इस बार आपदा आई तो बचाएगा यह स्टिकर

आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 20 Jan 2014 08:56 AM IST
sticker will save from disaster
उत्तराखंड पर्यटन विभाग एक बार फिर चार धाम यात्रा के लिए तैयारियों में जुट गया है, लेकिन इस बार जून 2013 में आई आपदा से सबक लेने की कवायद भी नजर आने लगी है।

हर वाहन की ताजा लोकेशन मिलेगी

इस बार यात्रा पर निकलने वाले हर वाहन की पूरी जानकारी ऋषिकेश स्थित कंट्रोल रूम में दर्ज की जाएगी। पंजीकृत वाहनों पर खास स्टिकर लगाया जाएगा, जो यात्रा रूट पर हर वाहन की ताजा लोकेशन की जानकारी कंट्रोल रूम को भेजता रहेगा।

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उम्मीद है कि मार्च-अप्रैल से यात्रा प्रारंभ हो जाएगी। पर्यटन सचिव उमाकांत पंवार की ओर से जारी निर्देश के अनुसार वाहनों पर लगने वाला यह स्टिकर ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) पर आधारित होगा।

कंट्रोल रूम ऋषिकेश में होगा, लेकिन यात्रा रूट पर विभिन्न चेकपोस्टों पर भी वाहनों का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा। जीपीएस स्टिकर में वाहन का नंबर, चालक का नाम, यात्रियों की संख्या आदि जानकारियां फीड होंगी।

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कंट्रोल रूम में लगे कंप्यूटर जीपीएस सिस्टम से मिलने वाले सिग्नलों की मदद से बताते रहेंगे कि कौन सा वाहन, कब कितने समय किस जगह रहा या किसी खास वक्त में कहां है। निर्देश के मुताबिक ये स्टिकर आंध्र प्रदेश की एक कंपनी से मंगाने की तैयारी चल रही है।

यह होगा लाभ
यात्रा मार्ग पर किसी हादसे या यात्रियों के फंस जाने की स्थिति में वाहन की अंतिम लोकेशन के आधार पर त्वरित राहत कार्य प्रारंभ किया जा सकेगा। जीपीएस स्टिकर से यह जानकारी भी मिल जाएगी कि फंसा या दुर्घटनाग्रस्त वाहन किस प्रदेश का है और उसमें कौन लोग सवार हैं।

जहां जितनी क्षमता, उतने ही यात्री
जून आपदा में मारे जाने वाले लोगों की भारी तादाद के पीछे बड़ी वजह प्रभावित स्थानों में क्षमता से अधिक लोगों का रुकना भी माना गया। ऐसे में पर्यटन विभाग ने इस बार चारों धामों (बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) में उतने ही यात्री भेजने का निर्णय किया है, जितने वहां एक समय में रह सकते हैं।

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यह व्यवस्था यात्रा के प्रमुख पड़ावों पर भी लागू होगी। मसलन, जोशीमठ में एक रात में 2000 यात्री रुक सकते हैं, तो संख्या इससे अधिक नहीं होने दी जाएगी। यात्रियों को विभिन्न पड़ावों पर रोका जाएगा।

धामों के लिए यात्रियों को खास संख्या के जत्थों के रूप में भेजा जाएगा। जब तक ये जत्थे लौटकर पिछले पड़ाव पर नहीं आएंगे, अगला जत्था रवाना नहीं किया जाएगा।

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चारधाम यात्रा की विशेष व्यवस्थाओं के लिए दिशानिर्देश प्राप्त हो चुके हैं। यात्रा को सिस्टमेटिक तरीके से आयोजित किया जाएगा। यात्रियों की हिफाजत को पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
- योगेंद्र सिंह गंगवार, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी, देहरादून

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