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उत्तराखंड: जल्द नष्ट कर दी जाएंगी पतरामपुर में 13 सालों से दबी मिसाइलें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रपुर
Updated Fri, 03 Aug 2018 08:01 PM IST
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भूमिगत जिंदा मिसाइल
- फोटो : demo pic
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काशीपुर स्थित कुंडा थाना क्षेत्र के पतरामपुर में 13 वर्षों से दबी 556 कार्यक्षम मिसाइलों को नष्ट करने में वन विभाग की ओर से लगाए गए रोड़े का सेना की टीम ने हल निकाल लिया है।
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वन विभाग की ओर से अपनी भूमि देने से मना करने के बाद फिर से यहां पहुंची सेना की टीम ने बुधवार को नई जगह चिह्नित कर ली है। सितंबर तक मिसाइलों को निष्क्रिय कर दिया जाएगा। मिसाइल निस्तारण के लिए पुलिस विभाग को 20 लाख रुपये का बजट जारी हो चुका है।
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मालूम हो कि 11 माह पहले जमीन में दबी 555 मिसाइलों को नष्ट करने के लिए पुलिस मुख्यालय से 20 लाख रुपये का बजट जारी हुआ और लखनऊ बाराबंकी से सेना की बम निरोधक दस्ते के सूबेदार प्यारा सिंह और लांसनायक राजपाल ने पतरामपुर पहुंचकर फीका नदी के किनारे स्थित वन विभाग की भूमि को मिसाइल निष्क्रिय करने के लिए चिह्नित किया था। लेकिन इसके बाद वन विभाग ने भूमि लेने के लिए भारत सरकार से अनुमति लेने की बात कह कर रोड़ा डाल दिया। इसके बाद एसएसपी ने नई भूमि का चयन करने के लिए डीएम कार्यालय को पत्र लिखा। पिछले बुधवार को जिला प्रशासन की पहल पर सेना ने इन मिसाइलों को निष्क्रिय करने के लिए नई भूमि का चयन कर लिया है।
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बीते बुधवार सेना की टीम ने पतरामपुर पहुंचकर नई जगह चिह्नित कर ली है। सितंबर में मिसाइलों को निष्क्रिय कर दिया जाएगा।
-डॉ. सदानंद दाते, एसएसपी
क्या है मामला
आईसीडी तुगलकाबाद से 10 दिसंबर 2004 को 16 कंटेनर में स्क्रैप काशीपुर की एसजी स्टील फैक्ट्री में लाया गया था। स्क्रैप की इस खेप में 556 मिसाइलें भी शामिल थी। 30 दिसंबर को एक मिसाइल को काटने के दौरान हुए फिस्फोट से फैक्ट्री के वेल्डर सतपाल की मौके पर ही मौत हो गई थी। सुरक्षा के लिहाज से उस वक्त अन्य मिसाइलों को पतरामपुर में जमीन में दफना दिया गया था।