याकूब मेमन की जिंदगी पर भारी पड़ा 3 का साया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यह एक अजीब इत्तेफाक रहा कि 30 जुलाई को एक तरफ हिंदुस्तान के सच्चे सपूत भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को सुपर्द-ए-खाक किया गया।
वहीं मुंबई ब्लास्ट कांड के अभियुक्त याकूब मेमन को फांसी पर लटकाने के बाद दफनाया गया। भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी का कहना है कि याकूब मेमन के जीवन में तीन अंक का भारी योगदान रहा। जिस दिन वह पैदा हुआ उसी दिन फांसी पर लटका।
याकूब 30 जुलाई 1962 को पैदा हुआ। तीन जमा सिफर तीन होता है जो उसका मूलांक था। 30 जुलाई 1990 को सीए की डिग्री हासिल की यह अंक भी तीन हुआ।
तीन मार्च 1991 को उसने चेतन मेहता के साथ कंपनी खोली यह अंक भी तीन है। तीन अक्तूबर को उसका निकाह हुआ। 15 लोगों को उसने पाकिस्तान में आतंक की ट्रेनिंग के लिए भेजा। वह तारीख भी तीन फरवरी थी। 12 मार्च 1993 को मुंबई में बम धमाके किए जो एक जमा दो जोड़कर तीन का अंक बनता है।
धार्मिक भावनाओं को देने वाला होता है तीन का अंक
बम धमाके में 255 लोग धमाकों में मारे गए। दो जमा पांच, जमा पांच बराबर 12 होता है। बारह को एक जमा दो में जोड़ने पर तीन का अंक आता है। उसकी चार्जशीट तीन नवंबर को तैयार हुई। 21 सितंबर 2003 को पूरे मामले की सुनवाई हुई यानी दो जमा एक बराबर तीन हुआ।
21 मार्च 2011 को याकूब की सजा बरकरार रखी गई। यह भी दो जमा एक बराबर तीन होता है। 12 अप्रैल 2014 को राष्ट्रपति ने खारिज दलील की प्रति याकूब को दी। यानी एक जमा दो बराबर तीन का अंक बना। 21 जुलाई 2015 को क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हुई।
दो जमा एक बराबर तीन हुआ। इस केस में 12 दोषियों को फांसी की सजा मिली। एक जमा दो बराबर तीन का अंक हुआ। 30 जुलाई को याकूब को फांसी पर लटकाया गया। यहां भी तीन जमा सिफर बराबर तीन हुआ। डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार यह तीन का अंक बहुत अधिक धार्मिक भावनाओं को देने वाला होता है।