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Dehradun News: बिनसौर से देवदार और कैल की लकड़ी के 565 स्लीपर बरामद
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कनारस रेंज के मसक गांव के आसपास वृहद स्तर पर चला तलाशी अभियान
ग्रामीणों के घरों एवं छानियों में छिपाकर रखे गए थे स्लीपर
चोरी की गई लकड़ी की बरामदगी के लिए उड़ाया जा रहा ड्रोन
वन विभाग और तहसील प्रशासन का अभियान जारी
कनासर रेंज के ग्राम मसक के बिनसौर मजरे में वन विभाग ने वृहत स्तर पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान देवदार और कैल की लकड़ी के 565 स्लीपर बरामद किए गए। काटे गए पेड़ों की स्थिति जानने और छिपाकर रखी गई लकड़ी की तलाश के लिए ड्रोन कैमरा उड़ाया गया।
चकराता वन प्रभाग की कनासर रेंज में हजारों की संख्या में बेशकीमती लकड़ी के पेड़ काटे जाने के मामले में वन विभाग ने प्रदेश की अभी तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। विकासनगर के रामपुर मंडी वन आरक्षी प्रशिक्षण केंद्र के 73 प्रशिक्षणार्थी, चकराता वन प्रभाग के सभी अधिकारी, कर्मचारी और तहसील प्रशासन के अधिकारी कार्रवाई में शामिल रहे। जंगल से चोरी की गई लकड़ी की तलाश को बिनसौन पहुंची टीम ने गांव के एक-एक घर की तलाशी लेते हुए 565 देवदार और कैल की लकड़ी के स्लीपर बरामद किए।
तलाशी अभियान का नेतृत्व कर रहे वन संरक्षक मुकुल कुमार ने बताया कि कनासर रेंज के जंगल से अवैध तरीके से काटे गए पेड़ों की जांच के मामले में यह कार्रवाई हुई है। कार्रवाई सर्च वारंट लेकर कराई जा रही है, जिससे जंगल से काटे गए पेड़ों की लकड़ी को बरामद किया जा सके।
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क्या है पूरा मामला
देहरादून के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता रामशरण नौटियाल ने पिछले माह कनासर रेंज में हजारों की संख्या में पेड़ काटे जाने की शिकायत वन मंत्री से की थी। वन मंत्री के निर्देश पर विभागीय जांच शुरू कर दी गई थी। प्रारंभिक जांच में सात वृक्ष काटने की पुष्टि हुई थी। जिसके बाद कनासर रेंज के रेंजर को कार्यालय अटैच करने के साथ एक वन दरोगा व एक वन रक्षक को निलंबित कर दिया गया था। रेंज से सटे अलग-अलग क्षेत्रों से अभी तक हुई चार कार्रवाई में 164, 71, 61 और 565 यानि कुल मिलाकर 861 स्लीपर बरामद हो चुके हैं।
सरकारी स्कूलों से भी हो चुकी है बरामदगी
रजाणू स्थित राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय और राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवनों से लकड़ी बरामद होने से शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों की माने तो आरोपी बनने से बचने के लिए लकड़ी तस्कर सरकारी विद्यालयों के भवनों का इस्तेमाल कर रहे थे। लकड़ी को छिपाने के मामले में स्कूलों के शिक्षकों की भूमिका क्या है, इसकी जांच शिक्षा विभाग ने शुरू कर दी है। खंड शिक्षा अधिकारी पूजा नेगी दानू ने बताया कि सरकारी विद्यालयों के भवनों में प्रकाष्ठ या कोई भी अन्य वस्तु रखे जाने का प्रावधान नहीं है। शिक्षकों की भूमिका की जांच करके सख्त कार्रवाई की जाएगी।
माफी की लकड़ी के नाम पर खेल
जंगलों के आसपास निवास करने वाले ग्रामीणों के हक-हकूक से संबंधित व्यवस्था के आधार पर उन्हें जंगल से लकड़ी का कुछ हिस्सा दिया जाता है, जिसे माफी की लकड़ी कहा जाता है। इस व्यवस्था के आधार पर हर साल ग्रामीणों को एक या दो पेड़ प्रति गांव के हिसाब से वन विभाग मुफ्त में प्रदान करता है। जंगल में सूखे हुए या फिर किसी कारण से गिर जाने वाले पेड़ों को इस व्यवस्था के लिए उपयोग में लाया जाता है। ग्रामीणों को सौंपी जाने वाली इस प्रकार की लकड़ी पर वन विभाग एक निशान भी लगाता है जिसे घन कहा जाता है। अभी तक बरामद हुए लकड़ी के कई स्लीपरों पर घन के निशान भी लगे हुए हैं। लेकिन उनकी संख्या अधिक होने के कारण घन का निशान भी संदेह के घेरे में है। यदि घन का निशान वन विभाग के माध्यम से लगाया गया है तो यह विभाग की मिलीभगत को और अधिक पुख्ता करता है।
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ग्रामीणों के घरों एवं छानियों में छिपाकर रखे गए थे स्लीपर
चोरी की गई लकड़ी की बरामदगी के लिए उड़ाया जा रहा ड्रोन
वन विभाग और तहसील प्रशासन का अभियान जारी
कनासर रेंज के ग्राम मसक के बिनसौर मजरे में वन विभाग ने वृहत स्तर पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान देवदार और कैल की लकड़ी के 565 स्लीपर बरामद किए गए। काटे गए पेड़ों की स्थिति जानने और छिपाकर रखी गई लकड़ी की तलाश के लिए ड्रोन कैमरा उड़ाया गया।
चकराता वन प्रभाग की कनासर रेंज में हजारों की संख्या में बेशकीमती लकड़ी के पेड़ काटे जाने के मामले में वन विभाग ने प्रदेश की अभी तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। विकासनगर के रामपुर मंडी वन आरक्षी प्रशिक्षण केंद्र के 73 प्रशिक्षणार्थी, चकराता वन प्रभाग के सभी अधिकारी, कर्मचारी और तहसील प्रशासन के अधिकारी कार्रवाई में शामिल रहे। जंगल से चोरी की गई लकड़ी की तलाश को बिनसौन पहुंची टीम ने गांव के एक-एक घर की तलाशी लेते हुए 565 देवदार और कैल की लकड़ी के स्लीपर बरामद किए।
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तलाशी अभियान का नेतृत्व कर रहे वन संरक्षक मुकुल कुमार ने बताया कि कनासर रेंज के जंगल से अवैध तरीके से काटे गए पेड़ों की जांच के मामले में यह कार्रवाई हुई है। कार्रवाई सर्च वारंट लेकर कराई जा रही है, जिससे जंगल से काटे गए पेड़ों की लकड़ी को बरामद किया जा सके।
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क्या है पूरा मामला
देहरादून के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता रामशरण नौटियाल ने पिछले माह कनासर रेंज में हजारों की संख्या में पेड़ काटे जाने की शिकायत वन मंत्री से की थी। वन मंत्री के निर्देश पर विभागीय जांच शुरू कर दी गई थी। प्रारंभिक जांच में सात वृक्ष काटने की पुष्टि हुई थी। जिसके बाद कनासर रेंज के रेंजर को कार्यालय अटैच करने के साथ एक वन दरोगा व एक वन रक्षक को निलंबित कर दिया गया था। रेंज से सटे अलग-अलग क्षेत्रों से अभी तक हुई चार कार्रवाई में 164, 71, 61 और 565 यानि कुल मिलाकर 861 स्लीपर बरामद हो चुके हैं।
सरकारी स्कूलों से भी हो चुकी है बरामदगी
रजाणू स्थित राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय और राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवनों से लकड़ी बरामद होने से शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों की माने तो आरोपी बनने से बचने के लिए लकड़ी तस्कर सरकारी विद्यालयों के भवनों का इस्तेमाल कर रहे थे। लकड़ी को छिपाने के मामले में स्कूलों के शिक्षकों की भूमिका क्या है, इसकी जांच शिक्षा विभाग ने शुरू कर दी है। खंड शिक्षा अधिकारी पूजा नेगी दानू ने बताया कि सरकारी विद्यालयों के भवनों में प्रकाष्ठ या कोई भी अन्य वस्तु रखे जाने का प्रावधान नहीं है। शिक्षकों की भूमिका की जांच करके सख्त कार्रवाई की जाएगी।
माफी की लकड़ी के नाम पर खेल
जंगलों के आसपास निवास करने वाले ग्रामीणों के हक-हकूक से संबंधित व्यवस्था के आधार पर उन्हें जंगल से लकड़ी का कुछ हिस्सा दिया जाता है, जिसे माफी की लकड़ी कहा जाता है। इस व्यवस्था के आधार पर हर साल ग्रामीणों को एक या दो पेड़ प्रति गांव के हिसाब से वन विभाग मुफ्त में प्रदान करता है। जंगल में सूखे हुए या फिर किसी कारण से गिर जाने वाले पेड़ों को इस व्यवस्था के लिए उपयोग में लाया जाता है। ग्रामीणों को सौंपी जाने वाली इस प्रकार की लकड़ी पर वन विभाग एक निशान भी लगाता है जिसे घन कहा जाता है। अभी तक बरामद हुए लकड़ी के कई स्लीपरों पर घन के निशान भी लगे हुए हैं। लेकिन उनकी संख्या अधिक होने के कारण घन का निशान भी संदेह के घेरे में है। यदि घन का निशान वन विभाग के माध्यम से लगाया गया है तो यह विभाग की मिलीभगत को और अधिक पुख्ता करता है।