{"_id":"66afd1bf32fb6e871007ae94","slug":"subhranshu-singh-chief-marketing-officer-at-tata-motors-dehradun-news-c-5-1-drn1030-470715-2024-08-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"विकास के साथ पर्यावरण चुनौती रहेगा, पर मानवीय पहलू देखना भी जरूरी : शुभ्रांशु सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विकास के साथ पर्यावरण चुनौती रहेगा, पर मानवीय पहलू देखना भी जरूरी : शुभ्रांशु सिंह
विज्ञापन
Iअमर उजाला संवाद में टाटा मोटर्स में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर ने रखी राय, कहा, बाहरी निवेशक आएं
I
I
I
Iसरकारी निवेश की जगह निजी और बहुराष्ट्रीय निवेश से होगा लाभI
टाटा मोटर्स में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर शुभ्रांशु सिंह ने कहा कि उत्तराखंड के विकास के लिए यह जरूरी है कि बाहर से निवेशक आएं। साथ ही इसमें सरकारी निवेश कम हो और निजी सेक्टर, बहुराष्ट्रीय निजी निवेशक ज्यादा हों तो इससे फायदा होगा। कहा कि विकास और पर्यावरण सिर्फ उत्तराखंड की समस्या नहीं है बल्कि जहां-जहां प्रकृति है, वहां यह चुनौती है। जहां सड़क जाती है वहां और व्यवस्थाएं भी पहुंच जाती हैं। ऐसे में विकास को मानवीय पहलू से देखना होगा। कहा कि पैसा जोड़कर रखा जाए और इकोनॉमी में सर्कुलेट न हो तो भी बेकार है।
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में देश के विकास की बात विषय पर बोलते हुए शुभ्रांशु सिंह ने पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी यहां के काम नहीं आते, सवाल पर कहा कि उद्योग एक व्यक्ति के लिए नहीं होता। उद्योग लगाने के लिए यह देखना होगा कि कच्चा माल और उसकी आपूर्ति हो सकेगी या नहीं। उद्योगों के लिए परिवेश और बुनियादी ढांचा भी जरूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हम सड़कें इसलिए बनाते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कनेक्टिविटी रहे। खेल के मैदान और स्कूल बनने से युवाओं का फायदा होता है तो वह भी बनने चाहिए। इसी तरह सड़कें गांवों की तस्वीर बदल देती हैं। इसे मानवीय पहलू से देखना होगा।
उन्होंने कहा कि सड़कें देखकर हमें लगता है कि इससे ट्रैफिक जाम बढ़ेगा, लेकिन इससे रोजगार भी आ रहा है। कहा कि विकास के लिए जहां से भी पूंजी, तकनीक और लोग चाहिए, आपको उन्हें यहां लाना होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के विकास के लिए यह जरूरी है कि बाहर से निवेशक आएं। अंतरराष्ट्रीय निवेश होने से यह जरूरी नहीं है कि उत्पादों के लिए भारतीय राज्यों के बीच ही प्रतिस्पर्धा हो, बल्कि हो सकता है कि यहां के उत्पादों की तुलना विदेशों से भी हो सकती है। ऐसे में यह देखना होगा कि हम हैंडीक्राफ्ट जैसे ब्रांड को किस स्तर पर प्रस्तुत कर सकते हैं। यह भी देखना होगा कि इसकी बिक्री के लिए वितरण प्रणाली है या नहीं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि पूरे भारत के परिप्रेक्ष्य में देखें तो लोगों को उत्तराखंड के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। विशेषकर काॅरपोरेट और निवेश को लेकर तो बिल्कुल भी नहीं। ज्यादातर राज्य में लोग पर्यटन एवं धार्मिक यात्रा पर आते हैं। लेकिन लोगों का उत्तराखंड के प्रति लगाव जरूर है। यहां के लोग ईमानदार और मेहनती हैं। राज्य में निवेश के लिहाज से सकारात्मक और अहम है। कहा कि नया राज्य है और नए ब्रांड हैं तो धीरे-धीरे ही लोगों के जेहन में उतरेंगे। कहा कि राज्य में एक करोड़ की आबादी, 35-36 मिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है। हजारों वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल है। फिर भी अन्य पर्वतीय राज्यों से उत्तराखंड की प्रगति अच्छी है। उन्होंने कहा कि 20 साल पहले राज्य की पहचान बनना शुरू हुई। पहचान बनने में देर लगती है। उन्होंने कहा कि अच्छा और सकारात्मक यह है कि उत्तराखंड को लेकर नकारात्मक पहलू ज्यादा नहीं हैं। जब लोग यहां आकर नई चीजें देखते हैं और उसका अनुभव लेकर लौटते हैं तो उनमें एक नई धारणा का जन्म होता है।
विज्ञापन
I
I
I
Iसरकारी निवेश की जगह निजी और बहुराष्ट्रीय निवेश से होगा लाभI
टाटा मोटर्स में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर शुभ्रांशु सिंह ने कहा कि उत्तराखंड के विकास के लिए यह जरूरी है कि बाहर से निवेशक आएं। साथ ही इसमें सरकारी निवेश कम हो और निजी सेक्टर, बहुराष्ट्रीय निजी निवेशक ज्यादा हों तो इससे फायदा होगा। कहा कि विकास और पर्यावरण सिर्फ उत्तराखंड की समस्या नहीं है बल्कि जहां-जहां प्रकृति है, वहां यह चुनौती है। जहां सड़क जाती है वहां और व्यवस्थाएं भी पहुंच जाती हैं। ऐसे में विकास को मानवीय पहलू से देखना होगा। कहा कि पैसा जोड़कर रखा जाए और इकोनॉमी में सर्कुलेट न हो तो भी बेकार है।
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में देश के विकास की बात विषय पर बोलते हुए शुभ्रांशु सिंह ने पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी यहां के काम नहीं आते, सवाल पर कहा कि उद्योग एक व्यक्ति के लिए नहीं होता। उद्योग लगाने के लिए यह देखना होगा कि कच्चा माल और उसकी आपूर्ति हो सकेगी या नहीं। उद्योगों के लिए परिवेश और बुनियादी ढांचा भी जरूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हम सड़कें इसलिए बनाते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कनेक्टिविटी रहे। खेल के मैदान और स्कूल बनने से युवाओं का फायदा होता है तो वह भी बनने चाहिए। इसी तरह सड़कें गांवों की तस्वीर बदल देती हैं। इसे मानवीय पहलू से देखना होगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सड़कें देखकर हमें लगता है कि इससे ट्रैफिक जाम बढ़ेगा, लेकिन इससे रोजगार भी आ रहा है। कहा कि विकास के लिए जहां से भी पूंजी, तकनीक और लोग चाहिए, आपको उन्हें यहां लाना होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के विकास के लिए यह जरूरी है कि बाहर से निवेशक आएं। अंतरराष्ट्रीय निवेश होने से यह जरूरी नहीं है कि उत्पादों के लिए भारतीय राज्यों के बीच ही प्रतिस्पर्धा हो, बल्कि हो सकता है कि यहां के उत्पादों की तुलना विदेशों से भी हो सकती है। ऐसे में यह देखना होगा कि हम हैंडीक्राफ्ट जैसे ब्रांड को किस स्तर पर प्रस्तुत कर सकते हैं। यह भी देखना होगा कि इसकी बिक्री के लिए वितरण प्रणाली है या नहीं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि पूरे भारत के परिप्रेक्ष्य में देखें तो लोगों को उत्तराखंड के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। विशेषकर काॅरपोरेट और निवेश को लेकर तो बिल्कुल भी नहीं। ज्यादातर राज्य में लोग पर्यटन एवं धार्मिक यात्रा पर आते हैं। लेकिन लोगों का उत्तराखंड के प्रति लगाव जरूर है। यहां के लोग ईमानदार और मेहनती हैं। राज्य में निवेश के लिहाज से सकारात्मक और अहम है। कहा कि नया राज्य है और नए ब्रांड हैं तो धीरे-धीरे ही लोगों के जेहन में उतरेंगे। कहा कि राज्य में एक करोड़ की आबादी, 35-36 मिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है। हजारों वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल है। फिर भी अन्य पर्वतीय राज्यों से उत्तराखंड की प्रगति अच्छी है। उन्होंने कहा कि 20 साल पहले राज्य की पहचान बनना शुरू हुई। पहचान बनने में देर लगती है। उन्होंने कहा कि अच्छा और सकारात्मक यह है कि उत्तराखंड को लेकर नकारात्मक पहलू ज्यादा नहीं हैं। जब लोग यहां आकर नई चीजें देखते हैं और उसका अनुभव लेकर लौटते हैं तो उनमें एक नई धारणा का जन्म होता है।