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उत्तराखंड: रोडवेज में एसीपी घोटाला, अफसरों-कर्मचारियों से होगी 90 करोड़ की रिकवरी

Thu, 12 Nov 2020 02:05 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 12 Nov 2020 02:05 AM IST
सार

  • एक हजार से अधिक अधिकारियों, कर्मचारियों का वेतनमान होगा संशोधित
  • घाटे में चल रह परिवहन निगम का हर महीने करीब ढाई करोड़ कम होगा वेतन पर खर्च
  • नियम विरुद्ध दिया गया एसीपी का लाभ, ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर वित्त नियंत्रक ने जारी किए आदेश

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Uttarakhand: ACP scam caught in Roadways, 90 crore Rupees recovery from officers and employees
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

घाटे से जूझ रहे उत्तराखंड परिवहन निगम में बड़े पैमाने पर एसीपी घोटाला पकड़ में आया है। शासन के आदेश पर गठित विशेष ऑडिट टीम ने यह गड़बड़ी पकड़ी है। इसके बाद अब एक हजार से अधिक कर्मचारियों व अधिकारियों से 90 करोड़ रुपये की रिकवरी करने के साथ ही उनका वेतनमान भी संशोधित किया जाएगा, जिससे उनकी तन्ख्वाह कम हो जाएगी। 

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रोडवेज में करीब पांच साल से एश्योर्ड कॅरियर प्रमोशन यानी एसीपी में गड़बड़ी का मामला चल रहा है। लगातार शिकायतें आने के बाद शासन ने इसकी जांच के लिए विशेष ऑडिट टीम गठित की थी। ऑडिट टीम ने परिवहन मुख्यालय को 16 बिंदुओं पर जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।
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इस रिपोर्ट के आधार पर वित्त नियंत्रक विक्रम सिंह जंतवाल ने बिंदुवार कार्रवाई के आदेश सभी मंडलों को जारी कर दिए हैं। यह कार्रवाई 30 दिसंबर तक करने के बाद 31 दिसंबर तक इसकी पूरी रिपोर्ट परिवहन मुख्यालय को भेजनी होगी।

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एक हजार से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी रिकवरी की जद में

ऑडिट में सामने आई आपत्तियों के बाद परिवहन निगम के एक हजार से अधिक अधिकारी व कर्मचारी रिकवरी की जद में आ गए हैं। इनमें रोडवेज के डीजीएम से लेकर कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी, अधिकारी, समूह-घ कर्मचारी, वर्कशॉप में काम करने वाले फीटर, मैकेनिक, फोरमैन, सीनियर फोरमैन आदि शामिल हैं। इन सभी को जो भी वेतन भुगतान नियम विरुद्ध किया गया है, उसकी रिकवरी की जाएगी।

हर महीने 2.5 करोड़ कम वेतन-भत्ते देने होंगे
ऑडिट रिपोर्ट के बाद जो आदेश जारी किए गए हैं, उसके तहत एक ओर जहां रिकवरी होने से रोडवेज को राहत मिलेगी तो दूसरी ओर हर महीने के वेतन खर्च में भी कमी आ जाएगी। अनुमानित तौर पर रिकवरी की राशि करीब 90 करोड़ रुपये होगी। रोडवेज हर महीने वेतन पर करीब 20.5 करोड़ खर्च करता है। वेतन संशोधन के बाद यह राशि भी करीब ढाई करोड़ घटकर 18 करोड़ पर आ जाएगी। लिहाजा, घाटे में चल रहे परिवहन निगम को राहत मिलेगी।

दो से 15 हजार रुपये महीना अतिरिक्त वेतन
ऑडिट में यह तथ्य सामने आया है कि तमाम कर्मचारी और अधिकारी हर महीने नियम विरुद्ध दो हजार से 15 हजार रुपये अतिरिक्त वेतन ले रहे हैं। इससे निगम को अच्छा खासा नुकसान हर महीने उठाना पड़ रहा है।

रिकवरी करने वालों से भी होगी रिकवरी
परिवहन निगम में एसीपी घोटाले का यह मामला यूं तो करीब छह साल से चल रहा है लेकिन हर बार अधिकारियों की मिलीभगत के चलते मामला फाइलों में गुम हो जाता है। इस बार शासन के आदेश पर जब ऑडिट हुआ तो पूरी पोल खुलकर सामने आ गई। शासनादेशों की धज्जियां उड़ाते हुए जिन अधिकारियों काे लाभ पहुंचाया गया है, उसमें रिकवरी की जिम्मेदारी संभालने वाले भी शामिल हैं। अब इन सबसे भी रिकवरी की जाएगी।

ऑडिट टीम ने यह जताई आपत्तियां

- पांचवें वेतनमान के वेतन निर्धारण के संबंधित शासनादेश में उपलब्ध गणना से अधिक वेतन निर्धारित किया गया।
- प्रोन्नति और एसीपी की अनुमन्यता के बाद वेतन का निर्धारण बिना लिखित विकल्प कर दिया गया। बिना लिखित विकल्प के प्रोन्नति या एसीपी के दिनांक से वेतन का निर्धारण किया जाना चाहिए था।
- कर्मचारियों का श्रेणी घ से श्रेणी ग में संविलियन करने के बाद एसीपी का लाभ नियम विरुद्ध दिया गया।
- एसीपी की गणना में अनुपस्थित और बिना वेतन अवकाश को एसीपी की अवधि से कम नहीं किया गया है।
- जिन कार्मिकों को दंड के अंतर्गत मूल वेतन पर उतारा गया है या वेतनमान के निचले वेतन पर उतारा गया है, उनका एसीपी की गणना के लिए उक्त दंड तिथि से ही अर्हकारी अवधि की गणना की जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
- जिन कर्मचारियों की वेतन बढ़ोतरी रोकी गई है, उन्हें भी नियत अवधि में एसीपी का लाभ दिया गया है। 
- परिवहन निगम में कई कर्मचारियों को आठ से दस बार वेतनवृद्धि रोकने के आदेश जारी किए गए। शासनादेश के अनुसार, एक दंड पूरा होने के बाद संबंधित रुकी हुई वेतन वृद्धि अनुमन्य करने के उपरांत दूसरा दंड प्रभावी किया जाना है। 
- दंडाधिकारी द्वारा दंड देते समय पूरे दंड का उल्लेख नहीं किया गया। 
- परिवहन निगम के ग्रेड 2 के कुछ पदों पर नियम विरुद्ध एसीपी का लाभ दिया गया।
- ऑडिट के दौरान पाया गया कि अधिकारियों ने जिन कर्मचारियों की वेतन वृद्धि रोकने या मूल वेतन पर करने एवं वेतनमान के निचले स्तर पर किया गया है, उनकी वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि में कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। 
- जिन कर्मचारियों की सत्यनिष्ठा संदिग्ध थी, उन्हें भी नियम विरुद्ध लाभ दिया गया।
- ऑडिट में पाया गया कि कर्मचारी द्वारा पहले प्रोन्नति न लेने और बाद में सहमत होने के बाद भी उस अवधि का संज्ञान लिए बिना एसीपी का लाभ दे दिया गया।
- जांच में पाया गया है कि जिन कर्मचारियों को वेतनवृद्धि रोकने का दंड दिया गया है, उन्हें नियम विरुद्ध स्वैच्छिक परिवार कल्याण भत्ता दे दिया गया।
- वेतनमान में वेतन निर्धारण 31 दिसंबर 2005 के मूल वेतन से एक वेतन वृद्धि अधिक देकर एक जनवरी 2006 को निर्धारित किया गया जो कि गलत है।
- ऑडिट में पाया गया कि जिन कर्मचारियों की दो प्रोन्नति 16 वर्ष से पहले हो चुकी हैं, उनकी दूसरी एसीपी मानी जाएगी। लेकिन परिवहन निगम में ऐसे कर्मचारियों को भी समान वेतनमान की प्रोन्नति को दरकिनार करते हुए दूसरी या तीसरी एसीपी देते समय अगला प्रोन्नत वेतनमान या प्रोन्नति पद न होने पर अगला वेतनमान दे दिया गया।

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