देहरादून नशा मुक्ति केंद्र में छोटी-छोटी गलतियों पर बेहद कड़ी सजा भुगतनी पड़ती थी। सजा ऐसी कि नुकीले स्टूल और ईंटों पर पांच से छह घंटे तक बैठाया जाता था। कई बार तो लड़कियां और लड़के घायल भी हो जाते थे।
एक पीड़िता ने बताया कि यहां पर प्रताड़ना की हद पार की जाती थी। यदि किसी ने अपनी प्लेट धोने में थोड़ी देर कर दी तो उसे सजा भुगतनी पड़ती थी। कोई स्टाफ से थोड़ा तेज बोल दे तो घंटों नुकीली ईंटों पर बैठाया जाता था। रात में ड्यूटी कराई जाती थी। इसके लिए सीसीटीवी कैमरे के सामने खड़ा किया जाता था। सुबह रिकॉर्डिंग में देखा जाता था कि अगर पलक झपकी तो उसे सजा मिलनी तय है। यह सजा डंडों से पिटाई और नुकीले स्टूल पर बैठने की होती थी।
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यहां पर स्टाफ ने सजा के अलग-अलग कोड बना रखे थे। स्टूल पर बैठाने को स्टूल देना। ईंट पर बैठाने को ब्रिक पनिशमेंट और डंडों से पीटने को स्टिक कॉन्सिक्वेंस कहा जाता था। पुलिस इस सेंटर के भीतर इन सब बातों की पड़ताल करेगी। यहां पर आठ सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इनकी पड़ताल भी की जा रही है।