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Diwali 2023: इस बार एक घंटा 56 मिनट तक रहेगा दीपावली पर पूजा का मुहूर्त, यहां जानें कब और कैसे करें पूजन

Sun, 12 Nov 2023 03:51 PM IST
देहरादून ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Sun, 12 Nov 2023 03:51 PM IST
सार

दीपावली पर आज मंदिरों के साथ ही घरों में भी गणेश जी व लक्ष्मी जी की विशेष पूजा अर्चना कर लोग सुख और समृद्धि के लिए आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। सप्ताहभर से दून के लोग बड़ी संख्या दीपावली पर्व के लिए खरीदारी कर रहे हैं।

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दिवाली पूजन विधि - फोटो : istock

विस्तार

कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी अपने भक्तों के घर पर पधारती हैं और उन्हें धन-धान्य का आशीर्वाद देती हैं। ज्योतिषाचार्य सुशांत राज ने बताया कि इस बार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि की शुरुआत 12 नवंबर को दोपहर 2:44 बजे से शुरू होगी और समापन 13 नवंबर को दोपहर 2:56 बजे होगा।

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हिंदू धर्म में उदया तिथि के आधार पर त्योहार मनाए जाते हैं, लेकिन दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल के समय करना शुभ माना जाता है। शनिवार को प्रदोष काल की पूजा का समय 12 नवंबर को शुरू हो रहा है। दिवाली पर 12 नवंबर की शाम 5:40 बजे से लेकर 7:36 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं लक्ष्मी पूजा के लिए महानिशीथ काल मुहूर्त रात 11:39 बजे से मध्यरात्रि 12:31 मिनट तक है। इस मुहूर्त में लक्ष्मी पूजा करने से जीवन में अपार सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।
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बदलते समय के साथ कम हो गया खील बताशा का चलनI
एक समय था जब दीपावली पर खील बताशा और खिलौने की काफी मांग रहती थी। लेकिन बदलते समय के साथ इसका चलन अब काफी कम हो गया है। अब खील बताशा और खिलौने केवल शगुन के लिए ही खरीदे जाते है। दुकानदारों का कहना है कि पहले की अपेक्षा इस बार भी खील बताशा और खिलौने काफी कम मात्रा में खरीदे जाते हैं।
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दीपावली पर खील बताशा और खिलौने का अपना महत्व है। इसे लेकर खील, बताशे, चीनी खिलौने की दुकानें पहले से ही सज जाती है। कुछ सालों पहले तक दीपावली पर खील, बताशे, चीनी खिलौनों का चलन काफी हुआ करता था। लेकिन अब जैसे-जैसे समय बदल रहा है वैसे ही इनकी मांग अब पहले से काफी कम होती जा रही है।

लोग खील, बताशा ओर खिलौनों को केवल पूजा के लिए खरीदते है। कुछ समय पहले दीपावली पर्व पर इन्हें लोग काफी मात्रा में खरीदा करते थे। पूजा में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को भोग लगाने के साथ ही प्रसाद बांटा जाता था। लेकिन बदलते दौर में इस प्रसाद की जगह भी अब तरह-तरह की मिठाइयों ने ले ली है। दीपावली पर खील, बताशे ओर खिलौने का भोग तो जरूर लगाया जाता है, लेकिन प्रसाद में इसकी जगह अब मिठाइयों ने ले ली है।

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लोग अब दुकानों से भोग के अनुसार काफी कम मात्रा में इन्हें खरीदते है। इससे इसके कारोबार पर भी काफी असर पड़ा है। व्यापारी अमन ने बताया कि खील बताशे का काम उनकी पीढि़यों से चलता आ रहा है। वह खुद छह साल से यह काम कर रहे है। पहले की अपेक्षा पिछले कुछ सालों से खील बताशे के काम में काफी मंदी आई है। दुकानदार विशाल ने बताया कि खील बताशे और खिलौने अब लोग पहले से काफी कम मात्रा में खरीदते है। पहले इसकी ब्रिकी काफी होती थी। लेकिन अब काफी कम मात्रा में इन्हें खरीदा जाता है।

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