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Uttarakhand Assembly Winter Session : कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली का केंद्र को दोबारा प्रस्ताव भेजेगी सरकार

Wed, 23 Dec 2020 11:50 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 23 Dec 2020 11:50 PM IST
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Uttarakhand Assembly winter session 2020: state agitators march today
uttarakhand assembly house

प्रदेश के तीन लाख से अधिक कर्मचारियों की पेंशन के मुद्दे पर प्रदेश सरकार एक बार फिर केंद्र सरकार से रियायत का आग्रह करेगी। संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने बुधवार को विपक्ष की ओर से उठाए गए इस मुद्दे का जवाब देते हुए यह जानकारी दी। कांग्रेस विधायक दल के उपनेता करन माहरा ने बुधवार को नियम 58 के तहत यह मामला उठाया। इस नियम के तहत सदन में मुद्दे पर चर्चा कराई जाती है जिसमें पक्ष-विपक्ष के सदस्य भाग लेते हैं। 

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प्रदेश में इस समय नई पेंशन स्कीम भी लागू है जो 2004 में लागूू की गई थी। इस पेंशन स्कीम में करीब 75 हजार कर्मचारी शामिल भी हो चुके हैं। इनकी शिकायत है कि नई पेंशन स्कीम से कर्मचारियों को खासा नुकसान हो रहा है।
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इसी शिकायत के आधार पर प्रदेश में पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने की मांग कर्मचारी कर रहे हैं और इसके समर्थन में आंदोलन भी जारी है। माहरा ने कहा कि कर्मचारियों की शिकायत है कि वे इस मामले को सरकार के सामने उठा रहे हैं लेकिन सरकार इसे तवज्जो नहीं दे रही है।
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Uttarakhand Assembly Session: भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सदन में हुआ जमकर हंगामा, पारित हुए छह विधेयक

इससे कर्मचारियों की नाराजगी में भी इजाफा हो रहा है। करीब 30-40 साल की सरकारी नौकरी के बाद भी पेंशन की व्यवस्था न होने से कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। 

इस पर संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार एक बार पहले भी केंद्र सरकार से इस मामले में रियायत का आग्रह कर चुकी है। केंद्र सरकार को दोबारा यह प्रस्ताव भेजा जाएगा। संसदीय कार्यमंत्री के जवाब के बाद पीठ की ओर से इस मामले को चर्चा के लिए अस्वीकार कर दिया गया।

दून और हरिद्वार में भूमि देने के बाद नहीं बन पाए ईएसआई अस्पताल

कर्मचारियों और संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए देहरादून और हरिद्वार जिले में ईएसआई अस्पताल का निर्माण किया जाना है। लेकिन, राज्य सरकार की ओर से भूमि आवंटित करने के बाद भी अस्पतालों का निर्माण कार्य नहीं हुआ है। सरकार ने देहरादून के सेलाकुई में अस्पताल के लिए आवंटित जमीन वापस लेकर नागरिक उड्उयन विभाग को दे दी है।

अब अस्पताल के लिए दूसरी जगह पर जमीन तलाशी जा रही है। वहीं, हरिद्वार में अस्पताल के दी गई आधी जमीन सिडकुल को दे दी है। सरकार ने फिर से चयनित जमीन ईएसआई को देने का निर्णय लिया है, जिस पर 300 बेड का अस्पताल बनेगा। 

सदन में कांग्रेस विधायक ममता राकेश के सवाल के जवाब में श्रम मंत्री हरक सिंह रावत ने सदन को अवगत कराया कि कर्मचारी राज्य बीमा योजना के तहत प्रदेश में संगठित क्षेत्र के 644060 कर्मकार पंजीकृत हैं। जबकि निर्माण श्रमिक के रूप में 370838 श्रमिक पंजीकृत हैं। केंद्र के कर्मचारी राज्य बीमा निगम के तहत एक अस्पताल और राज्य योजना में 29 डिस्पेंसरी संचालित हैं। वर्ष 2014 में सेलाकुई में ईएसआई अस्पताल केे 1.154 हेक्टेयर जमीन दी गई थी। लेकिन अस्पताल का निर्माण न होने से जमीन को नागरिक उड्डयन विभाग को दी गई है। जिलाधिकारी के माध्यम से नई जमीन तलाशी जा रही है। 

हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र में ईएसआई को अस्पताल के लिए पांच एकड़ भूमि दी गई थी। जिस पर 2019 तक अस्पताल का काम शुरू नहीं हुआ है। जिससे आधी जमीन सिडकुल को दे दी गई है। अब आवंटित भूमि में ही आगामी तीन सालों में 300 बेड का  अस्पताल बनाने का निर्णय लिया गया।

पीएम स्वनिधि योजना: 12980 आवेदन, 5081 को ऋण

फेरी फड़ का व्यवसाय चलाने के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत प्रदेश में 12980 लोगों ने आवेदन किया, जिसमें से 5827 आवेदन बैंकों ने अस्वीकार कर दिए और 5081 लोगों का ऋण स्वीकृत किया। यह जानकारी मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान सरकार ने दी। कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह पंवार के प्रश्न के उत्तर में सरकार ने कहा स्वनिधि पोर्टल के अनुसार आवेदनों के सापेक्ष बैंकों ने 7153 आवेदनों पर स्वीकृति दी व 5081 आवेदकों को 7.14 करोड़ का ऋण दिया।

कौशल विकास : 19691 के प्रशिक्षण पर खर्चे 24 करोड़
प्रदेश सरकार ने पिछले दो वर्षों में 19691 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया। इस प्रशिक्षण पर सरकार ने 24 करोड़ 9 लाख 45 हजर 358 करोड़ रुपये खर्च किए। यह जानकारी प्रश्नकाल में आतारांकित प्रश्न के उत्तर में सरकार ने दी। सरकार ने बताया कि 2019-20 में 13 जिलों में 15241 युवाओं के प्रशिक्षण पर 17 करोड़ 97 लाख 36, 940 रुपये खर्च किए गए।  2020-21 में 4450 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया। इस पर 6 करोड़ 12 लाख आठ हजार 418 करोड़ खर्च किए। उत्तराखंड वर्क फोर्स डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत इस साल 3455 युवाओं के प्रशिक्षण पर 4 करोड़ 66 लाख 90, 435 रुपये खर्च हुए।  ये कार्यक्रम चमोली, चंपावत, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, पौड़ी, टिहरी और यूएसनगर में संचालित हुआ।

वन्यजीवों पर खतरा, तीन साल में 165 मामले
उत्तराखंड में वन्यजीवों पर अवैध शिकार का खतरा मंडरा रहा है। इसकी तस्दीक विधानसभा में मंगलवार को दी गए आंकड़े कर रहे हैं। पिछले तीन साल में प्रदेश में वन्यजीवों को मारने व उनके अंगों, मांस तथा दुर्लभ खालों को बेचे जाने के 165 मामले सामने आए हैं। इनमें से 49 प्रकरण 
निस्तारित किए गए हैं, जिनमें 9.77 लाख रुपये का अर्थदंड वसूला गया है। शेष मामले अदालत में विचाराधीन हैं।

श्रमिकों पर खर्च दिए 287.34 करोड़

पिछले करीब साढ़े तीन साल में उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड ने श्रमिकों पर 287.34 करोड़ रुपये खर्च दिए।  टिहरी विधायक धनसिंह नेगी के आतारांकित प्रश्न के उत्तर में श्रम मंत्री हरक सिंह रावत ने बताया कि ये धनराशि श्रमिकों के हितों पर खर्च की गई है। नेगी के अन्य प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रत्येक भवन कर्मकार जिसने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है, लेकिन साठ वर्ष की आयु पूरी नहीं की है वह बोर्ड में रजिस्ट्रेशन का पात्र है। लेकिन उसको  पूर्ववर्ती 12 महीने के दौरान कम के कम 90 दिन तक किसी भवन या अन्य सन्निर्माण कार्य में लगा होना चाहिए। 

प्रदेश में आयुष मिशन के तहत चल रहीं 10 योजनाएं 
प्रदेश सरकार ने सदन में जानकारी दी कि राज्य में आयुष मिशन के तहत 10 योजनाएं संचालित हो रही हैं। इनमें स्कूल हेल्थ कार्यक्रम, आशा व एएनएम प्रशिक्षण, पब्लिक हेल्थ आउटरीच कार्यक्रम, स्वच्छता एक्शन प्लान व हर्बल गार्डन, योग एवं वैलनेस केंद्र, 50 बैड का आयुष चिकित्सालयों की स्थापना, पिरान कलियर में यूनानी कालेज स्थापना, आयुष शिक्षण संस्थान निर्माण कार्यों एवं उपकरणों के लिए अनुदान, राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी व राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला का सुदृढ़ीकरण, औषधीय पादप अनुदान।

नगरीय निकायों में हर दिन 1639 मीट्रिक टन कचरा
प्रदेश के नगरीय निकायों में हर दिन 1639.05 मीट्रिक टन अपशिष्ट पैदा हो रहा है। इसमें से 926.86 मीट्रिक टन (56.54 प्रतिशत) का प्रसंस्करण किया जा रहा है। शेष 43.45 प्रतिशत का प्रसंस्करण करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह जानकारी सरकार ने आतारांकित प्रश्न के उत्तर में दी। सरकार ने बताया कि प्रदेश के1190 वार्डों में डोर टू डोर कचरा एकत्रित किया जा रहा है। इनमें से 772 वार्डों में स्रोत पर ही जैविक तथा अजैविक कचरा अलग किया जा रहा है। कचरे को रिसाइकिल कर उसे बेचे जाने की व्यवस्था देहरादून और ऋषिकेश में की गई है। इसका अलावा हरिद्वार और ऋषिकेश में एक एक सेंटर और विकसित किया जा रहा है। 

आयुर्वेदिक फार्मेसिस्ट के 71 पद खाली
प्रदेश में आयुर्वेदिक फार्मेसिस्ट के 71 पद खाली हैं। प्रश्नकाल में सरकार ने यह जानकारी दी कि 2017 में 192, वर्ष 2018 में 34 और 2019 में 36 पदों पर फार्मेसिस्टों की नियुक्तियां की गईं।

आंदोलनकारियों को पुलिस ने रोका, नोकझोंक 

मुजफ्फरनगर, खटीमा, मसूरी गोली कांड के दोषियों को सजा, राज्य में सशक्त लोकायुक्त लागू करने समेत नौ सूत्री मांगों के समर्थन में आंदोलनकारियों ने विधानसभा कूच कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने रिस्पना पुल से पहले बैरिकेडिंग कर आंदोलनकारियों को रोक लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस से नोकझोंक भी हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द मांगों को पूरा नहीं किया गया तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।

बुधवार को राज्य आंदोलनकारी मंच के बैनर तले आंदोलकारी नेहरू कॉलोनी स्थित शहीद रविन्द्र रावत (पोलू) स्मारक पर एकत्र हुए। जहां से सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विधानसभा कूच किय, लेकिन रिस्पना पुल से पहले पुलिस ने बैरिकेडिंग कर आंदोलनकारियों को रोक दिया। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। प्रदर्शनकारी सड़क पर ही बैठकर प्रदर्शन करने लगे। मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, जयदीप सकलानी और सतीस धोलाखंडी ने कहा कि उत्तराखंड निर्माण में आंदोलनकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में सरकार की ओर से आंदोलनकारियों की मांगों को अनदेखा कर उनके बलिदान का अपमान किया जा रहा है। 

प्रदर्शन करने वालों में प्रदीप कुकरेती, विक्रम भंडारी, ओमी उनियाल, धीरेंद्र प्रताप, पूरण सिंह, जबर सिंह, डीएस गुंसाई, मोहन सिंह, लक्ष्मी प्रसाद थपलियाल, लुसुन टोडरिया, नमन चंदोला, प्रभा नैथानी, राधा तिवारी, देवी गोदियाल, सुमन भंडारी, पुष्पलता सिल्माणा आदि मौजूद रहीं।

कैबिनेट मंत्री ने दिया आश्वासन
मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने बताया कि आंदोलनकारियों से वार्ता कर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने मांगों को जायज बताते हुए आश्वासन दिया कि इस संबंध में मुख्य सचिव से वार्ता की जाएगी। इसके लिए अधिकारियों को पत्र लिखने के आदेश दिए। वार्ता के दौरान रविन्द्र जुगरान, वेद प्रकाश शर्मा, बाबी पंवार और सुलोचना भट्ट भी मौजूद रहीं।

सचिवालय कूच कर रहे छात्रों और शिक्षकों पर पुलिस ने भांजी लाठियां

अंब्रेला एक्ट के विरोध में कई दिनों से आंदोलनरत डीएवी कॉलेज के छात्रों और शिक्षकों ने बुधवार को सचिवालय कूच किया। पुलिस ने सचिवालय से कुछ आगे बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। इस दौरान रैली में शामिल कुछ शरारती तत्व बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और महिला पुलिसकर्मियों से अभद्रता कर दी। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर प्रदर्शनकारियों को पीछे खदेड़ दिया।

अंब्रेला एक्ट के विरोध में डीएवी के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी कई दिन से आंदोलन कर रहे हैं। बुधवार को छात्रों के साथ ही शिक्षकों ने सचिवालय कूच किया। इस दौरान सचिवालय के आगे पुलिस ने बैरिकेडिंग कर छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को रोक लिया। इससे छात्र आक्रोशित हो गए और पुलिस के साथ नोकझोंक करते हुए धक्कामुक्की शुरू कर दी। इस दौरान कुछ शरारती तत्व बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और महिला पुलिसकर्मियों से अभद्रता कर दी। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर प्रदर्शनकारियोें को पीछे खदेड़ दिया। लाठीचार्ज में कुछ छात्रों और शिक्षकों को हल्की चोटें आई हैं। 

इसके बाद छात्र और शिक्षक वहीं धरने पर बैठ गए और सभा करने लगे। वक्ताओं ने कहा कि अंब्रेला एक्ट न केवल शिक्षक विरोधी है, बल्कि इससे छात्रों को भी नुकसान उठाना पड़ेगा। कहा कि अशासकीय कॉलेजों का अनुदान खत्म करने से छात्रों को भी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। बाद में प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर छात्र और शिक्षक वापस लौट गए। 

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