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Dehradun News: वनाग्नि काल को एक जनवरी से शुरू किया जाए
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देहरादून। शीतलाखेत मॉडल के संयोजक गजेंद्र कुमार पाठक ने मुख्य सचिव को एक ज्ञापन भेजा है। इसमें कहा गया है कि वर्ष-2023 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वनाग्नि प्रबंधन में शीतलाखेत मॉडल को प्रदेश में लागू करने की घोषणा की थी। पर इसे आज तक लागू नहीं किया गया है। संयोजक पाठक सुझाव देते हुए कहा कि वनाग्नि काल जो कि 15 फरवरी से 15 जून तक चलता है, उसे एक जनवरी से शुरू कर बारिश होने तक जारी रखा जाए।
वनाग्नि प्रबंधन में जन सहयोग सुनिश्चित करने के लिए हर ग्राम सभा में महिला मंगल दल का गठन किया जाए। ग्राम स्तरीय आपदा प्रबंधन समिति में महिला मंगल दल की प्रभावी भूमिका रखी जाए। फायर वॉचर को केवल चार महीने नहीं बल्कि जागरूकता अभियान, झाड़ी कटान जैसे कार्यों के माध्यम से पूरे वर्ष भर जोड़ा जाए। खनन न्यास की तरह अन्य वनोपज से प्राप्त आय के निश्चित हिस्से का उपयोग वनाग्नि प्रबंधन में किया जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि पौधरोपण को दस वर्षों तक स्थगित रखते हुए एएनआर पद्धति से नए जंगल को विकसित किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में चीड़ के नए वृक्षों का कटान हो रहा है, इसे रोकने के लिए ग्रामीणों को उचित विकल्प देकर चीड़ के वृक्षों की सुरक्षा की जाए।
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वनाग्नि प्रबंधन में जन सहयोग सुनिश्चित करने के लिए हर ग्राम सभा में महिला मंगल दल का गठन किया जाए। ग्राम स्तरीय आपदा प्रबंधन समिति में महिला मंगल दल की प्रभावी भूमिका रखी जाए। फायर वॉचर को केवल चार महीने नहीं बल्कि जागरूकता अभियान, झाड़ी कटान जैसे कार्यों के माध्यम से पूरे वर्ष भर जोड़ा जाए। खनन न्यास की तरह अन्य वनोपज से प्राप्त आय के निश्चित हिस्से का उपयोग वनाग्नि प्रबंधन में किया जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि पौधरोपण को दस वर्षों तक स्थगित रखते हुए एएनआर पद्धति से नए जंगल को विकसित किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में चीड़ के नए वृक्षों का कटान हो रहा है, इसे रोकने के लिए ग्रामीणों को उचित विकल्प देकर चीड़ के वृक्षों की सुरक्षा की जाए।
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