हरिद्वार अर्धकुंभ में अखाड़े शुरू करेंगे नई परंपरा
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अगले साल हरिद्वार में होने वाले अर्द्धकुंभ से एक नई परंपरा प्रारंभ करने का रास्ता साफ हो गया है। मेला प्रशासन ने संतों की मांग पर अर्द्धकुंभ पर शाही स्नान की तैयारी शुरू कर दी है। मेला डीआईजी ने जूना अखाड़े जाकर सभी संतों से स्नान के बारे में पूरी जानकारी हासिल की।
गौरतलब है कि हरिद्वार अर्द्धकुंभ पर संतों की कोई भी गतिविधियां नहीं रहती हैं। इसके विपरीत प्रयाग में अर्द्धकुंभ पर सभी शाही स्नान होते हैं।
कुछ समय से संत यह सवाल उठाते आए हैं कि एक स्नान कर हरिद्वार अर्द्धकुंभ को भी संतों की विरासत से जोड़ दिया जाए। सात अखाड़ों की संन्यास परिषद इस पर पहले ही सहमत थी। लेकिन कुछ अखाड़ों से सहमति न मिल पाने के चलते । बाद में अन्य छह अखाड़ों ने भी सहमति प्रदान कर दी।
सभी अखाड़े एक साथ करेंगे शाही स्नान
अखाड़ों ने तय कर लिया है कि महाशिवरात्रि के दिन होने वाले अर्द्धकुंभ स्नान पर कनखल चौक से हरकी पैड़ी तक शाही जुलूस निकाला जाएगा। सभी अखाड़ों के संत अलग-अलग समय के बजाए एक साथ स्नान करेंगे।
मेला डीआईजी जीएस मर्तोलिया ने हरिद्वार की अधिष्ठात्री मायादेवी का पूजन करने के बाद जूना अखाड़े जाकर सभी अखाड़ा प्रतिनिधियों से स्नान के कार्यक्रम की जानकारी ली। चूंकि यह परंपरा पहली बार शुरू होगी, अत: इसे संतों के भीतरी जोड़ घटाव से अलग रखने का फैसला किया गया।
बैठक की जानकारी देते हुए अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि इस संबंध में अखाड़ों के साथ और विस्तार से बात होगी। संतों का एक प्रतिनिधि मंडल प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी यात्रियों को आकर्षित करने वाली परंपरा के बारे में वार्ता करेगा।