{"_id":"690cb762e92387c36305b40c","slug":"the-flowers-floating-on-the-waves-were-somewhere-ours-vikas-nagar-news-c-5-drn1037-828234-2025-11-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: लहरों पर बहते फूल कहीं अपने होते...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: लहरों पर बहते फूल कहीं अपने होते...
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-प्रवासी साहित्यकार शरद आलोक के सम्मान में संंगोष्ठी का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
देहरादून। नवोदित प्रवाह की ओर से नार्वे से आए प्रवासी साहित्यकार डॉ. सुरेश चंद्र शुक्ल शरद आलोक के सम्मान में साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें शहर के प्रमुख लेखकों, कवियों और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया।
संगोष्ठी की शुरुआत गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने अपनी प्रसिद्ध रचना लहरों पर बहते फूल कहीं अपने होते... से की। जबकि मुख्य अतिथि डॉ. शरद आलोक ने अपनी संवेदनशील रचना तुम मुझे मिल गए... का पाठ कर खूब तालियां बटोरीं। साथ ही उन्होंने नार्वे में हिंदी में किए जा रहे सृजन कार्यों पर भी प्रकाश डाला। पद्मश्री डॉ. भूपेंद्र कुमार सिंह संजय ने विकसित भारत पर अपनी कविता बढ़े देश, यह कर्तव्य निभाना होगा... की प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध किया। डॉ. बसंती मठपाल ने जरा-जरा सी मंजिलें, जरा-जरा सी ख्वाहिशें... व जय प्रकाश पांडेय पहाड़ी ने पहाड़ का आखिरी खत... कविता का मार्मिक पाठ किया। संगोष्ठी में रजनीश त्रिवेदी, चंदन सिंह नेगी, डॉ. सोमेश्वर पांडेय, डॉ. सुदेश व्याला, जीके पिपल, शिवमोहन सिंह, राहुल वशिष्ठ आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
देहरादून। नवोदित प्रवाह की ओर से नार्वे से आए प्रवासी साहित्यकार डॉ. सुरेश चंद्र शुक्ल शरद आलोक के सम्मान में साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें शहर के प्रमुख लेखकों, कवियों और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया।
संगोष्ठी की शुरुआत गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने अपनी प्रसिद्ध रचना लहरों पर बहते फूल कहीं अपने होते... से की। जबकि मुख्य अतिथि डॉ. शरद आलोक ने अपनी संवेदनशील रचना तुम मुझे मिल गए... का पाठ कर खूब तालियां बटोरीं। साथ ही उन्होंने नार्वे में हिंदी में किए जा रहे सृजन कार्यों पर भी प्रकाश डाला। पद्मश्री डॉ. भूपेंद्र कुमार सिंह संजय ने विकसित भारत पर अपनी कविता बढ़े देश, यह कर्तव्य निभाना होगा... की प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध किया। डॉ. बसंती मठपाल ने जरा-जरा सी मंजिलें, जरा-जरा सी ख्वाहिशें... व जय प्रकाश पांडेय पहाड़ी ने पहाड़ का आखिरी खत... कविता का मार्मिक पाठ किया। संगोष्ठी में रजनीश त्रिवेदी, चंदन सिंह नेगी, डॉ. सोमेश्वर पांडेय, डॉ. सुदेश व्याला, जीके पिपल, शिवमोहन सिंह, राहुल वशिष्ठ आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन