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...तो क्या विधायकों के हाथ में हैं हरीश रावत की 'डोर'
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 05 Mar 2014 09:36 AM IST
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विधायकों के दबाव के चलते रावत सरकार ने उत्तराखंड के दो अधिकारियों पर लगे आरोपों और दंड की सिफारिशों को नजरअंदाज कर उनकी सजा हल्की कर दी है।
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माफी मिलने के साथ ही पोस्टिंग भी
करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन ठिकाने लगाने का दंड मात्र एक वेतन वृद्धि रोकना ही तय हुआ। वृहद दंड की सिफारिश के बावजूद दो अफसरों बीएस चलाल व एनएस नगन्याल को माफी मिलने के साथ ही पोस्टिंग भी दे दी गई।
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इस फैसले से उन दूसरे अफसरों को भी राहत का रास्ता खुल जाएगा जिनके खिलाफ पहले से ही जांच चल रही है। बताते हैं कि कुमाऊं के कुछ कांग्रेसी विधायकों ने अफसरों को बख्शने का दबाव बनाया था जिसके बाद ऐसा फैसला लिया गया।
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सरकारी जमीन को खुर्द बुर्द करने के आरोप में ये अफसर विजय बहुगुणा सरकार के दौरान जांच में दोषी पाए गए थे। दोनों पीसीएस अफसर एनएस नगन्याल व बीएस चलाल के खिलाफ जांच पूरी हुई और कार्मिक विभाग ने वृहद दंड की सिफारिश भी की थी।
रिवर्ट करने की सिफारिश की गई थी
चलाल के लिए प्रतिकूल प्रविष्टि व स्थाई रूप से वेतन वृद्धि रोकने और नगन्याल को रिवर्ट करने की सिफारिश की गई थी।
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सूत्रों की मानें तो वर्तमान सरकार ने पहले तो मंजूरी दे दी लेकिन कांग्रेस के कुछ विधायकों के दबाव में फाइल वापस मंगाकर केवल एक वेतन वृद्धि रोकने का दंड तय किया गया।
सैकड़ों करोड़ रुपए की भूमि खुर्द बुर्द करने वाले अफसरों को केवल एक इन्क्रीमेंट रोकने की सजा से पूरा सरकारी सिस्टम हैरत में है।
ये होता है वृहद दंड
1. प्रतिकूल प्रविष्टि, 2. स्थाई रूप से वेतनवृद्धि रोकना, 3. रिवर्ट करना, 4. सेवा समाप्त करना
ये थे मामले
एनएस नगन्याल
बहाल होकर चम्पावत के एसडीएम बने
जांच अधिकारी : आईएएस चंद्रशेखर भट्ट
अप्रैल 2013 को बतौर एसडीएम बाजपुर नगन्याल ने रुद्रपुर शहर में 147 बीघा नजूल की कृषि योग्य बंजर भूमि 12 निजी खातेदारों को दे दी।
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नजूल की भूमि का निस्तारण जैडए एलआर एक्ट की धारा 229-बी के तहत हुआ। जून माह में शुरू हुई जांच में सभी आरोप साबित हुए।
बीएस चलाल
बहाल होकर रुड़की नगर निगम के एमएनए बने
जांच अधिकारी : अवनेंद्र सिंह न्याल, मंडलायुक्त कुमाऊं
दिसम्बर 2011 में बतौर एसडीएम खटीमा चलाल ने तीन हेक्टेयर वन भूमि पर 55 लोगों को पट्टे दिए। यह भूमि 1966 में वन भूमि घोषित हुई थी।
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पट्टाधारकों में केवल चौदह लोग ही संबंधित गांव के थे। शेष 41 लोग पिथौरागढ़, अल्मोड़ा व चम्पावत के थे। जांच अधिकारी की रिपोर्ट केआधार पर कार्मिक विभाग ने चलाल के लिए भी वृहद दंड की संस्तुति की।