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परीक्षा निरस्त कराने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे छात्र
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देहरादून। राज्य सरकार की ओर से निजी एजेंसी के जरिए कराई गई सहायक लेखाकार परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हजारों छात्रों ने गांधी पार्क से लेकर सीएम आवास तक चेतावनी रैली निकाली। लेकिन नारेबाजी करते हुए छात्र सीएम आवास तक पहुंच पाते, इससे पहले ही पुलिस- प्रशासनिक अधिकारियों की अगुवाई में पुलिसकर्मियों ने छात्रों को हाथीबड़कला के पास बेरीकेडिंग लगाकर रोक लिया। पुलिसकर्मियों द्वारा रोके जाने पर छात्र भड़क गए और मौके पर ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ छात्रों की जमकर नोकझोंक भी हुई। आखिरकार डेढ़ घंटे तक चले हंगामे के बाद छात्रों ने एसपी सिटी को ज्ञापन सौंपा। जिसमें मुख्यमंत्री से सहायक लेखाकार की परीक्षा तत्काल प्रभाव से निरस्त कराए जाने और निजी एजेंसी के बजाय सरकारी एजेंसी के जरिए परीक्षा कराए जाने की मांग की गई।चेतावनी रैली में छात्रों के साथ ही उत्तराखंड बेरोजगार संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी शामिल हुए।
पेपर में थी खामियां
चेतावनी रैली में शामिल छात्रों मुनेंद्र आर्य, धीरज परिहर, अंकुश चौहान पूजा थपलियाल, तरुण पांडे ने बताया कि 594 पदों के लिए सरकार की ओर से निजी एजेंसी के जरिए परीक्षा कराई गई थी लेकिन परीक्षा में तमाम खामियां थी। छात्रों ने कहा कि सहायक लेखाकार पद की परीक्षा में सीए की परीक्षा के स्तर के प्रश्न पूछे गए थे। वहीं दो घंटे के परीक्षा के लिए विभिन्न पारियों में 30 से लेकर 40 तक गणित के सवाल दिए गए। ऐसे में तमाम अभ्यार्थी न्यूनतम 45 अंक भी नहीं हासिल कर सके। अंग्रेजी के प्रश्न पत्र में भी तमाम खामियां थी। अंग्रेजी के प्रश्नों को गूगल से ट्रांसलेशन किया गया था। इससे हिंदी के अभ्यर्थियों के लिए समझ पाना मुश्किल हो गया था। आंदोलित छात्रों ने कहा कि परीक्षा निरस्त किए जाने की मांग को लेकर वे चयन आयोग के अधिकारियों के साथ ही हर स्तर पर अपनी आवाज उठा चुके हैं। लेकिन अभी तक परीक्षा निरस्त नही की गई है। ऐसे में छात्रों को अपना भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा है।
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पेपर में थी खामियां
चेतावनी रैली में शामिल छात्रों मुनेंद्र आर्य, धीरज परिहर, अंकुश चौहान पूजा थपलियाल, तरुण पांडे ने बताया कि 594 पदों के लिए सरकार की ओर से निजी एजेंसी के जरिए परीक्षा कराई गई थी लेकिन परीक्षा में तमाम खामियां थी। छात्रों ने कहा कि सहायक लेखाकार पद की परीक्षा में सीए की परीक्षा के स्तर के प्रश्न पूछे गए थे। वहीं दो घंटे के परीक्षा के लिए विभिन्न पारियों में 30 से लेकर 40 तक गणित के सवाल दिए गए। ऐसे में तमाम अभ्यार्थी न्यूनतम 45 अंक भी नहीं हासिल कर सके। अंग्रेजी के प्रश्न पत्र में भी तमाम खामियां थी। अंग्रेजी के प्रश्नों को गूगल से ट्रांसलेशन किया गया था। इससे हिंदी के अभ्यर्थियों के लिए समझ पाना मुश्किल हो गया था। आंदोलित छात्रों ने कहा कि परीक्षा निरस्त किए जाने की मांग को लेकर वे चयन आयोग के अधिकारियों के साथ ही हर स्तर पर अपनी आवाज उठा चुके हैं। लेकिन अभी तक परीक्षा निरस्त नही की गई है। ऐसे में छात्रों को अपना भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा है।
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