भारत के इस विशाल बांध का पानी 'निगल' जाएगा 60 गांव! पढ़ें पूरी खबर...
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भारत के इस विशाल बांध का पानी 60 गांव के करीब 31023 परिवारों के जीवन को प्रभावित करेगा। इस बांध के कारण 60 गांव जलमग्न हो जाएंगे।
जी, हां उत्तराखंड में बन रहे पंचेश्वर बहुउद्देशीय बांध परियोजना में 60 गांवों की जमीन समा जाएगी। बांध के डूब क्षेत्र में पिथौरागढ़, चंपावत और अल्मोड़ा जनपद के 31023 परिवार आ रहे हैं।
ये परिवार इन तीन जनपदों के अलग-अलग 60 गांवों में निवास करते हैं। इन 31023 परिवारों में से 1308 परिवारों का घर जमीन दोनों डूब जाएंगे। वहीं 29715 परिवारों की जमीनें डूब क्षेत्र में आ रही हैं।
नेपाल के दो जिलों के 14 रिहायशी क्षेत्र भी होंगे प्रभावित
हाल के दिनों में परियोजना को शुरू करने को लेकर दोनों देश में गतिविधियां तेज हुई हैं। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने 13 जून को इस परियोजना को लेकर आवश्यक निर्देश दिए थे और इसके डूब क्षेत्र में आने वाले लोगों का पुनर्वास करने का सुझाव दिया था।
13 जून को हुई कैबिनेट की मीटिंग में भी पंचेश्वर बांध से विस्थापित होने वाले परिवारों के पुनर्वास को लेकर चर्चा हुई थी और पुनर्वास परिषद का गठन करने का फैसला लिया था। परिषद का ढांचा बनाने का काम मुख्य सचिव को सौंपा गया है।
पंचेश्वर बांध परियोजना
पंचेश्वर बांध का निर्माण चंपावत जिले में महाकाली नदी पर प्रस्तावित है। यह भारत और नेपाल की संयुक्त परियोजना है। परियोजना को लेकर भारत और नेपाल के बीच 12 फरवरी, 1996 को महाकाली जल विकास संधि के नाम से समझौता हुआ था।
नवंबर ,1999 में एक संयुक्त परियोजना प्राधिकरण (जेपीओ) भी गठित की गई। बाद में पंचेश्वर विकास प्राधिकरण का गठन किया, जिसमें दोनों देशों के छह-छह अधिकारियों को शामिल किया गया।
इसका कार्यालय कंचनपुर में खोला है। पंचेश्वर बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट वेप्कॉस कंपनी ने तैयार की है। उत्तराखंड सरकार ने 2012 में इस परियोजना को मंजूरी दे चुकी है।
सिंचाई विभाग को मिल सकती है पुनर्वास की जिम्मेदारी
परियोजना के डूब क्षेत्र से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को मिल सकती है। सिंचाई विभाग ने ही टिहरी बांध से विस्थापित होने वाले लोगों के पुनर्वास का काम किया है।
जानकारी के मुताबिक पंचेश्वर बांध के लिए बनने वाले पुनर्वास परिषद में सचिव राजस्व, सचिव सिंचाई, मुख्य अभियंता सिंचाई, तीन जनपदों के जिलाधिकारी सहित अन्य कई विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जा सकता है।
पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले क्षेत्र के लोगों के पुनर्वास का काम सिंचाई विभाग को मिल सकता है। सिंचाई विभाग ने टिहरी बांध के विस्थापितों के पुनर्वास का काम बखूबी किया है। इस संबंध में शासनादेश (जीओ) जल्द ही जारी होने की उम्मीद है।
- अजय वर्मा, मुख्य अभियंता, सिंचाई
पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना एक नजर में
-भारत-नेपाल की है संयुक्त परियोजना।
-भारत और नेपाल के बीच बहने वाली महाकाली नदी पर निर्माण है प्रस्तावित।
-उत्तराखंड के चंपावत और नेपाल के बैतडी जिले में होगा निर्माण।
-दोनों देशों के बीच बांध निर्माण के लिए फरवरी, 1996 में हुआ था समझौता।
-वेप्कॉस कंपनी ने तैयार की है डीपीआर।
-परियोजना पर 34,971 करोड़ रुपये खर्च होने का है अनुमान।
-परियोजना से लगभग 10,861 मेगावाट बिजली उत्पादन का है लक्ष्य।
-बांध की पानी का अधिकम स्तर (एफआरएल) 420 मीटर होगा।
-आठ साल में निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य।
-बांध से भारत में 0.24 मिलियन हेक्टेयर में मिलेगी सिंचाई की सुविधा।
-नेपाल का 0.013 मिलियन हेक्टेयर भूभाग होगा सिंचित।
-उत्तराखंड और यूपी के कई जिलों में मिलेगी सिंचाई की सुविधा।
-परियोजना से उत्पादित बिजली का 13 फीसदी हिस्सा उत्तराखंड को मिलेगा।