पर्यटकों के सामने खुली उत्तराखंड सरकार की पोल

रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 20 Jan 2014 09:44 AM IST
tourist did not reach mussoorie to enjoy snowfall
आपदा के बाद सुनसान पड़ी पहाड़ों की रानी मसूरी को गुलजार करने के लिए शासन से लेकर जिला प्रशासन तक ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया। लेकिन ऐन मौके पर पूरी व्यवस्था ढह गई।

पर्यटकों का हुजूम टूट पड़ा
बर्फ से लकदक मसूरी की वादियों के दीदार के लिए पर्यटकों का हुजूम टूट पड़ा, लेकिन वे खूबसूरत यादों के बजाए मायूसी लेकर लोटे। इससे यह बात साबित हुई कि शासन ‘सेफ उत्तराखंड’ का नारा लगाकर पर्यटकों को बुला तो रहा था, लेकिन तैयारी और व्यवस्थाएं अधूरी थीं।

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पर्यटकों को मसूरी बुलाने के लिए विंटर लाइन कार्निवाल आयोजित किया गया। साथ ही बर्ड वॉचिंग सरीखे एक दर्जन प्रोजेक्ट पाइप लाइन में हैं। पर्यटक स्थलों की खूबसूरती में चार चांद लगाए जा रहे हैं।

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जिलाधिकारी ने शनिवार को विभागों की बैठक में सभी प्रोजेक्ट एक हफ्ते में पूरा करने का आदेश दिया था। उसी दिन रात को बर्फबारी की खबर सुनकर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व अन्य प्रदेशों से पर्यटक यहां पहुंचने लगे थे।

रास्ता ब्लॉक होने की वजह से लौटाना पड़ा

बहुत दिनों से पर्यटकों की अगवानी करने को बेकरार पर्वतीय डिपो ने पहाड़ों पर बर्फबारी से उत्साहित होकर 20 बसों का बेड़ा भी तैयार कर लिया था। इन बसों को मसूरी के लिए 80 ट्रिप लगानी थी। लेकिन रास्ता ब्लॉक होने की वजह से इन्हें लौटाना पड़ा।

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पंजाब से आए सरदार वीरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी जतिंदर कौर ने बताया। उन्हें वापस लौटने में बहुत तकलीफ हो रही है। पर्वतीय डिपो से वापस लौट रहे दिल्ली के थोक दवा व्यवसायी एसएस सिंह और उनकी पत्नी विभा ने बताया कि दो दिन मसूरी में रुकने की योजना बनाकर आए थे।

अपने वाहनों से आए काफी सैलानी कोठाल गेट के आगे जा ही नहीं पाए। सुबह से रात तक फंसे रहे।

पर्वतीय डिपो पर हंगामा
मसूरी नहीं जा पाए पर्यटकों ने पर्वतीय डिपो पर हंगामा कर दिया। बड़ी संख्या में लोग डिपो पर इकट्ठे थे, लेकिन बसों का संचालन रोक दिया गया था। अधिकारियों का कहना था कि आठ बसें गई थीं जो कोठाल गेट के आगे नहीं जा पाईं।

अधिकारियों का कहना था कि पहली बार परिवहन निगम की बसों को भी रोक दिया गया। बसें शाम तक जाम में फंसी थीं, छह बसों की लोकेशन नहीं मिल रही थी। आक्रोशित लोग डिपो पर रविवार शाम बहुत देर तक हंगामा करते रहे।

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रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के उपाध्यक्ष दिनेश गुसाईं और गढ़वाल मंडल क्षेत्र के अध्यक्ष प्रेम सिंह रावत ने बताया कि 20 बसों को मसूरी की कम से कम 60 ट्रिप लगानी थी।

बसें मसूरी नहीं जा पाईं तो उन्हें ऋषिकेश और सहारनपुर की तरह डायवर्ट कर दिया गया। इसके अलावा देहरादून से वाया मसूरी उत्तरकाशी, चंबा, टिहरी, चकराता, चकराता हनौल और मनेरी जाने वाली बसों को रोक दिया गया।

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