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उत्तराखंड : आईएमए से जुड़े डॉक्टरों ने 12 घंटे बंद रखी ओपीडी, नीति बनाने वालों पर भी उठाए सवाल

Sat, 12 Dec 2020 05:06 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 12 Dec 2020 05:06 PM IST
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Uttarakhand Doctors Strike News Today: Doctors strike today, doctors with allopathy and Ayurveda face to face
उत्तराखंड में डॉक्टरों की हड़ताल: - फोटो : amar ujala

आयुर्वेद डॉक्टरों को सर्जरी का अधिकार दिए जाने के फैसले के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से जुड़े डॉक्टरों ने शुक्रवार को 12 घंटे ओपीडी बंद रखी। हालांकि सभी प्रमुख प्राइवेट और सरकारी अस्पताल खुले होने के कारण मरीजों को बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं हुई।

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दूसरी ओर, आयुर्वेद डॉक्टरों ने कई जगह मुफ्त जांच की। आयुर्वेद विवि में डॉक्टरों ने दो घंटे अतिरिक्त ड्यूटी भी की। आईएमए से जुड़े कई डॉक्टरों ने भी शाम छह बजे के बाद ओपीडी में मरीज देखे। आईएमए डॉक्टरों ने सुबह छह से शाम छह बजे तक अपने क्लीनिक व अस्पताल में ओपीडी बंद रखी। आईएमए सचिव रूपा हंसपाल ने कहा कि एलोपैथ का अपना मॉर्डन सिस्टम ऑफ मेडिसिन एंड सर्जरी है।
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किसी को भी इस सिस्टम में अतिक्रमण करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने किसी तरह का धरना-प्रदर्शन न करने का फैसला लिया है। शाम छह बजे बाद कुछ डॉक्टरों ने ओपीडी खोली और मरीजों की जांच की। दूसरी ओर, आयुर्वेद डॉक्टरों ने कई जगह ओपीडी में मुफ्त जांच की।

आयुर्वेद विवि में उन्होंने दो घंटे अतिरिक्त ड्यूटी भी की। आयुर्वेद विवि के कुलपति प्रो. सुनील जोशी ने बताया कि सभी कर्मियों को दो घंटे अतिरिक्त काम करने को कहा गया, ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। नेशनल इंटिग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (निमा) से जुड़े डॉक्टरों ने फैसले के समर्थन में गुलाबी पट्टी बांधकर काम किया। उन्होंने कहा कि फैसले से इंटिग्रेटेड हेल्थ सिस्टम मजबूत होगा। 

खुले रहे सभी प्रमुख अस्पताल

शहर के सभी सरकारी और प्रमुख प्राइवेट अस्पताल शुक्रवार को खुले रहे। मैक्स, सिनर्जी, श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल, आरोग्यधाम, हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट अस्पतालों में ओपीडी निर्धारित समय तक खुली रही। वहीं, दून, दून महिला, गांधी शताब्दी, कोरोनेशन, रायपुर और प्रेमनगर समेत सभी सरकारी अस्पताल भी खुले रहे। इसके चलते मरीजों को बहुत ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ा। आईएमए से जुड़े अस्पतालों व क्लीनिक में भी इमरजेंसी और भर्ती मरीजों को इलाज की सुविधा मिलती रही। 

इएमए ने लगाया निशुल्क शिविर

 इलेक्ट्रोहोम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन (इएमए) ने पटेलनगर स्थित गुरुद्वारा हरिकिशन साहिब के प्रांगण में एक दिवसीय निशुल्क दवा व मास्क और ऑक्सीजन लेवल जांच शिविर लगाया। 

सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ दिखाई दी

वहीं निजी अस्पतालों के डॉक्टरों के हड़ताल पर होने से सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ दिखाई दी। रुद्रपुर जिला अस्पताल में शुक्रवार को मरीजों की भीड़ देखने को मिली। बागेश्वर में हड़ताल का कोई असर नहीं दिखाई दिया। यहां डॉक्टर हड़ताल पर नहीं गए। ओपीडी सामान्य रूप से चली। हल्द्वानी में निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद रखी गई। जिसके बाद मरीज सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे।

‘एलोपैथ और आयुर्वेद की खिचड़ी न बनाए सरकार’

आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी का अधिकार दिए जाने के फैसले से नाराज इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने नीति बनाने वालों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नीति बनाने वाले खुद इन डॉक्टरों से अपनी सर्जरी नहीं कराएंगे। सरकार को एलोपैथ और आयुर्वेद की खिचड़ी बनाने से बचना चाहिए। इसके बजाय आयुर्वेद का सिस्टम ऑफ मेडिसिन और सर्जरी विकसित किया जाना चाहिए। जब दवाई एलोपैथिक इस्तेमाल की जाएगी तो पद्धति आयुर्वेदिक कैसे हुई।

आईएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. डीडी चौधरी ने कहा कि आयुर्वेद अपने सिस्टम ऑफ सर्जरी को विकसित करे। आयुर्वेद हमारे देश का सिस्टम है। हम उसका पूरा सम्मान करते हैं। लेकिन हमारी दवाओं को आयुर्वेद के नाम पर इस्तेमाल किया जाए, यह हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।

हम अपने सिस्टम ऑफ मेडिसिन और सर्जरी में आयुर्वेद का कुछ भी इस्तेमाल नहीं करते हैं। लोगों के पास विकल्प होना चाहिए कि वह प्योर मॉडर्न सिस्टम ऑफ सर्जरी और प्योर आयुर्वेदिक सर्जरी में से क्या चुनना चाहते हैं। दोनों का घालमेल नहीं चल सकता। गरीब आदमी है तो उसे आप उसके हाल पर छोड़ दो।

खुद आयुर्वेद का डॉक्टर भी अपना ऑपरेशन करवाने के लिए एलोपैथिक डॉक्टर के पास आएगा। वह खुद आयुर्वेदिक डॉक्टर से ऑपरेशन नहीं कराएगा। यहां तक की नीति तैयार करने वाले भी हार्ट अटैक आने, किडनी फेल होने या किसी अन्य बीमारी की स्थिति में हमारे पास ही आएंगे। वे खुद आयुर्वेदिक डॉक्टर से सर्जरी नहीं करवाएंगे। तो ऐसी दोहरी नीति क्यों? इलाज का सिस्टम भले ही अलग-अलग हो लेकिन सबको एक जैसे पैटर्न पर ही इलाज मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार खुद कहती है कि पहाड़ों और दुर्गम में क्वालीफाइड डॉक्टर नहीं जा रहे हैं। इसलिए आयुर्वेदिक वालों को भेजा जा रहा है। इसका मतलब साफ है कि सरकार खुद भी इन्हें क्वालिफाइड नहीं मानती है। वैसे भी अगर अस्पतालों में डॉक्टर की कमी है तो मेडिकल कॉलेज में सीट बढ़ाई जानी चाहिए। लेकिन इस तरह के अव्यावहारिक फैसले नहीं होने चाहिए। सरकार आजादी के इतने साल बाद भी डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं कर पाई है तो ये उनकी कमी है। अपनी कमी छुपाने के लिए हम पर अव्यावहारिक फैसला क्यों थोपा जा रहा है?

आईएमए ने मांगे सवालों के जवाब

आईएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. डीडी चौधरी ने कहा कि आयुर्वेद का सिस्टम ऑफ मेडिसिन और सर्जरी विकसित होना चाहिए। लेकिन जो बातें अभी की जा रही है, उन्हें किसी भी कीमत पर स्वीकारा नहीं जा सकता है। नीति बनाने वालों और आयुर्वेदिक डॉक्टरों को हमारी इन शंकाओं का समाधान करना चाहिए। इन सवालों के जवाब मिलेंगे तो साफ हो जाएगा कि फैसला सही है या गलत।

-किसी भी सर्जरी में एनेस्थिसिया कैसे देंगे?
-एपेंडिक्स का ऑपरेशन होगा तो क्या दवा देंगे?
-ईएनटी में साइनस का ऑपरेशन में क्या दवा देंगे?
-किसी मरीज को डायलिसिस की जरूरत हो तो क्या करेंगे? किस पद्धति से इलाज करेंगे?
-सिजेरियन डिलीवरी के लिए एनेस्थिसिया की कौन सी दवा देंगे?
-कैटरेक्ट के ऑपरेशन में इंफेक्शन होगा तो क्या दवा देंगे?

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