फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   counterfeit drugs business fake medicines is spreading in Devbhoomi Uttarakhand Crime news

Dehradun News: देवभूमि में पैर पसार रहा नकली दवाओं का धंधा, ले रहा संगठित अपराध का रूप

Sat, 07 Dec 2024 05:17 PM IST
देहरादून ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Sat, 07 Dec 2024 05:17 PM IST
विज्ञापन
counterfeit drugs business fake medicines is spreading in Devbhoomi Uttarakhand Crime news
दवाएं - फोटो : Freepik.com

यही नहीं वर्ष 2021 में रुड़की के पास एक फैक्टरी से करोड़ों रुपये का कच्चा माल भी बरामद किया था। सेहत से खिलवाड़ करने वाले ये नकली दवाओं के सौदागर बेहद सफाई से काम करते हैं। माल भी इस तरह से सप्लाई किया जाता है, जिससे ये जीएसटी के दायरे में भी न आएं।

विज्ञापन


बीते तीन साल की बात करें तो राज्य में नकली दवाएं बनाने के आरोप में 18 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस और प्रशासन सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई तो कर रहा है, लेकिन निगरानी के लिए जिम्मेदार विभाग के पास इतने साजों सामान व संसाधन नहीं, जिससे इस धंधे पर अंकुश लगाया जा सके।
विज्ञापन


40 मजदूरों को लगाकर किया जा रहा था काम
बीते वर्षों की बात करें तो नकली दवाओं का गढ़ हरिद्वार के आसपास के औद्योगिक क्षेत्र रहे हैं। यहां दशकों पहले बंद हो चुकी कुछ फैक्टरियों को नकली दवाओं के सौदागरों ने अपना ठिकाना बनाया था। भगवानपुर, रुड़की, झबरेड़ा, मंगलौर ये सब वे इलाके हैं, जो कई बार सुर्खियों में रहे हैं। पिछले साल रुड़की क्षेत्र में पकड़ी गई फैक्टरी में बाकायदा 40 मजदूरों को लगाकर काम किया जा रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


देवभूमि में नकली दवाओं का धंधा लगातार पैर पसार रहा है। यहां अब यह एक संगठित अपराध का रूप भी लेने लगा है। बीते तीन सालों में उत्तराखंड में दर्जनभर से ज्यादा ऐसी फैक्टरियां पकड़ी गईं जहां बिना वैध लाइसेंस के नकली दवाएं बन रही थीं। कई मामले ऐसे भी सामने आए जहां पर सामान्य दवाएं नहीं, बल्कि जीवन रक्षक दवाएं भी चंद रुपयों के साल्ट से तैयार की जा रही थीं।

 हरिद्वार क्षेत्र में सबसे अधिक कार्रवाई, बंद पड़ी फैक्टरियों में बन रहा ठिकाना
तीन साल पहले एसटीएफ ने रुड़की क्षेत्र की फैक्टरी पर छापा मारकर करोड़ों रुपये की दवाएं पकड़ी थीं। जांच में पता चला कि यहां से दवाओं की सप्लाई मुंबई तक हो रही थी। चौंकाने वाला खुलासा तो उस वक्त हुआ जब यह पता चला कि ये लोग इन दवाओं को कुरियर से भेजते थे। ताकि, ये टैक्स के दायरे में भी न आएं। इसी तरह से पिछले साल देहरादून में एक नामी कंपनी के नाम से दवाएं बनाई जा रही थीं। तीन लोग जब गिरफ्तार हुए तो पता चला कि इनकी एक महीने की कमाई ही 40 लाख रुपये थी।

ये भी पढ़ें...Uttarakhand News: लद्दाख के बाद अब ओएनजीसी उत्तराखंड में भू-तापीय ऊर्जा से बनाएगा बिजली, मंथन जारी

कुरियर से भी भेजते थे दवाएं

मानकों से कम कर्मचारी हैं निगरानी वाले विभाग में कहने को 200 मेडिकल स्टोर और 50 फार्मा कंपनियों पर एक औषधि निरीक्षक का मानक है। राज्य में छह वरिष्ठ औषधि निरीक्षक और 33 औषधि निरीक्षक के पद स्वीकृत हैं। मुख्यालय, देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में पांच-पांच, नैनीताल में तीन, पौड़ी में दो और बाकी जिलों में एक-एक औषधि निरीक्षक होना चाहिए। पर धरातल पर स्थिति अत्यंत बुरी है। ऐसे में नशीली और नकली दवा के धंधेबाजों के हौसले बुलंद हैं।I

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed