उत्तराखंड: अंतिम विस सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, तीन दिन में कुल 15 घंटे 42 मिनट चली सदन की कार्यवाही
शीतकालीन सत्र 9 से 11 दिसंबर तक चला। सत्र के लिए विधायकों से 250 प्रश्न प्राप्त हुए। जिसमें स्वीकार 14 अल्पसूचित प्रश्न में 1 उत्तरित हुआ। जबकि 64 तारांकित प्रश्न में 4 उत्तरित, 143 अतारांकित प्रश्न में 3 उत्तरित किए गए। कुल 24 प्रश्न अस्वीकार और पांच विचाराधीन रखे गए।
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विधानसभा का अंतिम सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है। तीन दिन में कुल 15 घंटे 42 मिनट तक सदन की कार्यवाही चली। इस सत्र में अनुपूरक बजट समेत 10 विधेयक पारित किए गए। इसके अलावा 27वीं प्रश्न काल में सभी प्रश्नों को निर्धारित समय के भीतर उत्तरित किया गया।
शीतकालीन सत्र 9 से 11 दिसंबर तक चला। सत्र के लिए विधायकों से 250 प्रश्न प्राप्त हुए। जिसमें स्वीकार 14 अल्पसूचित प्रश्न में 1 उत्तरित हुआ। जबकि 64 तारांकित प्रश्न में 4 उत्तरित, 143 अतारांकित प्रश्न में 3 उत्तरित किए गए। कुल 24 प्रश्न अस्वीकार और पांच विचाराधीन रखे गए। पांच याचिकाओं में से सभी याचिका स्वीकृत की गई। नियम 300 में प्राप्त 43 सूचनाओं में से 21 सूचनाएं स्वीकृत, 22 सूचनाएं ध्यानाकर्षण के लिए, नियम-53 में 32 सूचनाओं में 2 स्वीकृत एवं 13 ध्यानाकर्षण के लिए रखी गई। नियम-58 में प्राप्त 11 सूचनाओं में 10 को स्वीकृत किया गया। नियम-299 में एक और नियम-112 में एक सूचना प्राप्त हुई। जिसे स्वीकृत दी गई। सत्र के तीसरे दिन अनुपूरक बजट समेत 10 विधेयक पारित किए गए। सत्र के दौरान 27वीं बार ऐसा हुआ कि सदन में प्रश्नकाल में सदस्यों द्वारा पूछे गए सभी तारांकित प्रश्न निश्चित समयावधि उत्तरित हुए हैं।
उत्तराखंड विस सत्र: मंत्री हरक के खिलाफ विशेषाधिकार हनन पर सदन में हंगामा, नजूल नीति पारित
पक्ष व विपक्ष के सभी सदस्यों को सहयोग से सदन बेहतर और शांतिपूर्ण ढंग से चला। सत्र के तीसरे दिन आजादी की 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में अमृत महोत्सव पर चर्चा की गई। जिसमें विधायकों ने बढ़ चढ़ कर भाग लेकर अपने विचार रखे। इसके अलावा प्रदेश व जनहित के अनेक विषयों पर सदन में पक्ष व विपक्ष ने शांतिपूर्वक गंभीर चिंतन व मनन किया।
- प्रेमचंद अग्रवाल, अध्यक्ष विधानसभा
विधानसभा का शीतकालीन सत्र पक्ष और विपक्ष के सहयोग से सदन बेहतर ढंग से संचालित किया गया। सत्र में सरकार ने 10 विधेयक पारित किए। - बंशीधर भगत, संसदीय कार्य मंत्री
प्रमुख सचिव नहीं मानें तो दफ्तर के बाहर दूंगा धरना: भाजपा विधायक कर्णवाल
भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल ने विधानसभा के भीतर विशेषाधिकार हनन के मामले में विपक्ष के हमलों के बीच जाति प्रमाणपत्र के मामले में सवाल उठाकर अपनी ही सरकार को असहज कर दिया। सदन के बाहर उन्होंने चेतावनी दी कि प्रमुख सचिव समाज कल्याण ने एससी, एसटी और ओबीसी के जाति प्रमाणपत्र का शासनादेश जारी नहीं किया तो वह सोमवार को उनके दफ्तर के बाहर धरना देंगे।
प्रमुख सचिव दुश्मनी निकाल रहे
कर्णवाल प्रमुख सचिव समाज कल्याण पर व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब प्रमुख सचिव रुड़की के एसडीएम थे, तब उनका रास्ता रोका था। उस दौरान उनकी और प्रमुख सचिव की कहासुनी हो गई थी। यही कारण है कि वह शासनादेश को नहीं निकाल रहे हैं।
यशपाल आर्य ने डेढ़ साल तक दबाकर रखी फाइल
भाजपा विधायक कर्णवाल ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस में गए समाज कल्याण रहे कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य पर निशाना साधा। उन्होंने आर्य पर आरोप लगाया कि वह उन्होंने जाति प्रमाणपत्र के शासनादेश वाली फाइल डेढ़ साल तक दबाकर रखी।
किरकिरी : सत्तापक्ष के 56 में से सदन में पहुंचे मात्र चार विधायक
राज्य के 21 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब सत्ता पक्ष के सदस्यों के समय पर सदन में नहीं पहुंचने पर सदन स्थगित करना पड़ा। इससे सरकार की खूब किरकिरी हुई। सदन में स्पीकर पहुंच चुके थे। जबकि सत्तापक्ष के 56 विधायकों में से मात्र चार और विपक्ष के नौ सदस्य मौजूद थे। विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए खूब हल्ला किया और कोरम पूरा नहीं होने की बात कहकर सदन से वॉकआउट कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष भी पूरे प्रकरण में नाराज दिखाई दिए।
दरअसल, भोजनावकाश से पहले विशेषाधिकार हनन के मामले में सदन को दो बजे तक स्थगित किया गया था, जिसे बढ़ाकर 2:20 बजे कर दिया गया था। इसके बाद नियत समय पर सदन की कार्यवाही शुरू हुई। स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल भी सदन में पहुंच चुके थे। इस दौरान सत्ता पक्ष से मंत्री सतपाल महाराज, विधायक राजेश शुक्ला, सौरभ बहुगुणा और कुंवर प्रणव चैंपियन ही मौजूद थे। जबकि विपक्षी पार्टी कांग्रेस के सभी नौ सदस्य सदन में मौजूद थे। थोड़ी देर इंतजार करने के बाद जब सत्ता पक्ष के सदस्य सदन में नहीं पहुंचे तो विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए हो-हल्ला शुरू कर दिया।
इसके बाद विपक्ष ने कोरम पूरा नहीं होने की बात कहकर सदन से वॉकआउट कर दिया। पूरे घटनाक्रम से स्पीकर खासे नाराज दिखाई दिए। उन्होंने विधानसभा सचिव (प्रभारी) को बुलाकर नाराजगी जताई। इसके बाद नाराज स्पीकर ने तीन बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। बताया जा रहा है कि सत्ता पक्ष के सभी सदस्य विधानमंडल दल की बैठक में शामिल होने गए थे। यह बैठक पहले से ही निर्धारित थी। जिसमें भाजपा संगठन के पदाधिकारी भी शामिल हुए।
फोटो सेशन के बाद फिर गायब हो गए सत्ता पक्ष के सदस्य
दोपहर तीन बजे सदन की कार्यवाही पुन: प्रारंभ हुई। 15 अगस्त 2022 को भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने जा रहे हैं, इसी बात को ध्यान में रखते हुए आजादी की 75वीं वर्षगांठ से 75 सप्ताह पूर्व आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत सदन में अमृत महोत्सव पर चर्चा शुरू हुई। करीब 50 मिनट तक सदन की कार्यवाही के बीच स्पीकर ने सदस्यों को ग्रुप फोटोग्राफी के लिए सदन से बाहर आमंत्रित किया। इसके बाद 4:10 पर जब सदस्य पुन: सदन में लौटे तो गिनती के ही सदस्य सदन में दिखाई दिए। इस बीच सदस्य सदन में आते-जाते रहे। पुन: 5:05 बजे फिर एक बार ऐसी स्थिति बनी, जब सत्ता पक्ष के मात्र छह-सात सदस्य ही सदन में चर्चा में भाग ले रहे थे। जिस पर विपक्ष ने पुन: आपत्ति जताई और अपनी सीटों से उठकर बाहर जाने लगे। स्पीकर ने स्थिति संभालते हुए सदस्यों से चर्चा में बने रहने का अनुरोध किया। थोड़ी देर बार जब सत्ता पक्ष के सदस्य लौट आए, तब जाकर स्थिति सामान्य हुई। इस बीच चर्चा आरंभ रही।