अधीनस्थ सेवा चयन आयोग: उत्तराखंड में वन आरक्षी बनने के लिए दौड़े 1332 उम्मीदवार, एक की हुई मौत
बता दें कि वन आरक्षी भर्ती की लिखित परीक्षा में 2326 उम्मीदवारों के लिए दो शहरों देहरादून और हल्द्वानी में शारीरिक दक्षता परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है।
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उत्तराखंड में वन आरक्षी के पदों पर भर्ती का पहला चरण पूरा हो गया है। इसमें 1332 उम्मीदवारों ने दौड़ लगाई है। पहली बार अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने डिजिटल मशीनों का इस्तेमाल किया है। अब दूसरा चरण हल्द्वानी में तीन व चार अगस्त को होगा।
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सचिव संतोष बडोनी ने बताया कि वन आरक्षी भर्ती की लिखित परीक्षा में 2326 उम्मीदवारों के लिए दो शहरों देहरादून और हल्द्वानी में शारीरिक दक्षता परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। देहरादून में पहला चरण 27, 28 व 29 जुलाई को पूरा होगा।
इसमें कुल 1539 उम्मीदवार पंजीकृत थे, जिनमें से 1332 उम्मीदवारों ने शारीरिक दक्षता परीक्षा में हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि सीना व ऊंचाई के लिए डिजिटल मशीनों का इस्तेमाल किया गया। दौड़ मापन के लिए भी डिजिटल मैट व डिजिटल मशीन का उपयोग किया गया। पूरा परीक्षण सीसीटीवी की निगरानी में हुआ।
शारीरिक दक्षता का दूसरा चरण हल्द्वानी में तीन व चार अगस्त को हुआ। हल्द्वानी में 787 उम्मीदवार पंजीकृत हैं। पहले दो व तीन अगस्त को हल्द्वानी में यह परीक्षा होनी थी लेकिन अब डिजिटल मशीनों को वहां तक पहुंचाने में लगे समय की वजह से दो अगस्त की परीक्षा चार अगस्त को की जाएगी। तीन अगस्त वाली यथावत रहेगी।
एक उम्मीदवार की हुई मौत
शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान एक हादसा भी हुआ। शारीरिक परीक्षण पूर्ण करने के बाद अचानक उम्मीदवार सूरज प्रकाश पुत्र मसंतु लाल, निवासी गोपेश्वर, चमोली का स्वास्थ्य खराब हो गया। उन्हें एंबुलेंस से तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
पूर्व सैनिक उम्मेद सिंह व उमा रानी सबसे तेज दौड़े
शारीरिक दक्षता परीक्षा में आए पुरुष उम्मीदवार पूर्व सैनिक उम्मेद सिंह राणा सबसे तेज दौड़े। ग्राम चंदी, जखेली रुद्रप्रयाग निवासी 39 वर्षीय उम्मेद ने 25 किलोमीटर की दौड़ महज दो घंटा 13 मिनट में पूरी कर ली। इसके लिए चार घंटे का समय दिया गया था। वहीं, महिला श्रेणी में रुड़की निवासी उमा रानी सबसे तेज दौड़ी। उन्होंने 14 किलोमीटर की दौड़ महज दो घंटा तीन मिनट में पूरी कर ली। जबकि यहां भी चार घंटे का समय निर्धारित था। 98 प्रतिशत पुरुष और शत-प्रतिशत महिलाओं ने अपनी दौड़ पूरी की।