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Uttarakhand: प्रदेश के जंगलों में बाघ व तेंदुआ सुरक्षित नहीं, तीन साल में 345 की मौत, जहर देकर पहले भी मारे गए
Fri, 22 May 2026 07:08 AM IST
Renu Saklani
बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: Renu Saklani
Updated Fri, 22 May 2026 07:08 AM IST
सार
राज्य में पिछले तीन साल में 45 बाघों की मौत हुई है। इनमें अवैध शिकार से तीन, अज्ञात वजह से नौ, सड़क दुर्घटना में पांच और प्राकृतिक कारणों से 20 बाघ शामिल हैं। इस अवधि में 303 तेंदुए भी मारे गए हैं। इनमें एक जाल में फंसकर, तीन रेल दुर्घटना में, 21 सड़क दुर्घटना में, 52 आपसी लड़ाई से, 33 अन्य दुर्घटनाओं में, 64 प्राकृतिक कारणों से और पांच मानव जीवन के लिए खतरनाक घोषित किए जाने के बाद मारे गए।
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प्रदेश के जंगलों में बाघ व तेंदुआ सुरक्षित नहीं
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
उत्तराखंड के जंगलों में बाघ और तेंदुआ सुरक्षित नहीं हैं। पिछले तीन साल में कुल 345 बाघ और तेंदुओं की मौत हो चुकी है। वन्य जीव अंगों के तस्करों के साथ ही अवैध रूप से वनों में रह रहे वन गुर्जर भी बड़ा खतरा बन रहे हैं, जो जहर, खटका और क्लच वायर जैसे तरीकों से वन्यजीवों का शिकार कर रहे हैं।
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वन विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पिछले तीन साल में 45 बाघों की मौत हुई है। इनमें अवैध शिकार से तीन, अज्ञात वजह से नौ, सड़क दुर्घटना में पांच और प्राकृतिक कारणों से 20 बाघ शामिल हैं। इस अवधि में 303 तेंदुए भी मारे गए हैं। इनमें एक जाल में फंसकर, तीन रेल दुर्घटना में, 21 सड़क दुर्घटना में, 52 आपसी लड़ाई से, 33 अन्य दुर्घटनाओं में, 64 प्राकृतिक कारणों से और पांच मानव जीवन के लिए खतरनाक घोषित किए जाने के बाद मारे गए।
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जहर देकर पहले भी मारे गए बाघ-तेंदुए
हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज में दो बाघों को जहर देकर मारने का मामला सामने आया है। यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी विभिन्न रेंजों से वन गुर्जर वन्य जीव अंगों के साथ पकड़े जा चुके हैं।
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विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए कुछ लोग उत्तर प्रदेश वन विभाग की सीमा क्षेत्र के थे। पूर्व में मोहंड के पास तेंदुए की दो खालों के साथ वन गुर्जर पकड़े गए थे। वहीं, 2016 में गैंडीखत्ता में एक वन गुर्जर सहित चार लोगों को बाघ की खाल के साथ पकड़ा गया था।