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Dehradun News: जल विद्युत परियोजनाओं की भूमि निजी क्षेत्र को देने पर भारी विरोध

Tue, 10 Feb 2026 07:27 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 10 Feb 2026 07:27 PM IST
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There was strong opposition to giving the land of hydropower projects to the private sector.
-ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र
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अमर उजाला ब्यूरो

देहरादून। उत्तराखंड में जल विद्युत परियोजनाओं की जमीन निजी क्षेत्र को सौंपने का विरोध तेज हो गया है। इस कड़ी में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजा है।

शैलेंद्र दुबे ने इस निर्णय को प्रदेश एवं पावर सेक्टर के हितों के विरुद्ध बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। कहा कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की डाकपत्थर एवं ढालीपुर स्थित विभिन्न परियोजनाओं से संबंधित कुल 76.7348 हेक्टेयर भूमि को तीन दिसंबर को शासनादेश जारी कर उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन को भूमि का दाखिल-खारिज, सीमांकन एवं अधिग्रहण की कार्रवाई के आदेश जारी किए गए। इससे पावर सेक्टर में गहरी चिंता उत्पन्न हो गई है।
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दुबे ने लिखा कि यह भूमि अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से जल विद्युत परियोजनाओं के वर्तमान संचालन एवं भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखते हुए आवंटित की गई थी। डाकपत्थर क्षेत्र से यमुना स्टेज-1 एवं स्टेज-2, व्यासी परियोजना, लखवाड़, किशाऊ, टोंस एवं अन्य कई महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाओं का संचालन एवं निर्माण किया जा रहा है। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराना लगभग असंभव है। भूमि हस्तांतरण से न केवल प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा बल्कि केंद्र सरकार की यमुना पुनर्जीवन योजना के अंतर्गत लखवाड़ एवं किशाऊ जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं भी प्रभावित होंगी। मुख्यमंत्री से मांग कि यूआईआईडीबी के माध्यम से प्रस्तावित भूमि हस्तांतरण आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। इसे एकतरफा निजी क्षेत्र को सौंपने का प्रयास किया गया तो देशभर के बिजली कर्मी एवं इंजीनियर इसके खिलाफ सशक्त आंदोलन को बाध्य होंगे।
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