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चिंता : मंडुवे की खेती से मुंह मोड़ रहे किसान
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मंडुवे की निराई-गुड़ाई पूरी होने पर मनाया जाता है पर्व
पर्व को लेकर उत्साह लेकिन खेती के प्रति बढ़ रही उदासीनता
जौनसार बावर क्षेत्र में मंडुवे की खेती में निराई-गुड़ाई के काम को पूरा करने के बाद मनाए जाने वाले मंडुवे की निठावन पर्व को लेकर ग्रामीणों में उत्साह है। मौजूदा दिनों में संपन्न होने वाले इस लोक पर्व के लिए गांवो में तैयारियां भी लगभग पूरी कर ली गई हैं। लेकिन जिस खेती के लिए धूमधाम से यह पर्व मनाया जाता है उससे किसान लगातार मुंह मोड़ रहे हैं। इस बार क्षेत्र में सबसे कम मंडुवे की बुवाई की गई है।
मंडुवे को सबसे अधिक पौष्टिक आहार के रूप में जाना जाता है। जौनसार बावर के क्षेत्र में व्यापक स्तर पर इसकी खेती भी की जाती है। फसल की महत्ता काे इसी बात से समझा जा सकता है कि फसल की निराई-गुड़ाई के बाद क्षेत्र में मंडुवे की निठावण नामक एक त्योहार भी मनाया जाता है। इस त्योहार में गांव-गांव में जश्न का वातावरण होता है।
इस बार की गई बुवाई के बाद निराई-गुड़ाई का काम पूरा हो चुका है और ग्रामीणों में दो दिन बाद मनाए जाने वाले पर्व को लेकर उत्साह भी पूरा है। लेकिन कृषि व उद्यान विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति चिंताजनक है। फसल के उत्पादन से किसान लगातार किनारा कर रहे हैं।
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पिछले 10 साल में मंडुवे का उत्पादन 20 प्रतिशत से भी कम पर आ गया है। मंडुवे की खेती की स्थिति से क्षेत्र के बुजुर्ग दुखी हैं। ककाड़ी गांव के 85 वर्षीय किसान धन सिंह बिष्ट व सुरेऊ गांव के 82 वर्षीय किसान संतराम चौहान का कहना है कि मंडुवा भी कोणी, झंगोरे की तरह क्षेत्र से विलुप्त हो रहा है। संवाद
दस साल में घटा खेती का रकबा
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जौनसार बावर क्षेत्र में वर्ष 2015-16 से पूर्व मंडुवे की खेती का रकबा 1100 हेक्टेयर हुआ करता था जो 2016-17 में 900 हेक्टेयर, 2017-18 में घटकर 750 हेक्टेयर, 2018-19 में 450 हेक्टेयर, 2019-20 में 300 हेक्टेयर और 2020-21 में 150 हेक्टेयर रह गया। 2021-22 में फसल का रकबा घटकर 100 हेक्टेयर तक सिमट गया।
बयान...
पिछले कई साल से मंडुवे की खेती का रकबा लगातार घट रहा है, जिसका कारण यह है कि किसान पारंपरिक फसलों के स्थान पर दूसरी फसलों के प्रति आकर्षित हो रहा है। - सतेंद्र नेगी, प्रभारी कृषि विभाग, कालसी
जौनसार बावर क्षेत्र में फल व सब्जी उत्पादन को लेकर किसानों का रुझान बढ़ा है। उसके बाजार व बीज, पौध आदि की सुविधा के अलावा अच्छा मूल्य मिलना जैसे कई कारण हैं। - एके शर्मा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र, ढकरानी
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पर्व को लेकर उत्साह लेकिन खेती के प्रति बढ़ रही उदासीनता
जौनसार बावर क्षेत्र में मंडुवे की खेती में निराई-गुड़ाई के काम को पूरा करने के बाद मनाए जाने वाले मंडुवे की निठावन पर्व को लेकर ग्रामीणों में उत्साह है। मौजूदा दिनों में संपन्न होने वाले इस लोक पर्व के लिए गांवो में तैयारियां भी लगभग पूरी कर ली गई हैं। लेकिन जिस खेती के लिए धूमधाम से यह पर्व मनाया जाता है उससे किसान लगातार मुंह मोड़ रहे हैं। इस बार क्षेत्र में सबसे कम मंडुवे की बुवाई की गई है।
मंडुवे को सबसे अधिक पौष्टिक आहार के रूप में जाना जाता है। जौनसार बावर के क्षेत्र में व्यापक स्तर पर इसकी खेती भी की जाती है। फसल की महत्ता काे इसी बात से समझा जा सकता है कि फसल की निराई-गुड़ाई के बाद क्षेत्र में मंडुवे की निठावण नामक एक त्योहार भी मनाया जाता है। इस त्योहार में गांव-गांव में जश्न का वातावरण होता है।
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इस बार की गई बुवाई के बाद निराई-गुड़ाई का काम पूरा हो चुका है और ग्रामीणों में दो दिन बाद मनाए जाने वाले पर्व को लेकर उत्साह भी पूरा है। लेकिन कृषि व उद्यान विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति चिंताजनक है। फसल के उत्पादन से किसान लगातार किनारा कर रहे हैं।
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पिछले 10 साल में मंडुवे का उत्पादन 20 प्रतिशत से भी कम पर आ गया है। मंडुवे की खेती की स्थिति से क्षेत्र के बुजुर्ग दुखी हैं। ककाड़ी गांव के 85 वर्षीय किसान धन सिंह बिष्ट व सुरेऊ गांव के 82 वर्षीय किसान संतराम चौहान का कहना है कि मंडुवा भी कोणी, झंगोरे की तरह क्षेत्र से विलुप्त हो रहा है। संवाद
दस साल में घटा खेती का रकबा
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जौनसार बावर क्षेत्र में वर्ष 2015-16 से पूर्व मंडुवे की खेती का रकबा 1100 हेक्टेयर हुआ करता था जो 2016-17 में 900 हेक्टेयर, 2017-18 में घटकर 750 हेक्टेयर, 2018-19 में 450 हेक्टेयर, 2019-20 में 300 हेक्टेयर और 2020-21 में 150 हेक्टेयर रह गया। 2021-22 में फसल का रकबा घटकर 100 हेक्टेयर तक सिमट गया।
बयान...
पिछले कई साल से मंडुवे की खेती का रकबा लगातार घट रहा है, जिसका कारण यह है कि किसान पारंपरिक फसलों के स्थान पर दूसरी फसलों के प्रति आकर्षित हो रहा है। - सतेंद्र नेगी, प्रभारी कृषि विभाग, कालसी
जौनसार बावर क्षेत्र में फल व सब्जी उत्पादन को लेकर किसानों का रुझान बढ़ा है। उसके बाजार व बीज, पौध आदि की सुविधा के अलावा अच्छा मूल्य मिलना जैसे कई कारण हैं। - एके शर्मा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र, ढकरानी