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तीन तलाक: कलेजे के टुकड़ों से मिलने को आज भी तरस रही एक मां, फैसला आते ही छलक पड़े आंसू

Tue, 22 Aug 2017 07:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, काशीपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, काशीपुर Updated Tue, 22 Aug 2017 07:52 PM IST
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Supreme Court decision On Teen talaq shayara bano statement

पति से तलाक का दंश झेल रही शायरा बानो सवा दो साल से अपने कलेजे के टुकड़ों से म‌िलने को आज भी तरस रही है। जैसे ही कोर्ट का फेसला आया शायरा बानो की आंखों से अपने बच्चों को याद कर आसू छलक पड़े।

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उसने बच्चों की सुपुर्दगी के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय अदालत में याचिका दायर करने का निर्देश दिया। काशीपुर फैमिली कोर्ट से विपक्षी को कई बार नोटिस जा चुके हैं, लेकिन वो आज तक हाजिर नही हुआ। मामले की अगली सुनवाई 10 अक्तूबर को होगी। 
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शायरा के रिजवान से दो बच्चे हुए। बेटा इरफान 13 साल का है और बेटी मुस्कान 11 साल की है। पति ने कागज के टुकड़े पर तलाक के तीन बोल लिखकर शायरा को अपनी जिंदगी से अलग कर दिया।
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पति से अलगाव तो शायरा पर भारी पड़ा ही, लेकिन बच्चों की ममता उसे ज्यादा सताने लगी। बच्चों को लेकर उसने कई बार रिजवान और उसके परिजनों से फोन पर बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हर बार फोन काट दिया। हारकर उसे कोर्ट की ओर रुख करना पड़ा

शायरा बानों का कहना है क‌ि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हूं और इस फैसले का समर्थन करती हूं। इस फैसले से देश की उन मुस्लिम महिलाओं में अपने अधिकार को लेकर आशा की किरन चमकी है, जिन्हें सामाजिक रूढ़िवादिता के चलते धार्मिक आडंबर के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने का अवसर नही मिल पाता था। मैं इस फैसले से उत्साहित हूं। आगे भी महिलाओं के हक में लड़ाई जारी रखूंगी। 

Supreme Court decision On Teen talaq shayara bano statement

बता दें क‌ि पति के जुल्म से टूट चुकी शायरा ने सपने में भी नही सोचा था कि वह कभी तलाक के अभिशाप से सताई गई महिलाओं के लिए नजीर बनेगी। अपने खिलाफ हुए हक-ए-जोजियत के मुकदमें में स्टे लेने के लिए शायरा सुप्रीम कोर्ट गई थी, वकील बाला जी श्रीनिवासन ने उनकी दास्तां सुनने के बाद उन्हें तीन तलाक के खिलाफ याचिका दायर करने की सलाह दी। शायरा ने श्रीनिवासन की सलाह पर अमल करते हुए इस मामले में पहली याचिका दो फरवरी 2016 में दायर की और नतीजा आज सबके सामने हैं। 

पति रिजवान के तीन तलाक के बाद शायरा ने काशीपुर के फैमिली कोर्ट में धारा 125 के तहत भरण पोषण का वाद दायर किया। अदालत से नोटिस मिलने पर पति ने उसके खिलाफ इलाहाबाद के परिवार न्यायालय में हक-ए-जोजियत का मुकदमा दर्ज करा दिया। शायरा के परिजनों ने अपने अधिवक्ता गोपाल कृष्ण एडवोकेट से संपर्क किया तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से स्टे लेने की बात कही।

शायरा इस फैसले के खिलाफ स्टे लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। वहां पर उसने अपने अधिवक्ता बालाजी श्री निवासन को अपनी दुखभरी कहानी सुनाई। अधिवक्ता ने तीन तलाक को घोर अमानवीय और असंवैधानिक मानते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की सलाह दी।

शायरा बताती है कि अधिवक्ता श्री निवासन ने उसकी ओर से याचिका दायर करने के साथ ही कानूनी सहायता उपलब्ध कराई। यह मामला मीडिया की सुर्खियां बना तो तीन तलाक को लेकर एक के बाद एक कई याचिकाएं दायर हो गई। यह मुद्दा इतना उछला कि सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई के लिए संविधान पीठ का गठन करना पड़ा। 

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