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पुलिस लूट प्रकरण: तो क्या दिल्ली से पहाड़ के प्रत्याशी के लिए आए थे एक करोड़, हो सकता है बड़ा खुलासा

Fri, 12 Apr 2019 01:14 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश शर्मा , अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा , अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 12 Apr 2019 01:14 PM IST
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shocking facts will come in Uttarakhand Police personnel loot from property dealer
फाइल फोटो - फोटो : ANI

दिल्ली से पहाड़ के एक प्रत्याशी के लिए आए थे एक करोड़। आईजी की कार इस्तेमाल कर पुलिसकर्मियों द्वारा लूटपाट के हाईप्रोफाइल में जल्द ही कुछ ऐसी कहानी सामने आ सकती है। मामले में एक-दो दिन में चौंकाने वाले खुलासे होना तय है। लूट का यह मामला राजनीतिक रंग ले सकता है। चुनाव में काले धन के सियासी इस्तेमाल की परतें भी उधड़ सकती हैं। 

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मुकदमे में नामजद आरोपी कथित प्रापर्टी डीलर अनुपम शर्मा के अमर उजाला को बृहस्पतिवार को दिए गए बयान से इस मामले में आने वाले तूफान के संकेत मिले हैं। अमर उजाला की प्रारंभिक पड़ताल में इसके भी संकेत मिले हैं कि चर्चा के मुताबिक रकम वाकई एक करोड़ थी। आरोपी शर्मा की मानें तो यह रकम उनकी नहीं थी। रकम किसकी है? कहां से लाई गई और कहां जानी थी, सुबूतों के साथ वह जल्द ही इसका खुलासा करेंगे।

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अमर उजाला की प्रारंभिक पड़ताल में सामने आए तथ्य

अमर उजाला की प्रारंभिक पड़ताल में जैसे तथ्य सामने आ रहे हैं, उसके पूरे खुलासे के साथ उत्तराखंड की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोग और एक पार्टी से जुड़े प्रत्याशी के दामन पर दाग लग सकते हैं। हम यह भी बताते चलें कि आरोपी अनुपम, कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री और कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं।

राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी उनके सदस्य होने की बात कही जा रही है। प्रापर्टी डीलिंग तो उन्होंने कभी की ही नहीं, जैसा कि एफआईआर में उन्हें बताया गया है। वह काशीपुर के रहने वाले हैं और जिम कार्बेट के समीप और गोवा में उनके रिजार्ट हैं। इस भारी-भरकम रकम की लूट की घटना से पहले की कहानी उत्तराखंड के एक प्रभावशाली राजनीतिज्ञ के दिल्ली स्थित घर से शुरू होकर पहाड़ की एक संसदीय सीट तक जा रही है।

अंदाज था कि रकम गंवाने वाला खामोशी साध जाएगा

राजपुर रोड स्थित डब्ल्यूआईसी क्लब की डीवीआर से छेड़छाड़ न हुई तो इस कहानी के किरदारों के रिश्ते अपने आप खुलते चले जाएंगे। जिस क्लब से यह रकम उठाई गई थी, उसका जुड़ाव किन लोगों से है, यह भी किसी से छिपा नहीं है। खबर है कि मामले में निलंबित एक पुलिसकर्मी ने क्लब में इस मामले से जुड़े किरदारों के साथ भोजन किया था।

माना जा रहा है कि मामले से जुड़े सभी पक्षों को इस मोटी रकम की असलियत पता थी, नतीजा ‘साथियों’ ने ही यह खेल कर डाला। अंदाज यही था कि रकम गंवाने वाला इसको लेकर खामोशी साध जाएगा। मगर, सब कुछ अनुमान के विपरीत हो गया।

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अब उन लोगों के पेशानी पर भी पसीना आते हुए बताया जा रहा है, जिन्होंने एफआईआर दर्ज कराने का ज्ञान दिया था। अमर उजाला ने बुधवार को वादी अनुरोध से बात की तो उन्होंने इस मुकदमे की प्राथमिकी दर्ज कराने की बात से इंकार कर दिया था। 

मामले की एफआईआर दर्ज कराने वाले अनुरोध पंवार के बारे में अनुपम शर्मा का दावा है कि वे उसे जानते ही नहीं, व्यावसायिक डील करना तो दूर की बात है। उनकी पहली मुलाकात घटना से कुछ दिन पहले दिल्ली में उत्तराखंड के एक प्रभावशाली राजनीतिज्ञ के घर हुई थी। अनुपम शर्मा के दावे की पुष्टि के लिए अनुरोध का पक्ष पूछने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल बंद मिला। जब भी उनका पक्ष सामने आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा। 

क्या हुआ था

आदर्श चुनाव आचार संहिता का डर दिखाकर पुलिसकर्मियों ने प्रॉपर्टी डीलर से नोटों से भरा बैग लूट लिया था। वारदात में आईजी गढ़वाल अजय रौतेला की सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल हुआ। मामले में रकम देने वाले प्रॉपर्टी डीलर अनुपम शर्मा और तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। 

प्राथमिक जांच के बाद एसएसपी ने मामले में दरोगा दिनेश नेगी और दो अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। आईजी गढ़वाल का कार चालक हिरासत में है। यह घटना चार अप्रैल की रात पौने दस बजे राजपुर रोड पर हुई थी।

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