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Dehradun News: पलायन पर आधारित जाैनसारी गीत ''बाठा नाना'' की बढ़ रही दीवानगी, सात लाख से अधिक लोगों ने देखा
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ब्लॉक क्षेत्र के जाड़ी गांव निवासी लोक कलाकार जीत सिंह चौहान की रचित जौनसारी गीत इन दिनों यूट्यूब पर धमाल मचा रहा है। पलायन पर आधारित इस गीत को देखने वालों की संख्या एक माह में ही सात लाख से अधिक हो चुकी है। बता दें जीत सिंह चौहान भारतीय स्टेट बैंक रूद्रप्रयाग में बतौर शाखा प्रबंधक कार्यरत हैं।
उन्होंने गीत में मुख्य किरदार के रूप में ‘बाठा नाना’ की भूमिका निभाई है। इसके साथ ही परिमा राणा और दक्ष चौहान के साथ स्वर भी दिए हैं। लोक कलाकार जीत सिंह चौहान ने बताया कि नौकरी के लिए शहर गया बेटा कई साल बीत जाने के बाद भी माता-पिता से मिलने गांव नहीं आता है। इस पर पिता स्वयं ही बेटे से मिलने की इच्छा जाहिर करता है और पत्नी को बताकर शहर चला जाता है। उन्होंने बताया कि गीत के माध्यम से संदेश दिया गया है कि रोजगार के लिए शहर गए लोगों को अपने माता-पिता का हालचाल जानने गांव जरूर आना चाहिए। बताया कि वह विलुप्त हो रही जौनसारी लोक संस्कृति को बचाने के लिए कार्य कर रहे हैं। समय-समय पर लोकगीतों के माध्यम से उन्हें जीवित रखने का प्रयास करते हैं। बताया कि वह लोक संस्कृति के लिए 2005 से कार्य कर रहे हैं। यह उनकी 35वीं रचना है।
उन्होंने बताया कि पौराणिक सांचा विद्या पर आधारित भद्दू मामा पंडिता गीत के सभी तीनों भागों को लोग बहुत पसंद कर रहे हैं। बताया कि गीत में भद्दू मामा के किरदार की भूमिका को निभाने के बाद अब उन्हें अधिकतर लोग भद्दू मामा के नाम से पुकारते हैं। संवाद
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उन्होंने गीत में मुख्य किरदार के रूप में ‘बाठा नाना’ की भूमिका निभाई है। इसके साथ ही परिमा राणा और दक्ष चौहान के साथ स्वर भी दिए हैं। लोक कलाकार जीत सिंह चौहान ने बताया कि नौकरी के लिए शहर गया बेटा कई साल बीत जाने के बाद भी माता-पिता से मिलने गांव नहीं आता है। इस पर पिता स्वयं ही बेटे से मिलने की इच्छा जाहिर करता है और पत्नी को बताकर शहर चला जाता है। उन्होंने बताया कि गीत के माध्यम से संदेश दिया गया है कि रोजगार के लिए शहर गए लोगों को अपने माता-पिता का हालचाल जानने गांव जरूर आना चाहिए। बताया कि वह विलुप्त हो रही जौनसारी लोक संस्कृति को बचाने के लिए कार्य कर रहे हैं। समय-समय पर लोकगीतों के माध्यम से उन्हें जीवित रखने का प्रयास करते हैं। बताया कि वह लोक संस्कृति के लिए 2005 से कार्य कर रहे हैं। यह उनकी 35वीं रचना है।
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उन्होंने बताया कि पौराणिक सांचा विद्या पर आधारित भद्दू मामा पंडिता गीत के सभी तीनों भागों को लोग बहुत पसंद कर रहे हैं। बताया कि गीत में भद्दू मामा के किरदार की भूमिका को निभाने के बाद अब उन्हें अधिकतर लोग भद्दू मामा के नाम से पुकारते हैं। संवाद
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