फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand ajay initiative for ban on child beggar

बच्चे भीख न मांगें, इसलिए छोड़ा जूते-चप्पल पहनना, पढ़िए उत्तराखंड के अजय की अनूठी कहानी

Sun, 22 Apr 2018 08:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 22 Apr 2018 08:46 AM IST
विज्ञापन
uttarakhand ajay initiative for ban on child beggar
ajay - फोटो : amar ujala
40 पार तापमान में जब सड़कें तवे की तरह जल रही होती हैं तब उत्तराखंड के अजय नंगे पैर इन पर चलकर यहां-वहां भीख मांग रहे बच्चों को खोज रहे होते हैं।
विज्ञापन


ताकि भीख मांगने की प्रवृत्ति छुड़वाकर इन्हें पढ़ाई से जोड़ा जा सके। सितंबर 2015 से चल रहा अजय का अभियान ‘संकल्प’ 35 शहरों में 50 हजार किमी. से अधिक की यात्रा तय कर शुक्रवार को लखनऊ पहुंचा।

अलग-अलग शहरों के कई बच्चों को अब तक भीख मांगने या बालश्रम से निजात दिला चुके अजय का कहना है कि उनकी पीड़ा समझने के लिए ही 2015 से जूते-चप्पल पहनना छोड़ दिया है।
विज्ञापन

मासूमों की तकलीफ समझने के लिए उनके जैसी परिस्थितियां अख्तियार कर लीं

uttarakhand ajay initiative for ban on child beggar
जूते-चप्पल से दूरी बनाए रखी
शुक्रवार को तपती दोपहर में ‘अमर उजाला’ कार्यालय पहुंचे अजय ने बताया कि एक बार बच्चे को चिलचिलाती धूप में नंगे पांव भीख मांगते देखा, तब से इन मासूमों की तकलीफ समझने के लिए उनके जैसी परिस्थितियां अख्तियार कर लीं।

लखनऊ से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर चुके पिथौरागढ़ जिले के धनौड़ा गांव के 25 वर्षीय अजय उत्तर प्रदेश, राजस्थान व उत्तराखंड में सात हजार किमी पैदल और 50 हजार किमी स्कूटी से सफर कर चुके हैं।

शुरुआती समय में पैदल यात्रा में काफी समय लगने के बाद अजय ने बाद में वाहनों का सहारा लिया, लेकिन जूते-चप्पल से दूरी बनाए रखी।
 

2025 तक वे पूरे देश के हर शहर को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य

uttarakhand ajay initiative for ban on child beggar
demo pic
अभियान के तहत राजधानी पहुंचे अजय ने बताया कि वह युवाओं के बीच और स्कूल में जाकर लोगों को भिक्षावृत्ति और बाल श्रम के विरोध में जागरूक करते हैं और इनके खिलाफ आवाज उठाने की शपथ भी दिलाते हैं।

अजय के पिता और दादा दोनों की आर्मी से रिटायर्ड हैं। बताया कि नंगे पांव रहने से अभावग्रस्त लोगों की पीड़ा का अहसास बना रहता है। साथ ही इनके लिए कुछ करने की प्रेरणा मिलती है।

हर दिन 10 से 14 घंटे चलकर अजय 100 से 120 किमी. की यात्रा तक तय करते हैं। यात्रा का हर दिन का खर्च 300 रुपये तक लगभग आता है। 35वें शहर पहुंचे अजय ने बताया कि उनका लक्ष्य है कि 2025 तक वे पूरे देश के हर शहर को अभियान से जोड़ सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed