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उत्तराखंड सरकार पर दबाव बनाने का कोई मौका नहीं चूकी कांग्रेस, पंत बने संकट मोचक
Sat, 23 Feb 2019 03:09 PM IST
अलका त्यागी
अरुणेश पठानिया, अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Sat, 23 Feb 2019 03:09 PM IST
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Trivendra Singh Rawat
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कमजोर संख्या बल के बावजूद कांग्रेस बजट सत्र में प्रचंड बहुमत वाली भाजपा सरकार पर दबाव बनाने का कोई मौका नहीं चूकी।
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पहले दिन से विपक्ष हमलावर होने की राह पर आगे बढ़ा और आखिरी दिन तक उसने अपना यह रुख बरकरार रखा। एकजुट होकर सरकार को घेरने की रणनीति का ही असर था कि जहरीली शराब से हुई मौतों पर सत्ता पक्ष असहज दिखा। गन्ना बकाया भुगतान, जंगली जानवरों का आतंक और आखिरी दिन स्टिंग प्रकरण से भी सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर विपक्ष ने काम किया। उधर, सत्ता पक्ष के लिए संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ही शुक्रवार को एक बार फिर संकट मोचक की भूमिका में दिखे। विपक्ष को पंत ने कई बार तथ्यों की कसौटी पर बैकफुट पर ला खड़ा किया।
11 फरवरी से शुरू हुए बजट सत्र निबटने के बाद कांग्रेस आश्वस्त हो सकती है कि कम संख्या बल के बावजूद उसने दबाव बनाने में सफलता पाई। जहरीली शराब से मौतों के मामले में विपक्ष के दबाव का ही नतीजा रहा कि प्रकरण पर प्रश्नकाल स्थगित कर स्पीकर ने सदन में नियम-310 के तहत ग्राह्यता पर चर्चा करवाने की की अनुमति दी। बाद में प्रकरण की अलग से पड़ताल के लिए विधानसभा सदस्यों की समिति बनाने के निर्देश दिए। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर दो दिन तक हंगामा करने के साथ ही वॉक आउट तक किया। दो साल में पहली बार विपक्ष सदन के भीतर इस कदर एकजुट दिखा।
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इसके बाद विपक्ष गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा सदन में लेकर आया। इस मुद्दे पर विपक्ष तथ्यों के आधार पर कमजोर दिखा। यूं तो सत्ता पक्ष के पास विपक्ष के उठाए हर सवाल का जवाब था। लेकिन, हंगामा बरपा कर विपक्ष सुर्खियां जरूर बटोर ले गया। हालांकि जंगली जानवर और आवारा पशुओं के आतंक को मुद्दा बनाने की विपक्ष की रणनीति पूरी तरह कामयाब नहीं हुई। इस बीच, जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए हमले का असर सदन की कार्यवाही पर पड़ा। सरकार ने बजट टाल दिया तो विपक्ष भी उनके साथ खड़ा दिखा।
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बीते सोमवार को सरकार बजट लेकर आई तो विपक्ष नदारद रहा। विपक्ष की दलील थी कि शोकाकुल माहौल में बजट पेश करना उचित नहीं है। आखिरी दिन विपक्ष ने सीधे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। स्टिंग प्रकरण को मुद्दा बनाने में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। आखिर में स्पीकर को मुद्दे पर चर्चा करवाने के लिए मनाने की उसकी रणनीति कामयाब रही। सदन में चर्चा होने से सरकार को भी मौका मिल गया। संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत मुद्दे को तथ्य विहीन साबित करने में काफी हद तक कामयाब दिखे। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष को मामले से जुड़े कुछ तथ्यों की रिकार्डिंग सौंप कर विपक्ष ने साफ संकेत दिया कि लोकसभा चुनाव में वह इस मुद्दे को गरमाने के लिए तैयार है।
प्रीतम-माहरा की नई जुगलबंदी ने चौंकाया
सदन में कांग्रेस के प्रीतम सिंह और करन माहरा की नई जुगलबंदी ने सबको चौंकाया। पिछले सत्रों में कांग्रेस संगठन की गुटबाजी का असर सदन के भीतर साफ दिखाई देता था। हरीश रावत के करीबी करन माहरा अपने हिसाब से मुद्दों को उठाते रहे थे। इसी तरह कांग्रेस संगठन में एक साथ खडे़ नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृदयेश और प्रीतम सिंह की जुगलबंदी दिखाई देती थी। मगर इस बार के बजट सत्र में प्रीतम और करन माहरा एक दूसरे के सहारे से मुद्दों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाते हुए नजर आए।