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Uttarakhand Chunav 2022: चुफाल के गढ़ डीडीहाट में बेहद रोचक होगा रण, चिर-परिचित चेहरे फिर आमने-सामने
Sun, 13 Feb 2022 11:19 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
भक्त दर्शन पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, डीडीहाट
भक्त दर्शन पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, डीडीहाट
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 13 Feb 2022 11:19 AM IST
सार
1969 में गठित डीडीहाट विधानसभा में राज्य गठन से पहले बेड़ीनाग से लेकर मुनस्यारी और धारचूला तक का क्षेत्र शामिल था। तब यहां तीन बार कांग्रेस, एक बार जनता दल, दो बार यूकेडी और एक बार भाजपा रही।
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बिशन सिंह चुफाल
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
विस्तार
पिथौरागढ़ जिले की डीडीहाट विधान सभा सीट सबसे अधिक चर्चाओं में है। लगातार पांच बार चुनाव जीतकर विधान सभा पहुंचने वाले भाजपा के दिग्गज नेता बिशन सिंह चुफाल छठी बार चुनावी रण में उतरे हैं। 2017 में प्रतिद्वंद्वी रहे कांग्रेस के प्रदीप पाल और निर्दलीय किशन सिंह भंडारी इस बार भी उनके सामने हैं। भाजपा प्रत्याशी चुफाल अब तक के कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों के साथ जनता के बीच हैं तो उनके दोनों प्रतिद्वंद्वी 25 वर्षों का हिसाब मांग रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पैतृक गांव हड़खोला भी इसी विधानसभा क्षेत्र में है। इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला सियासी संग्राम को बेहद रोचक बना रहा है।
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1969 में गठित डीडीहाट विधानसभा में राज्य गठन से पहले बेड़ीनाग से लेकर मुनस्यारी और धारचूला तक का क्षेत्र शामिल था। तब यहां तीन बार कांग्रेस, एक बार जनता दल, दो बार यूकेडी और एक बार भाजपा रही। राज्य गठन के बाद इस विधान सभा सीट का परिसीमन हुआ और बड़ा हिस्सा धारचूला, कनालीछीना और कुछ क्षेत्र गंगोलीहाट में शामिल हो गया। 2012 में हुए परिसीमन में कनालीछीना विस क्षेत्र फिर से डीडीहाट विधान सभा में ही विलीन हो गया।
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वर्तमान में डीडीहाट, कनालीछीना और मूनाकोट विकासखंडों से मिलकर बनी डीडीहाट विधान सभा सीट पिथौरागढ़, गंगोलीहाट और धारचूला तीनों विधान सभा क्षेत्रों तक फैली हुई है। विधान सभा सीट का पीपली से झूलाघाट तक का क्षेत्र नेपाल सीमा से लगा हुआ है। इस सीट पर 1996 (लगातार 25 वर्षों) से भाजपा के बिशन सिंह चुफाल काबिज हैं। ऐसे में डीडीहाट को भाजपा के गढ़ के रूप में देखा जाता है।
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2017 में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ताल ठोंकने वाले किशन सिंह भंडारी फिर से चुनाव मैदान में हैं। पिछले चुनावों में निर्दलीय किशन सिंह ने बिशन सिंह चुफाल को कड़ी टक्कर दी थी, जबकि कांग्रेस के प्रदीप पाल तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार भी तीनों चिर परिचित प्रतिद्वंद्वी मैदान में हैं।
बिशन सिंह चुफाल डीडीहाट, निर्दलीय किशन सिंह भंडारी कनालीछीना तो कांग्रेस के प्रदीप पाल अस्कोट क्षेत्र के रहने वाले हैं। हालांकि इस सीट पर कभी क्षेत्रवाद हावी नहीं रहा। वर्तमान में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पैतृक गांव हड़खोला भी इसी विधान सभा क्षेत्र में आता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद ही उनका पैतृक गांव सड़क से जुड़ा है। पांच बार से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे चुफाल और प्रदेश के सीएम पुष्कर सिंह धामी के पैतृक गांव में आने वाली इस विधान सभा सीट पर नतीजा क्या निकलेगा, इस पर सभी की नजरें टिकीं हुईं हैं।
डीडीहाट संक्षिप्त इतिहास
वर्ष 1969 और 1974 में कांग्रेस के गोपाल दत्त ओझा विधायक चुने गए। 1977 में जनता दल के नारायण भैंसोड़ा विधायक बने। 1980 में कांग्रेस के चारुचंद्र ओझा जीते। 1985 और 1989 में लगातार दो बार उक्रांद के काशी सिंह ऐरी विधायक चुने गए। 1991 में कांग्रेस के लीलाराम शर्मा जीते। 1993 में उक्रांद के काशी सिंह ऐरी ने चुनाव जीता। 1996 और उत्तराखंड राज्य गठन के बाद 2002, 2007, 2012, 2017 में भाजपा के बिशन सिंह चुफाल विधायक चुने गए।
दावे अपने-अपने
अब तक के कार्यकाल में विधान सभा क्षेत्र के गांवों को सड़कों से जोड़ने का कार्य किया। पंपिंग पेयजल योजनाएं बनाईं गईं। विद्यालयों का उच्चीकरण करने के साथ ही शिक्षण संस्थानों के भवन बनाए गए। विधायक निधि से 130 से अधिक सड़कों का निर्माण किया है। भाजपा सरकार में सबसे अधिक विकास कार्य हुए हैं। केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार ने जनहित में तमाम योजनाएं संचालित कीं हैं।
- बिशन सिंह चुफाल, भाजपा
डीडीहाट विधान सभा क्षेत्र में कोई विकास कार्य नहीं हुए हैं। आज भी जनता तमाम सुविधाओं से वंचित है। स्वास्थ्य के नाम पर खोले गए अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। अल्ट्रासाउंड तक की सुविधा क्षेत्र के लोगों को नहीं मिल पा रही है। जनता 25 वर्षों का हिसाब मांग रही है। इन चुनावों में जनता का समर्थन मुझे मिल रहा है।
- किशन भंडारी, निर्दलीय
विकास के नाम पर डीडीहाट क्षेत्र की जनता को अभी तक ठगा गया है। कई गांव आज भी सड़क से वंचित हैं। लोग पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। संचार सुविधाओं का लाभ आज तक कई क्षेत्रवासियों को नहीं मिल सका है। इस बार जनता ने कांग्रेस का साथ देने का मन बना लिया है।
- प्रदीप पाल, कांग्रेस
स्थानीय मुद्दे
हर बार के चुनावों की तरह इस बार भी डीडीहाट जिला गठन के अलावा पेयजल, स्वास्थ्य, सड़क और संचार जैसे मुद्दे उठ रहे हैं।