Suspense: सियासी हलकों में तैर रहा सवाल, सरकार डिप्टी स्पीकर बनाएगी या अधिष्ठाता मंडल से काम चलाएगी?
विधानसभा का बजट सत्र 14 जून से शुरू हो रहा है। इसके साथ ही विधानसभा उपाध्यक्ष को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। धामी सरकार किसी वरिष्ठ विधायक को उपाध्यक्ष बनाएगी या नहीं। इस पर सस्पेंस बना हुआ है। बता दें कि राज्य गठन के समय 2000 से 2002 तक भाजपा की अंतरिम सरकार में उपाध्यक्ष नहीं बनाया गया था।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार विधानसभा उपाध्यक्ष का निर्वाचन कराएगी या अधिष्ठाता मंडल से ही काम चलाएगी। सियासी हलकों में यह सवाल तैर रहा है। फिलहाल, विधानसभा उपाध्यक्ष पद को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। हालांकि पहले भी कांग्रेस और भाजपा की सरकारों में उपाध्यक्ष नहीं बनाया गया था।
सदन में विधानसभा अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष कार्यवाही संचालित करने के अधिकृत होते हैं। विधानसभा का बजट सत्र 14 जून से शुरू हो रहा है। इसके साथ ही विधानसभा उपाध्यक्ष को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। धामी सरकार किसी वरिष्ठ विधायक को उपाध्यक्ष बनाएगी या नहीं। इस पर सस्पेंस बना हुआ है। बता दें कि राज्य गठन के समय 2000 से 2002 तक भाजपा की अंतरिम सरकार में उपाध्यक्ष नहीं बनाया गया था।
उस समय प्रकाश पंत विधानसभा अध्यक्ष थे। इसके बाद 2002 से 2007 तक कांग्रेस सरकार में भी उपाध्यक्ष नहीं बनाया। जबकि यशपाल आर्य विधानसभा अध्यक्ष थे। 2007 से 2012 में भाजपा की सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे हरबंस कपूर के कार्यकाल में विजय बड़थ्वाल विधानसभा उपाध्यक्ष रहीं।
2012 से 2017 में कांग्रेस सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे गोविंद सिंह कुंजवाल के कार्यकाल में अनुसूया प्रसाद मैखुरी को उपाध्यक्ष बनाया गया था। जबकि 2017 से 2022 तक भाजपा की सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में रघुनाथ सिंह चौहान उपाध्यक्ष रहे।
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चर्चा है कि सरकार उपाध्यक्ष नहीं बनाती है तो सदन अधिष्ठाता मंडल बनाया जा सकता है। जिसमें पार्टी के तीन से चार वरिष्ठ विधायकों को शामिल किया जाता है। सदन की कार्यवाही संचालित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष अपनी अनुपस्थिति में अधिष्ठाता मंडल में शामिल किसी एक वरिष्ठ विधायक को बुला सकती हैं।