संयुक्त राष्ट्र खंगालेगा उत्तराखंड आपदा का हकीकत
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उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन तंत्र के हाल का जायजा अब संयुक्त राष्ट्र की आपदा प्रबंधन टीम भी लेगी।
इसके लिए संयुक्त राष्ट्र की भारतीय टीम के अधिकारी उत्तराखंड में डेरा डाले हुए हैं। जल्द ही टीम सरकारी विभागों से आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने पर बातचीत करेगी।
टीम के सदस्यों का मानना है कि उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने और आपदाओं से निपटने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
आपदा प्रबंधन की योजना पर न के बराबर काम
अंदरखाने यह भी स्वीकार किया जा रहा है कि आपदा प्रबंधन की योजना पर न के बराबर काम हो रहा है। यूएन टीम वैसे सरकारी अधिकारियों के साथ इस बैठक को गैप फिलिंग का नाम दे रही है।
मतलब यह कि जो कमी सामने आएगी उसे दूर किया जाएगा। यूएन टीम के अधिकारियों के मुताबिक करीब 15 विभागों के अधिकारी इस बैठक में शामिल होंगे। 25 से लेकर 27 मई के बीच में यह बैठक होगी।
यूएन की टीम की निगाह गैर सरकारी संस्थाओं के सहयोग पर भी है। मई के अंतिम सप्ताह में गैर सरकारी संगठनों के साथ भी इस टीम की बैठक होगी।
गैर सरकारी संगठनों का सहयोग वैसे सरकार भी लेती रही है पर यह आपदा के प्रभाव को कम करने के कम और राहत और बचाव में अधिक रहा है।
यह है आपदा प्रबंधन की हकीकत
- आपदा प्रबंधन का जिम्मा वैसे तो जिलों में जिला आपदा प्रबंधन अधिकारियों पर है पर इन अधिकारियों को विशेष अधिकार देकर मजबूत नहीं किया गया।
हाल यह रहा कि अधिकतर जिलों के आपदा प्रबंधन अधिकारी अपने आपको जिला प्रशासन के संपर्क से दूर ही महसूस करते हैं।
- आपदा प्रबंधन तंत्र का प्रदेश में तकनीकि पक्ष बहुत ही कमजोर है। अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित नहीं हो पाया है।
ग्लेश्यिरों के सिकुड़ने से बन रही झीलों की निगरानी का तंत्र विकसित नहीं हो पाया है। आपदा प्रबंधन के तहत राहत और बचाव के लिए बेहतर तकनीक के इस्तेमाल में बहुत पीछे।
- आपदा प्रबंधन को लेकर सरकार के स्तर पर खास तवज्जो नहीं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक नियमित रूप से नहीं हो पा रही है।
- आपदा प्रबंधन को लेकर विभागों में आपस में तालमेल नही है।
हालांकि कहा गया था कि विभाग विकास योजनाओं में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को भी शामिल करें और यह भी देखें कि आपदा से होने वाले नुकसान को कैसे कम किया जा सकता है। यह नही हो रहा है।
क्या किया
- स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स का गठन किया। राहत और बचाव में इस फोर्स की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
- सूचना नेटवर्क विकसित करने की है कोशिश। फिलहाल सेटेलाइट फोन पर अधिक भरोसा।