईटी खड़गपुर ने दुनिया की शीर्ष-20 टीमों में किया है।
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ये टीमें जनवरी 2014 में ग्लोबल समिट में अपने अनुसंधानों का डेमो दिखाएंगी। अभिलाष इस सूची में सातवां स्थान पर हैं। गुजरात सरकार ने अभिलाष को उनकी खोज पर बधाई दी है।
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यही नहीं, ग्लोबल समिट में कामयाब रहने पर उन्हें गुजरात के लिए ये सेंसर बनाने की पेशकश भी की गई है।

जनवरी में होगी समिट
आईआईटी खड़गपुर में हर तीसरे साल ‘ग्लोबल इंटरप्रेन्योरशिप समिट’ का आयोजन होता है। इस वर्ष यह समिट 10 से 12 जनवरी तक होगी। समिट में दुनियाभर से ऐसे छात्र पहुंचते हैं जिन्होंने कुछ अलग प्रयोग कर नया आविष्कार किया हो।
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बीटेक के हैं छात्र
कर्णप्रयाग निवासी और ग्राफिक एरा हिल विवि के बीटेक कंप्यूटर साइंस तृतीय वर्ष के छात्र अभिलाष ने भी ऐसा सेंसर ईजाद किया है, जो कार में बम लगा होने पर इसकी सूचना तुरंत मोबाइल पर पहुंचा देता है।

अभिलाष ने बताया कि अब वह अपने सेंसर को व्यावहारिक तौर पर दुनियाभर के विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। वे इसे पास करते हैं तो दो लाख रुपये नकद पुरस्कार और सेंसर को डेवलप करने के लिए 45 लाख रुपये की ग्रांट मिलेगी।

मोदी ने किया फोन
अभिलाष ने बताया कि उन्हें इस कामयाबी पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम ने कॉल की थी। कहा गया कि यदि समिट में यह डिटेक्टर चिप कामयाब हो जाती है तो वह सबसे पहले गुजरात सरकार के लिए यह चिप बनाएं।

ऐसे काम करता है सेंसर

कार में लगा सेंसर कार के चेसिस नंबर की सहायता से मोबाइल से कनेक्ट होता है। यह सेंसर अपने आसपास किरणें छोड़ता है। बम में मौजूद गैसें जैसे ही इन किरणों से टकराती हैं तो तुरंत सेंसर को इसकी जानकारी मिल जाती है।


सेंसर इसका अलर्ट संबंधित मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से भेज देता है। इस तकनीक से कार में बम का काफी हद तक पता चल जाएगा।

सरकार से मदद की दरकार
अभिलाष के पिता प्रकाश चंद सेमवाल का दो वर्ष पहले निधन हो चुका है। चाचा और दादा उसकी पढ़ाई का खर्च चला रहे हैं। माता अंजना सेमवाल गृहिणी हैं।

अभिलाष ने बताया कि इस प्रयोग में हालांकि ज्यादा खर्च नहीं है लेकिन 50 हजार रुपये या फिर शुल्क में कुछ माफी यदि सरकार की ओर से मिल जाएगी तो उनकी राह ज्यादा आसान हो जाएगी।
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