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Dehradun News: आयु सीमा बढ़ाई फिर भी आयुर्वेद कार्सों की सीटें नहीं भर पाईं
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-इस बार खाली रह गईं आधी सीटें, 1600 सीटों पर हुआ दाखिला
-सरकार ने आयु सीमा को 25 से बढ़ाकर किया था 42 वर्ष
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। भारतीय चिकित्सा परिषद से संचालित आयुर्वेद कोर्सों में प्रवेश के लिए आयु सीमा बढ़ाने के बावजूद आधी सीटें खाली रह गईं। दूसरे चरण की काउंसलिंग के बाद 1600 सीटों पर छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया है।
प्रदेश में भारतीय चिकित्सा परिषद से मान्यता प्राप्त 26 पैरामेडिकल कॉलेज संचालित हैं। इन कॉलेजों में आयुर्वेद फार्मासिस्ट, नर्सिंग, पंचकर्म सहायक, टेक्नीशियन, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सहायक कोर्सों में कुल 3200 सीटें निर्धारित हैं। पूर्व में आयुर्वेद कोर्स शैक्षणिक अर्हता में आयु सीमा 17 से 25 वर्ष निर्धारित थीं। जबकि दूसरे राज्यों में अधिकतम आयु सीमा का कोई प्रावधान नहीं था। आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए भारतीय चिकित्सा परिषद के आग्रह पर प्रदेश सरकार ने आयु सीमा को 25 वर्ष से बढ़ाकर 42 वर्ष किया था।
सरकार के फैसले के बाद भारतीय चिकित्सा परिषद ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू की। पहले चरण की काउंसलिंग में एक हजार सीटों पर प्रवेश दिया गया। जबकि दूसरे चरण की काउंसलिंग में छह सौ सीटों पर ही प्रवेश हो पाए। शेष आधी सीटें खाली रह गईं।
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भारतीय चिकित्सा परिषद की रजिस्ट्रार नर्वदा का कहना है कि दूसरे चरण की काउंसलिंग पूरी हो चुकी है। इस बार 1600 सीटों पर प्रवेश दिया गया, जो पिछले वर्ष से अधिक है। योग व पंचकर्म कोर्स में स्वरोजगार की ज्यादा संभावना है। परिषद की ओर नए शैक्षणिक सत्र के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।
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-सरकार ने आयु सीमा को 25 से बढ़ाकर किया था 42 वर्ष
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। भारतीय चिकित्सा परिषद से संचालित आयुर्वेद कोर्सों में प्रवेश के लिए आयु सीमा बढ़ाने के बावजूद आधी सीटें खाली रह गईं। दूसरे चरण की काउंसलिंग के बाद 1600 सीटों पर छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया है।
प्रदेश में भारतीय चिकित्सा परिषद से मान्यता प्राप्त 26 पैरामेडिकल कॉलेज संचालित हैं। इन कॉलेजों में आयुर्वेद फार्मासिस्ट, नर्सिंग, पंचकर्म सहायक, टेक्नीशियन, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सहायक कोर्सों में कुल 3200 सीटें निर्धारित हैं। पूर्व में आयुर्वेद कोर्स शैक्षणिक अर्हता में आयु सीमा 17 से 25 वर्ष निर्धारित थीं। जबकि दूसरे राज्यों में अधिकतम आयु सीमा का कोई प्रावधान नहीं था। आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए भारतीय चिकित्सा परिषद के आग्रह पर प्रदेश सरकार ने आयु सीमा को 25 वर्ष से बढ़ाकर 42 वर्ष किया था।
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सरकार के फैसले के बाद भारतीय चिकित्सा परिषद ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू की। पहले चरण की काउंसलिंग में एक हजार सीटों पर प्रवेश दिया गया। जबकि दूसरे चरण की काउंसलिंग में छह सौ सीटों पर ही प्रवेश हो पाए। शेष आधी सीटें खाली रह गईं।
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भारतीय चिकित्सा परिषद की रजिस्ट्रार नर्वदा का कहना है कि दूसरे चरण की काउंसलिंग पूरी हो चुकी है। इस बार 1600 सीटों पर प्रवेश दिया गया, जो पिछले वर्ष से अधिक है। योग व पंचकर्म कोर्स में स्वरोजगार की ज्यादा संभावना है। परिषद की ओर नए शैक्षणिक सत्र के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।