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नाक की लड़ाई में परिवहन अधिकारी ने कुर्सी गवांई
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 16 Sep 2014 12:09 PM IST
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मामला रोडवेज बसों का। वर्षों से चल रहा विवाद उत्तराखंड परिवहन निगम और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम का। लेकिन झगड़े के बीच टांग परिवहन विभाग की।
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सिर्फ टांग ही नहीं, परिवहन अधिकारियों ने मसले को अपनी नाक का सवाल बना डाला। बातचीत करने पहुंचे यूपी के अधिकारियों को अपमानित कर लौटा दिया गया। इसके बाद यूपी बिफरा, करोड़ों का नुकसान हुआ तो अफसरों के होश उड़ गए।
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सीएम के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलटा। वजहों की पूछताछ हुई और आखिर संभागीय परिवहन अधिकारी को कुर्सी गवांनी पड़ी।
ऐसे हुई शुरुआत
सूत्रों के अनुसार उत्तराखंड परिवहन निगम ने परिवहन आयुक्त से शिकायत की थी कि यूपी की बसें बिना परमिट राज्य में आ रही हैं। आयुक्त ने पत्र आरटीओ देहरादून को फारवर्ड कर दिया।
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बताया जा रहा है कि परिवहन निगम पहले भी ऐसी चिट्ठियां आयुक्त को भेजता रहा है, जिसे अग्रेषित कर दिया जाता है। लेकिन इस दफा आरटीओ डीसी पठोई पत्र मिलते ही जोश से भर गए। प्रवर्तन टीमों को तत्काल सड़कों पर उतार दिया गया और मंगलवार रात को यूपी की 17 बसें सीज कर दी गईं।
यहां हुई गलती
सूत्र बताते हैं कि यूपी की बसें सीज करने के बाद भी विवाद बढ़ा नहीं था। बुधवार को यूपी ने विरोधस्वरूप मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर और बरेली में उत्तराखंड की बसों के सिर्फ चालान किए। इसी दिन यूपी रोडवेज के तीन क्षेत्रीय प्रबंधक दून पहुंचे और आरटीओ से मुलाकात की कोशिश की।
इस दिन क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण की बैठक चल रही थी। सूत्रों के अनुसार यूपी के अधिकारी बैठक स्थल पर ही पहुंच गए, लेकिन परिवहन अधिकारियों ने उन्हें तीन घंटे तक बाहर खड़ा रखा। बैठक के बाद परिवहन अधिकारियों ने उनसे मिलने से साफ इनकार कर दिया।
यूपी के तीनों अफसर उसी रोज लखनऊ लौटे और फजीहत की दास्तां बयां की। इसके बाद तो यूपी परिवहन निगम और यूपी परिवहन विभाग की त्योरियां चढ़ गईं। दोनों ने मिलकर एक के बाद एक उत्तराखंड की 92 बसें सीज कर डालीं।
क्या सब पर कार्रवाई करते हो?
परिवहन आयुक्त एस. रामास्वामी को जानकारी मिली तो उन्होंने आरटीओ से पूछताछ की। आरटीओ ने कहा कि उनके आदेश पर ही कार्रवाई की थी। इस पर आयुक्त फट पड़े।
आरटीओ से पूछा, हर रोज ऐसी सैकड़ों चिट्ठियां आरटीओ को फारवर्ड की जाती हैं। आरटीओ क्या सब पर कार्रवाई करता है? इसके बाद गुरुवार को उत्तराखंड ने आनन फानन में उत्तर प्रदेश की सभी बसों को रिलीज कर दिया।
..और अड़ गया यूपी
लेकिन अपनी बसें रिलीज होने के बाद उत्तर प्रदेश अड़ गया। यूपी ने उत्तराखंड की 92 बसों को छोड़ने से इंकार कर दिया। इससे अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। तीन दिन तक उत्तराखंड की बसें उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में खड़ी रहीं। परिवहन निगम को करोड़ों का राजस्व का नुकसान हुआ।
अधिकारियों से बात नहीं बनी तो मामला मुख्यमंत्री दरबार पहुंचा। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यूपी के सीएम अखिलेश यादव से बात की, जिसके बाद रविवार रात तक उत्तराखंड की बसें छोड़ी गईं। मामला सुलझने के बाद आरटीओ पठोई को हटा दिया गया।
अब होगी एग्रीमेंट की कोशिश
14 साल में उत्तराखंड और यूपी के अधिकारी बसों के संचालन पर एग्रीमेंट नहीं कर सके हैं। इसके कारण बसों के फेरों की संख्या पर लगातार कई साल से विवाद होता रहा है। अब मुख्यमंत्री हरीश रावत के आदेश पर दोनों राज्यों के अधिकारी एक बार फिर से एग्रीमेंट करने की कोशिश करेंगे।