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Dehradun News: इस बार घरों में स्थापित होंगे गाय के गोबर से बने गणेश

Wed, 04 Sep 2024 04:45 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2024 04:45 AM IST
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This time there is a demand for eco-friendly idols
Iगणेश चतुर्थी के लिए भगवान गणेश की इको फ्रेंडली मूर्तियों की बढ़ी मांगI
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राजधानी में गणेश उत्सव की तैयारी तेजी हो गई हैं। घरों में स्थापित करने के लिए इस बार भगवान गणेश की इको फ्रेंडली मूर्तियों की मांग की जा रही हैं। शहर में कई जगहों पर गाय के गोबर से मूर्तियों को तैयार किया जा रहा हैं।



सात सितंबर को भगवान गणेश घरों और पंडालों में विराजमान होंगे। इसके लिए विभिन्न संगठन तैयारी में जुटे हुए हैं। राजपुर रोड पर स्वदेश कुटुंब स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गाय के गोबर से भगवान गणेश की मूर्तियां तैयार कर रही हैं। इनकी काफी मांग की जा रही हैं। समूह के पवन थापा बताते हैं कि महिलाएं पिछले काफी दिन से मूर्तियां तैयार कर रही हैं। लोग घरों में स्थापित करने के लिए अभी से बुकिंग करा रहे हैं। गाय के गोबर की एक फीट तक की मूर्तियां तैयार की गई हैं।
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इसे बनाने के लिए पहले गाय के गोबर को सुखाते हैं। इसके बाद मशीन से बारीक किया जाता है और इसमें थोड़ी मिट्टी मिलाई जाती है। इसके बाद गोंद से मजबूत किया जाता है और गंगाजल डालकर शुद्ध किया जाता है। इसके बाद गणपति का स्वरूप देकर रंग किया जाता है।
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Iविसर्जन पर पानी में घुल जाती है मूर्तिI

गाय के गोबर से बनी भगवान गणेश की मूर्ति विसर्जन के बाद पानी में आराम से घुल जाती है। पवन बताते हैं कि पीओपी की मूर्तियां पानी में नहीं घुल पाती और प्रदूषण भी फैलाती हैं। हिंदू संस्कृति में गाय के गोबर का खासा महत्व है। पूजा-अर्चना में गाय के गोबर से बनी मूर्तियों को सर्वोत्तम माना गया है।




Iगढ़ी कैंट में धूमधाम से मनेगा 19वां गणेशोत्सवI



गढ़ी कैंट में 19वां गणेशोत्सव भव्य रूप से मनाया जाएगा। भगवान गणेश के विराजमान होने के बाद यहां हर दिन आयोजन होंगे। श्री सिद्धि विनायक गणेश पंडाल गढ़ी कैंट की ओर से बप्पा की इको फ्रेंडली मूर्ति तैयार की जा रही है। ये पंडाल दून के सबसे पुराने गणेश उत्सव में से एक है। समिति के अध्यक्ष आजीव विजय बताते हैं कि 19 साल पहले पहली बार गणेश उत्सव का आयोजन किया गया था। बताया कि पंडाल में स्थापित करने के लिए भगवान की इको फ्रेंडली मूर्ति को वह स्वयं बनाते हैं। इसके लिए मुल्तानी मिट्टी और कागज की प्रयोग करते हैं। इस बार टपकेश्वर चौक के पास आजीविका एजुकेशन में मूर्ति स्थापित की जाएगी। 11 सितंबर को भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।
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