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गर्मी बढ़ते ही जौनसार बावर में सूखने लगे हलक

Fri, 21 Apr 2017 04:28 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, त्यूनी
ब्यूरो / अमर उजाला, त्यूनी Updated Fri, 21 Apr 2017 04:28 PM IST
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shortage of drinking water due to summer

गर्मियां बढ़ने के साथ ही पहाड़ में पेयजल की किल्लत से लोगों के हलक सूखने लगे हैं। सूरज के चढ़ते तेवर के चलते जौनसार बावर के 16 से अधिक जलस्त्रोत सूख चुके हैं।

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इसके अलावा क्षेत्र की 40 से अधिक पेयजल लाइनें भी क्षतिग्रस्त होने से कई गांवों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। इस वजह से 25000 की आबादी के रोजाना पीने के पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। लोगों को रोजाना तीन से चार किमी दूर से पानी ढोने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके बावजूद उन्हें दूषित पानी ही नसीब हो रहा है।
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ऐसे में यदि विभाग ने जल्द ही क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत और पानी की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की तो आने वाले दिनों में लोगों की मुश्किलें बढ़नी तय है। लोगों का कहना है कि जलस्रोत सूखने से मवेशियों के लिए भी पानी का संकट खड़ा हो गया है। नहाने से लेकर कपड़े धोने तक के लिए उन्हें खड्ड की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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दूषित पानी पीने से डायरिया का खतरा है। विभागीय अधिकारियों से कई बार क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत की मांग की जा चुकी है, लेकिन हर बार विभाग बजट की कमी बताकर पल्ला झाड़ लेता है। बीते साल भी लाइन क्षतिग्रस्त और जलस्रोत सूखने से कई गांवों में पानी का संकट खड़ा हो गया था। तब विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत खच्चरों से पानी की सप्लाई करनी पड़ी थी। इससे भी विभाग ने कोई सबक नहीं लिया।       

यहां सूखे जलस्रोत       
रायगी, भूट, भ्यूंद्रा, फेड़ीच, नीनूस, दार्मिगाड़, उदावा, नागथात, पुरोड़ी, पिंगुवा, सैंसा, दसेऊ, मलेथा, माख्टी, दिलऊ, सैंज, काहा, नेहरा समेत 16 जलस्रोत पूरी तरह से सूख चुके हैं।       

यहां क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन       
अपर कुल्हा, भ्यूड़ोग, रडू, मुंधोल, कथियान, हरटाड़, चौरालाणी, भाटगढ़ी, कूणा, बागी, मेंद्रथ, ट्यूटाड़, पुरटाड़, कांडा, चौसाल, मेघाटू, प्यूनल, कोटी, रिसाणू, ठारठा, नेहरा, सावड़ा, धोईरा, दुनवा, पाटी, खारसी, क्वांसी, खाटुवा समेत 40 गांव की पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त पड़ी है।       

अब तक नहीं हुआ मजदूरी भुगतान        
पेयजल संकट से जहां पहाड़ में रह रहे लोगों के हलक सूखने लगे हैं, वहीं तहसील प्रशासन ने बीते साल किए गए पानी ढुलान की मजदूरी का भुगतान अब तक उदांवा के ग्रामीणों को नहीं किया है। बीते साल सात मजदूरों ने गांव तक खड्ड से पानी ढुलान किया था। जिन्हें 50 हजार रुपये मजदूरी का भुगतान होना था, लेकिन मजदूर अब तक मजदूरी भुगतान के लिए तहसील के चक्कर काट रहे हैं।       


संबंधित विभाग से मामले की रिपोर्ट मांगी गई है। भीषण जलसंकट से जूझ रहे गांव में टैंकरों से पानी की व्यवस्था की जाएगी। बीते साल की मजदूरी का भुगतान अब तक क्यों नहीं हुआ। इस संबंध में राजस्व उपनिरीक्षक से जवाब तलब किया गया है।
- प्रत्यूष सिंह एसडीएम त्यूनी/कालसी/चकराता

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