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Dehradun News: पति की लंबी उम्र के लिए दान कर दी अपनी किडनी

Thu, 02 Nov 2023 12:06 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 02 Nov 2023 12:06 AM IST
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There are some women who do not lag behind in saving their
Iपति की लंबी उम्र के लिए व्रत के साथ अंगदान भी कर रही महिलाएंI
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Iराजपुर रोड स्थित एक अस्पताल में आठ महिलाएं अपने पति को दे चुकी हैं किडनीI
पति की लंबी आयु के लिए महिलाएं करवाचौथ का व्रत तो रखती ही हैं लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो अपने अंगदान करके पति की जान बचाने में भी पीछे नहीं रहतीं। अपनी जान की परवाह न करते हुए भी वह अपने अंग से पति को नया जीवन दे रही हैं। राजपुर रोड स्थित एक अस्पताल में कई महिलाओं ने अपने पति की जान बचाने के लिए अंगदान किए हैं। करवा चौथ पर हमने ऐसे ही महिलाओं से बात की
हरिद्वार निवासी अंजु मल (45) ने पति कमलकांत (45) को अपनी एक किडनी दान की है। अंजू ने बताया कि मेरे पति की पिछले एक साल से तबीयत खराब थी। उन्हें यूरिन पास नहीं होती थी इस वजह से शरीर और पैरों में सूजन आ गई थी। डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने दवाएं दीं। छह महीने तक दवाई चलीं लेकिन कोई फायदा नहीं हुई। इसके बाद पति की डायलिसिस होने लगी। पति की बिगड़ती सेहत देखकर मुझे दिन पर दिन घबराहट होती थी। यही लगता था कि पति किसी तरह से ठीक हो जाएं। फिर डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने किडनी ट्रांसप्लांट करने की सलाह दी। इसके बाद हमने किडनी दान करने का फैसला किया। जांच होने पर मुझे कोई समस्या नहीं निकली और फिर हमने अपने पति को किडनी दान दे दी। अब हम दोनों बिल्कुल ठीक हैं।
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रायपुर निवासी सुरेंद्र कौर (53) ने अपने पति परमजीत सिंह (62) को अपनी किडनी दान की है। सुरेंद्र ने बताया कि उनके पति की तबीयत पिछले दो साल से खराब थी। उन्हें यूरिन पास नहीं होती थी और यूरिन में बहुत जलन होती थी। सांस लेने में दिक्कत होती थी। डॉक्टर को दिखाया तो पता चला किडनी खराब हो गई है। शुरुआत में डॉक्टर ने दवाइयां दीं। इसके बाद समस्या बढ़ती गई तो वह डायलिसिस पर आ गए। लंबे समय से डायलिसिस चल रही थी तबीयत दिन पर दिन बिगड़ती जा रही थी। उनकी इस हालत की वजह से हम बहुत परेशान थे। ऐसे में डॉक्टर ने बताया कि किडनी प्रत्यारोपण से स्थिति सुधर जाएगी। इसके बाद हमने अपने पति को किडनी दान की है। अब हम दोनों स्वस्थ हैं।
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Iकिडनी प्रत्यारोपण के लिए ब्लड ग्रुप की जांच जरूरीI

नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. पुनीत अरोरा ने बताया किडनी प्रत्यारोपण के लिए सबसे पहले ब्लड ग्रुप का मैच होना बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा हिस्टो कंपैटिबिलिटी टेस्ट किया जाता है। इसमें यह पता चलता है कि प्रत्यारोपण के बाद शरीर किडनी स्वीकार कर पाएगा या नहीं। कई टेस्ट होने के बाद भी पांच से 10 फीसदी संभावना होती है कि शरीर किडनी को स्वीकार न करें और व्यक्ति ठीक होने की बजाय दोबारा डायलिसिस पर आ जाए। हालांकि ऐसे केस बहुत कम होते हैं।
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