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आयुर्वेद में हर मर्ज का इलाज, एनेस्थिसिया ऐलोपैथी चिकित्सा का अंग नहीं - आयुर्वेद विवि कुलपति डॉ. सुनील जोशी

Sat, 12 Dec 2020 05:05 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 12 Dec 2020 05:05 PM IST
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surgery in ayurveda uttarakhand news : Treatment of every disease in  Ayurveda
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

आयुर्वेद डॉक्टरों को सर्जरी की अनुमति देने का विरोध कर रही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सवालों पर आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से हर मर्ज का इलाज हो सकता है। शल्य कर्म की तरह एनेस्थिसिया भी आयुर्वेद की देन है।

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एनेस्थिसिया ऐलोपैथी चिकित्सा का अंग नहीं है। यह एक विशिष्ट विधि है। इसका इस्तेमाल आयुर्वेद डॉक्टर भी कर सकते हैं। इसमें किसी तरह की विधिक बाध्यता नहीं है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जैसे संस्थान में ऐनेस्थिसिया का अलग से विभाग है और आयुर्वेद के शल्य चिकित्सक पहले से इसका इस्तेमाल करते आए हैं। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ. सुनील जोशी ने ऐलोपैथी डॉक्टरों के सवालों का जवाब दिया है। 
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-किसी भी सर्जरी में एनेस्थिसिया कैसे देंगे?
जवाब : डॉ. सुनील जोशी ने कहा कि एनेस्थिसिया आपरेशन के दौरान रोगी को दर्द न हो इसकी एक विधि है। आयुर्वेद में पहले अफीम और सुरा को एनेस्थिसिया में प्रयोग किया जाता है। इसे आयुष चिकित्सा में वेदना निग्रह उपाय कहा जाता है। इस विधि को वर्तमान में एनेस्थिसिया कहा जा रहा है।

इसमें भी अफीम का ही योग है। एनेस्थिसिया ऐलोपैथी चिकित्सा का अंग नहीं है। ये एक विशिष्ट विधि है। जिसका इस्तेमाल आयुर्वेद डॉक्टर कर सकता है। इसमें विधि बाध्यता नहीं है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जैसे एनेस्थिसिया का विभाग है। पहले से आयुर्वेद डॉक्टर विभिन्न बीमारियों की सर्जरी में एनेस्थिसिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। 

एंटीबायोटिक्स का उपयोग सर्जरी में नहीं किया जाता

-कैटरेक्ट के ऑपरेशन में इंफेक्शन होगा तो क्या दवा देंगे?
जवाब : एंटीबायोटिक्स का उपयोग सर्जरी में नहीं किया जाता है। संक्रमणहीन स्थिति में रोगी की सर्जरी की जाती है। विश्व में कहीं भी रोगी की सर्जरी की जाती है तो संक्रमणहीन स्थिति में होती है। आयुर्वेद से फिशूला व भंगदर का इलाज करते हैं। ये गुदा में होने वाली बीमारी है। घाव से मवाद निकलता है। क्षार सूत्र विधि से सर्जरी की जाती है। नीम, गिलोय शतपण समेत अन्य कई दवाईयां हैं, जो एंटीबायोटिक्स का काम करती है। 

-एपेंडिक्स का ऑपरेशन होगा तो क्या दवा देंगे?
जवाब : आयुष चिकित्सा में एपेंडिक्स का इलाज भी है। इसमें रोगी का छह दिन का शल्य कर्म किया जाता है। एपेंडिक्स के इलाज में आरोग्य वर्धनी दवा का उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही अन्य कई तरह की औषधि हैं। 

-ईएनटी में साइनस का ऑपरेशन में क्या दवा देंगे?
जवाब : आयुर्वेद में ईएनटी को शाला तंत्र कहा जाता है। इसमें नाक, कान गला, दांत व आंख से संबंधित बीमारियों का इलाज होता है। साइनस का इलाज सिरोविरेचन की विधि से किया जाता है। तेलों को नाक में डाला जाता है व भाप दी जाती है। रक्त मोक्षण किया जाता है। 50-60 साल से ही आपरेशन हो रहे हैं। इससे पहले महाभारत जैसे बड़े-बड़े युद्ध हुए हैं। इन युद्धों में घायल सैनिकों का इलाज किया जाता था। 

-सिजेरियन डिलीवरी के लिए एनेस्थिसिया की कौन सी दवा देंगे?
जवाब : सिजेरियन सामान्य रूप से प्रसव करने की विधि नहीं है। कोरोना काल में देश में 17 लाख प्रसव हुए हैं। इसमें 96 प्रतिशत सामान्य प्रसव से हुए हैं। लेकिन वर्तमान में हर किसी के सिजेरियन किए जा रहे हैं। सिजेरियन तभी किया जाता है, जब गर्भवती महिला की जान को खतरा या गर्भ में पल रहे बच्चे की गंभीर स्थिति है। आयुर्वेद चिकित्सा से सिजेरियन हो सकते हैं। 

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