Uttarakhand: वन भूमि का सर्वे और ब्यौरा डिजिटल तौर पर भी तैयार करने की कवायद, रिकॉर्ड के लिए बनी एसओपी
वन भूमि का नोटिफिकेशन घोषित होने के बाद उसकी स्पष्ट तौर पर पूरे ब्यौरे के साथ सीमा क्षेत्र का उल्लेख होता है। शासन में एसओपी को लेकर 25 नवंबर को बैठक है, इसमें वन विभाग, राजस्व विभाग, आईटीआई लिमिटेड के अधिकारियों को बुलाया गया।
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वन विभाग की भूमि का रिकॉर्ड और ब्यौरा डिजिटल तौर पर भी तैयार करने की कवायद आगे बढ़ी है। वन मुख्यालय ने वन भूमि का डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम आधारित सर्वे की एसओपी तैयार की ली है, जिसे अनुमोदन के लिए शासन में भेजा है। अनुमोदन के बाद राजस्व विभाग के साथ वन विभाग का सर्वे शुरू होगा।
प्रदेश में करीब 70 प्रतिशत से अधिक वन भूमि है। ब्रिटिशकाल से ही वन भूमि प्रबंधन और सीमा बताने की व्यवस्था रही है। इसमें वन भूमि का नोटिफिकेशन घोषित होने के बाद उसकी स्पष्ट तौर पर पूरे ब्यौरे के साथ सीमा क्षेत्र का उल्लेख होता है। इसके अलावा वन महकमा सीमांकन पिलर भी लगाता है। इस सीमांकन पिलर की रिपोर्टिंग करना भी वन विभाग के काम का हिस्सा होता है।
इस व्यवस्था के बाद भी कई बार राजस्व विभाग के साथ भूमि स्वामित्व को लेकर गतिरोध उत्पन्न होता है। ऐसे में स्पष्ट सीमांकन के लिए आधुनिक और अधिक बेहतर डीजीपीएस आधारित सर्वे करने की योजना बनाई गई। इसमें वन विभाग, राजस्व विभाग और भारत सरकार का उपक्रम आईटीआई लिमिटेड मिलकर काम करेंगे। यह काम कैसे शुरू होगा? इसको लेकर एसओपी तैयार की जानी थी। अब यह तैयार हो गई है।
एसडीएम स्तर पर होगी कमेटी
विवादों को सुलझाने के लिए कमेटी बनेगीएसओपी में डिमार्केशन सर्वे का बिंदु से जुड़ी जानकारी दी गई है। इसके अलावा जहां राजस्व और वन विभाग के बीच सीमा होगी, वहां पर राजस्व और वन विभाग संयुक्त सर्वे और सत्यापन करेंगे। जहां भूमि को लेकर विवाद की स्थिति होगी, वहां एसडीएम स्तर पर कमेटी होगी। इसमें एसडीओ, रेंजर, तहसीलदार शामिल होंगे। अगर इस कमेटी में हल नहीं होता है, तो प्रकरण जिलास्तरीय कमेटी में जाएगा।
इसमें डीएम, डीएफओ, एसडीएम, एसडीओ आदि होंगे। सर्वे में दूसरे स्रोत के तौर पर नोटिफिकेशन, सीमांकन पीलर, वन विभाग का वर्किंग प्लान, फाॅरेस्ट सीमांकन नक्शा, गैर वानिकी कार्याें के लिए दी गई वन भूमि का ब्यौरा शामिल होगा। इसके अलावा राजस्व विभाग के सर्वे और कैडस्ट्रल मैप से मिलान होगा। इसके अलावा राजस्व विभाग खतौनी, पत्राचार से जुड़े अभिलेखों को उपलब्ध करायेगा। इसके अलावा एसओपी में राजस्व विभाग के सुझावों को भी शामिल किया गया है।
सओपी को लेकर 25 नवंबर को बैठक
सर्वे का काम देखने के लिए राज्य स्तर पर फाॅरेस्ट रेवेन्यू ज्वाइंट टेक्निकल कमेटी होगी। इसमें पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय,वन विभाग, राजस्व विभाग और आईटीआई लिमिटेड के अधिकारी शामिल होंगे। शासन में एसओपी को लेकर 25 नवंबर को बैठक है, इसमें वन विभाग, राजस्व विभाग, आईटीआई लिमिटेड के अधिकारियों को बुलाया गया।
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कोटइस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है। प्रदेश में सर्वे के लिए एसओपी तैयार कर ली गई है, जिसे अनुमोदन के लिए शासन को भेजा गया है। अनुमोदन के बाद कार्य शुरू होगा। आधुनिक माध्यम से सर्वे का कार्य होगा। -धनंजय मोहन, प्रमुख वन संरक्षक