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एवरेस्ट को नाम देने वाली हस्ती का घर देखा है कभी
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 27 Jan 2014 04:08 PM IST
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कॉनेल सर जॉर्ज एवरेस्ट वेल्स सर्वेक्षक और भौगोलिक थे। इसके साथ ही वह 1830 से 1843 तक भारत के सर्वेयर जनरल रहे।
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सर जॉर्ज के नाम पर माउंट एवरेस्ट का नाम
सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का नाम भी सर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर ही पड़ा है। रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ने 1848 में उनका यह सम्मान उनके सर्वे में योगदान के लिए किया था। यह सर्वेक्षण 1806 में विलियम लैंब्टन द्वारा शुरू किया और यह कई दशकों तक चला गया था।
एवरेस्ट की खोज करने वाले सर जॉर्ज एवरेस्ट का घर और प्रयोगशाला मसूरी में पार्क रोड में स्थित है जो गांधी चौक से लगभग 6 किमी. दूर है। सर जॉर्ज का घर और प्रयोगशाला 1832 में बनाया गया था। उनका घर ऐसी जगह बना है जहां से कोई भी दून घाटी, अलगाड़ नदी और बर्फ से ढके हिमालय का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।
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लंबे समय की अनदेखी झेल रहा सर जॉर्ज एवरेस्ट का यह घर अब आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की देखरेख में है।
अब यह जगह पर्यटक स्थल के रूप में जाना जाता है। पर्यटक यहां घूमने के मकसद से आते हैं। इस जगह को रेस्टोरेंट की तरह बना दिया गया है। यहां कुछ लड़के पर्यटकों को चाय, मैगी परोसते हैं।
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एक मस्ती भरे पिकनिक स्पॉट के रूप में सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस पर्यटकों का भले ही न लुभाए, लेकिन वहां का वातावरण अक्सर लोगों को खुशी और शांति का अहसास कराता है।
एएसआई खोलना चाहता है म्यूजियम
सर जॉर्ज एवरेस्ट ने मसूरी के हाथीपांव स्थित अपने जिस आवास और ऑब्जरवेटरी से चोटियों का सर्वे करने में सालों बिताए थे, अब उसे उत्तराखंड का सिरमौर बनाने की तैयारी है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) यहां म्यूजियम खोलना चाहता है। इसके लिए डीएम को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
अभी तक यह पर्यटन विभाग के पास है। इसी के साथ एक लाज भी खुला है।
धरोहर संरक्षित करने की पहल
पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों का मानना है कि म्यूजियम के माध्यम से यहां बाहर के पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकेगा। साथ ही, पुरातात्विक न होने के बावजूद ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित किया जाना संभव होगा।
बता दें कि सर जॉर्ज एवरेस्ट के पास ग्रेट ट्रिगनोमैट्रिकल सर्वे के सुपरिंटेंडेंट का भी दायित्व था, जिसे उन्होंने जिस एक्यूरेसी के साथ अंजाम दिया, आज भी उसकी मिसाल दी जाती है।