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राजाजी टाइगर रिजर्व में गुलदार और बाघ का मांस व हड्डियां मिलने के मामले में अब होगी एसआईटी जांच

Tue, 26 Mar 2019 03:03 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 26 Mar 2019 03:03 PM IST
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sit investigation on rajaji tiger reserve leopard, tiger meat and bone case
प्रतीकात्मक तस्वीर

पिछले साल मार्च में राजाजी टाइगर रिजर्व की दूधियाबंद बीट में गुलदार और बाघ का मांस व हड्डियां मिली थीं। इस मामले में कई जांच अधिकारी भी बदले गए, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अब इस प्रकरण में एसआईटी जांच के आदेश दिए गए हैं। 

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इस आदेश के बाद वन विभाग के अधिकारियों में खलबली मच गई है। बता दें कि पिछले साल गुलदार, टाइगर और बाघ की खाल-हड्डियां मिली थी। जिसकी जांच में कई अधिकारी, कर्मचारी और एनजीओ के नाम शामिल बताए जा रहे थे। पहले विभागीय जांच चल रही थी, लेकिन फिर हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच शुरू हुई थी। जिसके बाद जांच बंद हो गई थी। इस मामले में तीन बार जांच अधिकारियों को बदला भी जा चुका है। 

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2018 मार्च में दूधियाबंद बीट में गुलदार और बाघ का मांस व हड्डियां मिली थी

पिछले साल 2018 मार्च में जब यह मामला सामने आया तो जांच वार्डन कोमल सिंह को सौंपी गई। कोमल सिंह प्रकरण का खुलासा करने के करीब ही पहुंचने वाले ही थे कि उन्हें हटाकर मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।

प्रकरण में रेंजर अनूप गुसाईं सहित दो अन्य वनकर्मी को आरोपी पाते हुए देहरादून संबद्ध कर दिया गया था। कुछ समय बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई से प्रदेश में गुलदार और बाघ की मौत की जांच कराने का आदेश दिया। जिसके बाद दूधियांबद बीट के प्रकरण की जांच करने सीबीआई की टीम देहरादून पहुंची थी।

जांच में सुप्रीम कोर्ट से स्टे भी मिल गया था

कई अधिकारियों और अन्यों के सीबीआई ने बयान दर्ज करवाए, लेकिन कुछ दिन बाद ही सीबीआई में रार उत्पन्न हो गई। इसी बीच जांच में सुप्रीम कोर्ट से स्टे भी मिल गया था। जिसके बाद पूरे प्रकरण की जांच ठंडे बस्ते में चली गई। 

जांच फिर से शुरू हुई तो जांच कर रहे मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन को तत्काल प्रभाव से हटाकर राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन सोनकर को अपर मुख्य सचिव डा. रणबीर सिंह ने जांच अधिकारी नियुक्त किया था। इसके एक दिन बाद ही वन मंत्री हरक सिंह रावत ने सनातन सोनकर को हटाकर मनोज चंद्रन को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया था। जिसके बाद अब इस मामले में एसआईटी जांच होगी।

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