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नई पीढ़ी के सामने नहीं होगा यमुना को पार करने का जोखिम
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हिमाचल की ओर से पैदल व बाइक से यमुना नदी को पार करके विकासनगर आते क्षेत्रवासी।
- फोटो : VIKAS NAGAR
विकासनगर। हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भीमावाला नावघाट का पुल बड़ी राहत लेकर आएगा। हिमाचल के कई गांवों व उत्तराखंड के विकासनगर क्षेत्र निवासी पीढ़ी दर पीढ़ी से हर एक दिन यमुना नदी की लहरों से जूझते हुए जान जोखिम में डालकर अपनी आवाजाही करते रहे हैं। पुल बन जाने के बाद दैनिक आवाजाही के लिए यमुना नदी को पार करने वालों के लिए राह आसान हो जाएगी।
उत्तराखंड की सीमा पर बसे हिमाचल के सीमावर्ती जनपद सिरमौर का विकासनगर व इसके आसपास के क्षेत्र से गहरा नाता रहा है। राजशाही के समय में विकासनगर सिरमौर रियासत का ही हिस्सा हुआ करता था। यही कारण है कि उत्तराखंड व हिमाचल की सीमा पर बहने वाली यमुना नदी के एक किनारे पर बसे विकासनगर व दूसरे किनारे पर बसे भगानी, सिंहपुरा, गोरखोवाला, सालवाला, राजपुर, नघेता, अंबोया व सिक्खों का प्रसिद्घ तीर्थस्थल पौंटा साहिब का विकासनगर से गहरा नाता रहा है। यमुना नदी के किनारों पर बसे गावों के निवासियों की मानें तो दोनों प्रदेशों के इन क्षेत्रों के निवासियों की आपसी नाते-रिश्तेदारियां भी बहुत अधिक हैं। इस सबके अतिरिक्त यमुनापार हिमाचल के इन तमाम गांव शहरों के व्यापार का केंद्र भी पहले से विकासनगर ही रहा है। मौजूदा समय में भी प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण अपनी जरूरत के सामानों की खरीदारी के लिए विकासनगर ही आते हैं। लेकिन भीमावाला नावघाट पर लगने वाली नाव व बरसात के दिनों में झूला पुल या फिर पैदल नदी को पार करना इस सारी आवाजाही के माध्यम हुआ करते थे। स्थिति यह कि सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासी हर दिन खतरों से खेलकर नदी को पार करके आते-जाते रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती गांव के निवासी अजय मेहता, मनीष तोमर, सुरेखा चौधरी, राहुल चौधरी बताते हैं उनसे पहली पीढ़ी के समय से यमुना नदी पर नाव के सहारे क्षेत्रवासियों को नदी पार कराने वाले बनारसी दास व करतारा को आज भी यह यकीन नहीं है कि यमुना नदी के भीमावाला घाट पर पुल का निर्माण शुरू हो गया है। उनका कहना है पुल बनने से उनकी आने वाली नस्लों को यमुना नदी के तेज बहाव को पार करने के जोखिम से तो निजात मिल ही जाएगी।
भीमावाला नावघाट का पुल
विकासनगर। विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने भीमावाला नाव घाट पर बनने वाले यमुना पुल का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम रखे जाने की मांग की है। उन्होेंने मुख्यमंत्री को एक पत्र भी इस संबंध में लिखा है। उनका कहना है पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व समस्त देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। इसलिए पछवादून व हिमाचल प्रदेश के निवासियों की राहत के लिए बनने जा रहे पुल का नाम अटल बिहारी वाजपेयी सुते किया जाना चाहिए।
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उत्तराखंड की सीमा पर बसे हिमाचल के सीमावर्ती जनपद सिरमौर का विकासनगर व इसके आसपास के क्षेत्र से गहरा नाता रहा है। राजशाही के समय में विकासनगर सिरमौर रियासत का ही हिस्सा हुआ करता था। यही कारण है कि उत्तराखंड व हिमाचल की सीमा पर बहने वाली यमुना नदी के एक किनारे पर बसे विकासनगर व दूसरे किनारे पर बसे भगानी, सिंहपुरा, गोरखोवाला, सालवाला, राजपुर, नघेता, अंबोया व सिक्खों का प्रसिद्घ तीर्थस्थल पौंटा साहिब का विकासनगर से गहरा नाता रहा है। यमुना नदी के किनारों पर बसे गावों के निवासियों की मानें तो दोनों प्रदेशों के इन क्षेत्रों के निवासियों की आपसी नाते-रिश्तेदारियां भी बहुत अधिक हैं। इस सबके अतिरिक्त यमुनापार हिमाचल के इन तमाम गांव शहरों के व्यापार का केंद्र भी पहले से विकासनगर ही रहा है। मौजूदा समय में भी प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण अपनी जरूरत के सामानों की खरीदारी के लिए विकासनगर ही आते हैं। लेकिन भीमावाला नावघाट पर लगने वाली नाव व बरसात के दिनों में झूला पुल या फिर पैदल नदी को पार करना इस सारी आवाजाही के माध्यम हुआ करते थे। स्थिति यह कि सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासी हर दिन खतरों से खेलकर नदी को पार करके आते-जाते रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती गांव के निवासी अजय मेहता, मनीष तोमर, सुरेखा चौधरी, राहुल चौधरी बताते हैं उनसे पहली पीढ़ी के समय से यमुना नदी पर नाव के सहारे क्षेत्रवासियों को नदी पार कराने वाले बनारसी दास व करतारा को आज भी यह यकीन नहीं है कि यमुना नदी के भीमावाला घाट पर पुल का निर्माण शुरू हो गया है। उनका कहना है पुल बनने से उनकी आने वाली नस्लों को यमुना नदी के तेज बहाव को पार करने के जोखिम से तो निजात मिल ही जाएगी।
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भीमावाला नावघाट का पुल
विकासनगर। विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने भीमावाला नाव घाट पर बनने वाले यमुना पुल का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम रखे जाने की मांग की है। उन्होेंने मुख्यमंत्री को एक पत्र भी इस संबंध में लिखा है। उनका कहना है पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व समस्त देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। इसलिए पछवादून व हिमाचल प्रदेश के निवासियों की राहत के लिए बनने जा रहे पुल का नाम अटल बिहारी वाजपेयी सुते किया जाना चाहिए।
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