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फ्री ट्यूशन पढ़ाकर गांव के बच्चों को बनाया डॉक्टर, इंजीनियर

Thu, 10 Mar 2016 02:01 PM IST
सूरत सिंह रावत/ अमर उजाला, उत्तरकाशी
सूरत सिंह रावत/ अमर उजाला, उत्तरकाशी Updated Thu, 10 Mar 2016 02:01 PM IST
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swami premanand give free education
स्वामी प्रेमानंद - फोटो : file photo

उत्कल विश्वविद्यालय भुवनेश्वर उड़ीसा से कृषि में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद संन्यास लेकर उत्तराखंड आए स्वामी प्रेमानंद के सिर पर समाजसेवा का ऐसा जुनून चढ़ा कि 77 साल की उम्र पार करने के बाद भी वे थकते नजर नहीं आते। 

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उत्तरकाशी के गणेशपुर गांव में भागीरथी के किनारे अपना ठिकाना बनाकर मुफलिसी के दिनों में 1964 से बीस सालों तक आसपास के गांव के बच्चों को अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और संस्कृत का निशुल्क ट्यूशन पढ़ाया। उसके बाद से अभी तक वे हर साल डेढ़ सौ गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्चा वहन कर रहे हैं। स्वामी प्रेमानंद की मदद का ही नतीजा है कि गणेशपुर तथा आसपास के गांवों के कई युवा डाक्टर, इंजीनियर तथा दूसरी नौकरियों में हैं।
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स्वामी प्रेमानंद ने आश्रम में ही एक अस्पताल खोलकर निशुल्क चिकित्सा सेवा दे रहे हैं। अस्पताल में कुशल डाक्टरों की ओर से मरीजों का निशुल्क एलोपैथिक एवं आयुर्वेदिक उपचार किया जाता है। मरीजों के लिए दोपहर में निशुल्क भोजन की व्यवस्था भी रहती है। अस्पताल की दो एंबुलेंस में से एक बार्सू, रैथल, थलन, किशनपुर, गजोली, संगमचट्टी क्षेत्र में निशुल्क कैंप लगाकर चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराती है, जबकि दूसरी गणेशपुर में मरीजों की सेवा के लिए हमेशा तैयार रहती है।
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स्वामी जी की मदद से संवरा जीवन
गणेशपुर निवासी सतीश सेमवाल बताते हैं कि नौ साल की उम्र में मेरी मां का देहांत हुआ। भाई बाढ़ में बह गया था। घर की स्थिति देखकर पिता विक्षिप्त हो गए थे। ऐसे में स्वामी प्रेमानंद जी ने मेरी परवरिश करने के साथ ही मुझे पढ़ाया भी। आज उन्हीं की मदद से मेरा बेटा भी आयुर्वेदिक डाक्टर की पढ़ाई कर रहा है। गणेशपुर के विद्यानंद ने बताया कि वे स्वामी जी की मदद से ही पढ़ाई कर पटवारी बने हैं। अब मेरी बेटी भी डाक्टरी कर रही है। स्वामी जी ने भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान भी लोगों की भरपूर मदद की।


स्वामी प्रेमानंद जी बीते 52 सालों से क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समाजसेवा की अनूठी मिसाल बने हुए हैं। उनकी मदद से गणेशपुर एवं आसपास के गांवों के कई लोग आत्मनिर्भर बनकर जीवन गुजार रहे हैं। स्वामी जी एक अच्छे शिक्षक के साथ ही मार्गदर्शक भी हैं।
- पुष्पा चौहान, ग्राम प्रधान गणेशपुर

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