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उत्तराखंड: प्रस्ताव के अनुसार नहीं हुआ वर्दी भत्ते का शासनादेश, सिपाहियों में आक्रोश

Sun, 05 Sep 2021 09:40 AM IST
देहरादून ब्यूरो न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Sun, 05 Sep 2021 09:40 AM IST
सार

दरअसल, सिपाहियों को पुलिस मुख्यालय ही वर्दी का कपड़ा खरीदकर देता है, लेकिन पुलिस के गैर राजपत्रित अधिकारियों से लेकर ऊपर तक सभी को वर्दी भत्ता दिया जाता है। इसी क्रम में सिपाहियों के लिए भी यह भत्ता दिए जाने पर विचार हो रहा था।

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The mandate of uniform allowance was not done as per the proposal
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

वर्दी भत्ते संबंधी शासनदेश मुख्यालय के प्रस्ताव के अनुसार नहीं हुआ। शासन ने इसमें वर्दी भत्ते के साथ धुलाई भत्ता भी मिला दिया। जबकि, धुलाई भत्ता पहले से ही अलग मिलता आ रहा है। शासनदेश के सामने आते ही सिपाहियों में आक्रोश पैदा हो गया। हालांकि, इससे पहले ही मुख्यालय ने इसमें सुधार के लिए दोबारा प्रस्ताव भेज दिया है। माना जा रहा है कि इसमें सुधार के बाद यह जल्द ही दोबारा भी जारी कर दिया जाएगा।

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दरअसल, सिपाहियों को पुलिस मुख्यालय ही वर्दी का कपड़ा खरीदकर देता है, लेकिन पुलिस के गैर राजपत्रित अधिकारियों से लेकर ऊपर तक सभी को वर्दी भत्ता दिया जाता है। इसी क्रम में सिपाहियों के लिए भी यह भत्ता दिए जाने पर विचार हो रहा था।
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डीजीपी अशोक कुमार के बनने के बाद उन्होंने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा था। सिपाहियों के लिए 2250 रुपये वर्दी भत्ता दिए जाने की मांग की गई थी। शनिवार को शासन से वर्दी भत्ता संबंधी आदेश आया तो अधिकारी देखकर दंग रह गए। इसमें वर्दी और धुलाई भत्ता जोड़कर 2250 रुपये किया गया था। जबकि, धुलाई भत्ते के लिए कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया था। क्योंकि, धुलाई भत्ता तो पहले से ही 200 रुपये प्रतिमाह सिपाहियों को मिल रहा है।
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सह प्रवक्ता उत्तराखंड पुलिस डीआईजी डॉ. नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि मुख्यालय ने धुलाई भत्ते की मांग नहीं की थी। यह शासनादेश प्रस्ताव के अनुरूप नहीं है। लिहाजा, सिर्फ वर्दी भत्ते का शासनादेश जारी करने की मांग की गई है। डॉ. भरणे ने बताया कि उनकी शासन में बात भी हो चुकी है। जल्द ही नया शासनदेश आ जाएगा।

सिपाहियों ने लगाया गणित सिर्फ बढ़े 150 रुपये
शासनादेश के आते ही सिपाहियों के बीच चर्चा शुरू हो गई। अलग-अलग सोशल मीडिया ग्रुप पर यह शासनदेश चर्चा का विषय बना। सिपाहियों ने गणित भी लगाया जिसके अनुसार उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ। दरअसल, 200 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से 2400 रुपये तो उन्हें सिर्फ धुलाई भत्ता ही मिल रहा है। ऐसे में यदि 2250 रुपये वर्दी और धुुलाई का भत्ता भी मिलेगा तो इसमें केवल 150 रुपये का इजाफा होगा। इससे उन्हें कोई फायदा नहीं होने वाला।


2250 रुपये कम है धुलाई भत्ता
अब धुलाई भत्ता अगर 2250 रुपये मिलता भी है तो यह बेहद कम होगा। सिपाहियों का कहना है कि वर्तमान में सिर्फ सिलाई ही एक हजार रुपये से अधिक होती है। इसमें टोपी, बेल्ट और जूते कहां से आएंगे। सही मायनों में देखा जाए तो इतने में तो जूते और बेल्ट आदि ही आ पाएंगे। दो जोड़ी वर्दी का तो सवाल ही नहीं उठता।

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