शांतिकुंज स्थापना की स्वर्ण जयंती: पांच रुपये का डाक टिकट जारी, केंद्रीय मंत्री रविशंकर और सीएम ने किया अनावरण
शांतिकुंज की ओर से देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने डाक टिकट का अनावरण किया। वहीं केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े।
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शांतिकुंज स्थापना की स्वर्ण जयंती वर्ष पर केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने वर्चुअल कार्यक्रम में पांच रुपये का डाक टिकट जारी किया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि शांतिकुंज आध्यात्मिक चेतना जगा रहा है।
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि शांतिकुंज की स्थापना के स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में डाक टिकट जारी होना सनातन संस्कृति को बढ़ावा देना है। यह पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के प्रति हमारा सम्मान है। सामाजिक एवं आध्यात्मिक विकास को बढ़ाने में शांतिकुुंज का सेवा कार्य सराहनीय है। सूचना प्रसारण एवं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने आजादी के समय में आध्यात्मिक चेतना को जगाने की दिशा में बड़ा काम किया है। साथ ही उन्होंने अध्यात्म और विज्ञान के बीच प्रशंसनीय कार्य किया है। अब डॉ. प्रणव पंड्या के नेतृत्व में शांतिकुंज आध्यात्मिक चेतना जगाने, पौधरोपण, गंगा, आपदा, युवा आदि के बीच विभिन्न रूपों में महत्वपूर्ण कार्य संचालित हो रहा है।
कार्यक्रम के अध्यक्षता करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि यह वर्ष शांतिकुंज की स्थापना का 50वां वर्ष है। डाक टिकट का जारी होना शांतिकुंज के सृजनात्मक और रचनात्मक कार्यों पर सरकार का मुहर लगना जैसा है। उन्होंने कहा कि शांतिकुंज राजनीतिक पार्टी विशेष से ऊपर उठकर कार्य करने में विश्वास रखता है। इस मौके पर गायत्री परिवार की संरक्षिका शैल दीदी, देसं विवि के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या, कुलपति शरद पारधी, कुल सचिव बलदाऊ देवांगन, डाक विभाग के निदेशक सुनील पाल, जिलाधिकारी सी रविशंकर, एसएसपी डी सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस आदि मौजूद रहे।
गायत्री परिवार ने देशभर में रोपे एक लाख 64 हजार पौधे
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में गायत्री जयंती एवं गंगा दशहरा का पर्व समूह साधना, विश्व कल्याण की प्रार्थना एवं पौधरोपण को गति देने के संकल्प के साथ मनाया गया। साधकों ने अखंड जप में भाग लिया। गंगा दहशरा पर गायत्री परिवार की ओर से हरिद्वार समेत देश के विभिन्न स्थानों में एक लाख 64 हजार पौधे रोपे गए।
गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि गायत्री साधक के विचारों को पवित्र करती हैं तो पतित पावनी गंगा अपने शरण आए लोगों को शुद्ध करती हैं। गायत्री व गंगा के तीन-तीन चरण हैं, जिसके अनुपालन से प्रगति दर प्रगति होती है। उन्होंने पतित पावनी गंगा एवं उसकी सहायक करीब 150 नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में चल रहे गायत्री परिवार के कार्यों को गति देने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. पंड्या ने कई औषधीय, फलदार एवं छायादार पौधों का पूजन कर इसे विस्तारित करने के लिए संकल्पित कराया। उन्होंने गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और मप्र में चलाए जा रहे पौधरोपण के लिए नर्सरी विकसित करने के विभिन्न सुझाव दिए। संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने कहा कि महापर्व जिम्मेदारी उठाने का है। सद्ज्ञान एवं सत्कर्म को जन-जन तक पहुंचाने का है। इससे पहले डॉ. पंड्या एवं शैल दीदी ने संपूर्ण गायत्री परिवार के प्रतिनिधि के रूप में पर्व पूजन किया और हजारों परिजनों को गायत्री महामंत्र से दीक्षित किया।