- अर्चना पैन्यूली के उपन्यास के लोकार्पण कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने की शिरकत
देहरादून। दून पुस्तकालय में शुक्रवार को लेखिका अर्चना पैन्यूली की पुस्तक अलकनंदा सुत का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री व साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने शिरकत की। वक्ताओं ने कहा कि अलकनंदा सुत जैसी कहानियां लिखी नहीं जातीं वे पहाड़ की मिट्टी में उपजती व वहां की हवा में गूंजती हैं और नदी के शोर में गुम हो जाती हैं। उत्तराखंड की पृष्ठभूमि पर आधारित कृति अलकनंदा सुत में लेखिका ने भौगोलिक परिवेश, सांस्कृतिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और जीवन के विविध पक्षों को सशक्त साहित्यिक अभिव्यक्ति दी है। पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी ने कहा कि अलकनंदा सुत मानव जीवन का एक प्रकार से विश्वकोश है। वरिष्ठ लेखिका सुधारानी पांडे ने पुस्तक को पहाड़ के जीवन-संघर्षों की संवेदनशील अभिव्यक्ति बताया है। पूर्व मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि अलकनंदा सुत में पहाड़ी ग्रामीण परिवेश और पहाड़ के संघर्षों का सजीव चित्रण देखने को मिलता है। डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि अर्चना यूरोप के छोटे-से देश डेनमार्क में रहकर भी अपने उपन्यासों से हिंदी पाठकों को प्रवासी भारतीय जीवन का नया स्वाद देती रही हैं। सरोजिनी नौटियाल ने उपस्थित दर्शकों को लेखिका के साहित्यिक योगदान से परिचित कराया। लेखिका अर्चना पैन्यूली ने कहा कि मेरे लिए यह क्षण केवल एक साहित्यिक उपलब्धि नहीं बल्कि गहरा भावनात्मक अनुभव है। इस अवसर पर डॉ. योगेश धस्माना, डॉली डबराल, राजीव नयन बहुगुणा, सुंदर सिंह बिष्ट, जगदीश सिंह महर, भारती मिश्रा, डॉली डबराल, सुप्रिया रतूड़ी, हरि चंद निमेश, मदन मोहन कंडवाल, सोमवारी लाल उनियाल, मोहन सिंह, जय भगवान गोयल, डाॅ. लालता प्रसाद आदि मौजूद रहे।