क्या कभी देखे हैं सुर्खाब के पर, नहीं तो देखिए...
जिस अंदाज में सर्दी हौले-हौले बढ़ रही है उसी अंदाज में आसन बैराज झील में विदेशी पक्षियों का संसार भी बसने लगा है।
ऐसे में इन विदेशी ‘मेहमानों’ के दीदार करने में पर्यटक भला क्यों पीछे रहें। इसके साथ ही डाकपत्थर बैराज झील भी सुर्खाब से गुलजार हो गई है।
शाम ढलने तक झील में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है। गुनगुनी धूप में नौकायन के साथ पर्यटक इन पक्षियों का भरपूर दीदार कर रहे हैं।
हर साल सर्दियां शुरू होते ही आसन झील विदेशी पक्षियों से गुलजार होने लगती है। ये विदेशी ‘मेहमान’ यहां अक्तूबर से मार्च तक प्रवास करते हैं। विदेशी पक्षियों को देखने के लिए हजारों की संख्या में पर्यटक पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर से यहां पहुंचते हैं।
पर्यटक शांत वादियों के बीच झील में नजदीक से पक्षियों का दीदार कर सकें, इसके लिए जीएमवीएन (गढ़वाल मंडल विकास निगम) द्वारा लोगों को पैडल बोट उपलब्ध कराई जाती है। जिसके जरिये पर्यटक नौकायन के साथ विदेशी पक्षियों का दीदार करते हैं।
इन पक्षियों के होते हैं दीदार
सुर्खाव के साथ ही आसन झील में पियासन, नील सिर, गुगरल, नार्थन सोवलर, नार्थन पिंटेल, टफटेक डग, कामन कूट, केटिलिगरेट, ग्रेट कामोर्नेट, ग्रेव चार, लिटिल ग्रेव, बारहेडेड गूज, ग्रेड क्रेस्टेड दिखाई दे रहे हैं।
डाकपत्थर में भी सुर्खाब की दस्तक
आसन झील के साथ ही डाकपत्थर बैराज झील भी सुर्खाब से गुलजार हो गई है। दिनभर पक्षियों का कलरव यहां घूमने आने वाले पर्यटकों को रास आ रहा है। हालांकि यहां नौकायन संग पक्षियों का दीदार नहीं है। बावजूद इसके यहां पर्यटकों की चहल-पहल कम नहीं है।
कैसे पहुंचे
राजधानी देहरादून से 45 किलोमीटर दूर स्थित आसन झील तक वाया हरबर्टपुर होते हुए बस, प्राइवेट टैक्सी से पहुंचा जा सकता है। इसी के साथ पड़ोसी राज्य हिमाचल से वाया पांवटा होते हुए झील तक पहुंचा जा सकता है।
...ताकि मिले सुविधाएं
आसन बैराज झील में आने वाले पर्यटकों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसके लिए इन दिनों गढ़वाल मंडल निगम यहां स्थित रिजॉर्ट की मरम्मत का काम करवा रहा है।
पक्षियों की दस्तक के साथ ही सैलानियों की संख्या बढ़ने लगी है। रोजाना 100-150 सैलानी पहुंच रहे हैं। शनिवार और रविवार को यह संख्या तीन सौ के पार पहुंच रही है। सैलानियों की सुविधा के लिए अस्थायी रेस्टोरेंट बनाया गया है।
- अजयपाल कंडाली, मैनेजर जीएमवीएन