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अब ‘ऊंचे’ स्कूल रोकेंगे गुरुजी का ‘कद’

Tue, 19 Aug 2014 10:10 AM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 19 Aug 2014 10:10 AM IST
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teacher promotion process in uttarakhand

यूं ही चलता रहा तो उत्तराखंड के 12 हजार से अधिक

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प्राथमिक विद्यालयों में तैनात 22 हजार शिक्षक प्राइमरी स्कूल से ही रिटायर हो जाएंगे।

1052 स्कूल हाईस्कूल के तौर पर अपग्रेड

दरअसल, प्रदेश में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के तहत जूनियर हाईस्कूलों को अपग्रेड किया जा रहा है। अब तक 1052 स्कूल हाईस्कूल के तौर पर अपग्रेड हो चुके हैं।

उच्चीकृत किए जाने वाले स्कूलों के लिए एक प्रिंसिपल और पांच शिक्षकों सहित अलग से पूरे स्टाफ के पद स्वीकृत हो रहे हैं। इससे प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों के लिए प्रमोशन के अवसर समाप्त हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार कई अन्य स्कूलों के उच्चीकरण का प्रस्ताव विभाग के पास है। ऐसे में आने वाले समय में प्राइमरी स्कूलों के शिक्षक प्राइमरी से ऊपर नहीं बढ़ सकेंगे।

उन्हें न तो प्राइमरी में हेडमास्टर बनने का मौका मिलेगा, न ही जूनियर हाईस्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर कद बढ़ाने का अवसर।

यह है उच्चीकृत स्कूलों की व्यवस्था
रमसा के तहत उच्चीकृत किए जाने वाले स्कूलों में एक से पांचवीं तक प्राइमरी स्कूलों के शिक्षक तैनात किए जाएंगे, जबकि छह से दसवीं तक एलटी सहायक अध्यापक।

मानकों के अनुसार प्राइमरी में पढ़ा रहे शिक्षक छठी और इससे ऊपर की कक्षाएं नहीं पढ़ा सकेंगे। जबकि पूरा स्कूल एक से कक्षा दस तक होने के कारण यहां प्राइमरी स्कूल में हेडमास्टर की तैनाती की कोई व्यवस्था भी नहीं है।

जूनियर हाईस्कूल की व्यवस्था स्वत: समाप्त हो जाएगी, लिहाजा यहां तो कोई अवसर मिलने की कोई संभावना ही नहीं रहेगी।

आरटीई का नियम भी बना बाधा

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के मुताबिक प्राथमिक स्कूलों में डेढ़ सौ छात्रों पर एक हेड मास्टर होगा, जबकि जूनियर में सौ छात्रों पर।

बच्चों की संख्या इससे कम हुई तो संबंधित स्कूलों में हेडमास्टर की तैनाती नहीं करने का प्रावधान है। लेकिन प्रदेश में दोनों तरह के स्कूलों में छात्र संख्या तेजी से घट रही है।

दो साल में ही 58 हजार से अधिक छात्र सरकारी स्कूलों से निकल चुके हैं। वर्ष 2013 में प्राथमिक स्कूलों में पांच लाख 53 हजार छात्र थे, जो अब घटकर पांच लाख 17 हजार रह गए हैं।

वहीं जूनियर के छात्रों की संख्या तीन लाख 64 हजार से घटकर तीन लाख 42 हजार रह गई है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मामले में एक सप्ताह के भीतर समस्या का कोई हल निकालने के निर्देश दिए हैं। मामले का शीघ्र ही कोई समाधान निकाल लिया जाएगा।
- राकेश कुंवर, शिक्षा निदेशक

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